अब हमला करने पर भी नहीं मारे जा सकेंगे बंदर, ये रही वजह
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राजधानी शिमला समेत प्रदेश के 38 शहरों में बंदरों के वर्मिन घोषित रहने की मियाद बुधवार को खत्म हो रही है। प्रदेश वन विभाग के लाख प्रयासों के बावजूद केंद्रीय वन मंत्रालय ने इस मियाद को बढ़ाने से मना कर दिया है। सरकार के मियाद बढ़ाने के पत्र के जवाब में केंद्र ने वर्र्मिन घोषित करने के दौरान का आउटपुट मांगा है।
इस दौरान एक भी बंदर के मारे जाने की जानकारी विभाग के पास आधिकारिक रूप से नहीं पहुंची, लिहाजा मंत्रालय ने परोक्ष रूप से मियाद बढ़ाने से इनकार कर दिया है।
लंबे पत्राचार और दबाव के बाद केंद्र ने पिछले साल 24 मई को शिमला समेत 38 शहरों में बंदरों को वर्मिन घोषित कर दिया था। लोगों को बंदरों से समस्या तो थी लेकिन धार्मिक आस्था और सामाजिक संगठनों से टकराव के डर के कारण एक भी बंदर को मारकर विभाग को सूचना नहीं दी गई।
प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान फिर भी लोगों ने नहीं मारे बंदर
बंदर मारने के लिए सरकार ने प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान किया लेकिन उसका भी असर नहीं हुआ। उधर, बंदरों का आतंक जारी रहा और आए दिन लोग बंदरों के हमले में घायल होते रहे। इस पर वन विभाग ने शिमला समेत प्रदेश भर में ईको टास्क फोर्स के सदस्यों को लोगों की मदद के लिए तैनात किया लेकिन उसके बाद भी लोग बंदर मारने के लिए आगे नहीं आए।
इस दौरान मियाद खत्म होने को आ गई तो विभाग ने केंद्र को फिर से मियाद एक साल और बढ़ाने के लिए पत्र लिख दिया। अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण कपूर ने कहा कि बंदरों की समस्या से निपटने के लिए लोगों की डिमांड पर ही वर्मिन घोषित करने की कवायद की गई। लेकिन लोग ही बंदरों को मारने से कतरा रहे हैं, ऐसे में समस्या से निपटने के लिए कोई और रास्ता तलाशा जा रहा है।