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Shimla News: अटल टनल के पास गंदगी रोकने के लिए सरकार ने गठित की कमेटी, हाईकोर्ट में दी जानकारी

Fri, 02 Jun 2023 06:43 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 02 Jun 2023 06:43 PM IST
सार

 गंदगी रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने कमेटी का गठन किया है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि जिलाधीश कुल्लू ने इसके लिए कमेटी का गठन कर लिया है।

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To stop the dirt near Atal Tunnel, the govt constituted a committee, information given in the High Court
अटल टनल रोहतांग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अटल टनल के पास गंदगी रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने कमेटी का गठन किया है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि जिलाधीश कुल्लू ने इसके लिए कमेटी का गठन कर लिया है। अदालत को बताया गया कि अटल टनल के आसपास गंदगी रोकने के लिए उचित पॉलिसी बनाई जा रही है। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने सरकार को पॉलिसी को अदालत के समक्ष पेश करने के आदेश दिए हैं। बता दें कि अदालत ने गंदगी को हटाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी कोर्ट के समक्ष रखने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना लगाने वाले नियम व पिछले एक वर्ष में वसूल किए गए जुर्माने की रकम की जानकारी भी मांगी थी। अटल टनल के आसपास गंदगी को रोकने के लिए बनाए गए अथवा बनाए जाने वाले प्रावधानों की जानकारी भी मांगी गई थी।

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इनमें चेतावनी बोर्ड, डस्टबिन, पुरुषों व महिलाओं के लिए शौचालय और क्षेत्र को साफ सुथरा बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे उपाय शामिल हैं। गौरतलब है कि अटल टनल एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल के रूप में उभरा है और बड़ी तादाद में पर्यटक लाहौल की खूबसूरत वादियों में घूमने आते हैं। पर्यटकों की ओर से अटल टनल के आसपास कचरा फैलाया जा रहा है। यहां न तो पर्याप्त कूड़ेदान हैं और न ही पुरुषों और महिलाओं के लिए पर्याप्त शौचालय हैं। यह टनल हिमालय की पीर पंजाल शृंखला के उत्तरी क्षेत्र में रोहतांग दर्रे के नीचे बनाई गई है। 3,200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस टनल का लोकार्पण 3 अक्तूबर, 2020 को किया गया था। रक्षा मंत्रालय के तहत बीआरओ ने इसका कार्य पूरा किया था।

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कनलोग कब्रिस्तान का विरासत सलाहकार समिति करेगी निरीक्षण

वहीं,  विरासत स्थल कनलोग कब्रिस्तान में अतिक्रमण किए जाने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने हाईकोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अदालत ने इस रिपोर्ट पर विचार करने से पहले विरासत सलाहकार समिति की रिपोर्ट तलब की है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश विरेंदर सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 30 जून को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता शिवेंद्र सिंह और अन्य की याचिका पर हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने कब्रिस्तान में किसी भी निर्माण कार्य कर रोक लगा दी है। इसके अलावा अदालत ने स्पष्ट किया कि विरासत स्थल पर कार पार्किंग और निजी एवं धार्मिक कार्यक्रम भी नहीं हो सकेंगे। याचिकाकर्ता ने याचिका के माध्यम से अदालत को बताया कि कनलोग कब्रिस्तान शिमला के दक्षिण-पूर्व की ओर स्थित है। यह देश के सबसे पुराने कब्रिस्तानों में से एक है, जिसकी सबसे पुरानी कब्र 1850 की है। ईसाइयों और पारसियों के अंतिम विश्राम स्थलों का आवास यह स्थल अत्यधिक राष्ट्रीय महत्व रखता है और इतिहास में कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों की यादें संजोए हुए है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह कब्रिस्तान को स्थानीय समुदाय, पर्यटकों और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रमुख विरासत है। आरोप लगाया गया है कि पादरी महेंद्र सिंह और उनके ट्रस्ट ने कब्रिस्तान के रखरखाव की जिम्मेदारी संभाली है, लेकिन कब्रिस्तान के संरक्षण के प्रयासों के बजाए निजी हितों को प्राथमिकता दी गई है। बड़े पैमाने पर अनधिकृत निर्माण ने कब्रिस्तान की मूल अखंडता को खराब कर दिया है। इसमें भद्दे शेड का निर्माण, 50 से अधिक लोगों के लिए कई निजी आवास, पानी की टंकियां और यहां तक कि खुले हरित क्षेत्र पर अतिक्रमण करने वाली पार्किंग भी शामिल है। रात के समय भारी मशीनरी का उपयोग करके कब्र के ऊपर एक सड़क बनाई जा रही है। दो शताब्दियों से अधिक पुरानी कई कब्रें पहले ही उखाड़ दी गई हैं या मिट्टी से ढकी हुई हैं। इसके अतिरिक्त, कब्रिस्तान के हरे भरे स्थान के भीतर पादरी के निजी वाहन के लिए पार्किंग की सुविधा स्थापित की गई है।

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