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Shimla News: चमियाना सरकारी लैब में थायरॉयड जांच ठप
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रिएजेंट की कमी से सैंपल आईजीएमसी भेजे जा रहे, रिपोर्ट मिलने में लग रहा अधिक समय
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अटल सुपर स्पेशियलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना की सरकारी प्रयोगशाला में इन दिनों थायरॉयड की जांच नहीं हो पा रही है। प्रयोगशाला में आवश्यक रिएजेंट उपलब्ध न होने के कारण मरीजों के सैंपल जांच के लिए इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज भेजे जा रहे हैं। इस व्यवस्था के चलते मरीजों को रिपोर्ट मिलने में पहले की तुलना में अधिक समय लग रहा है।
अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंचते हैं जिन्हें थायरॉयड की जांच करानी होती है। सामान्य स्थिति में लैब में ही यह जांच हो जाती थी और मरीजों को अपेक्षाकृत कम समय में रिपोर्ट मिल जाती थी। लेकिन रिएजेंट खत्म होने के कारण अब यहां जांच संभव नहीं हो पा रही है। मरीजों के सैंपल लेने के बाद उन्हें जांच के लिए आईजीएमसी भेजा जा रहा है।
सैंपल बाहर भेजने की प्रक्रिया के कारण रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। इससे इलाज शुरू करने या दवा की खुराक तय कराने में भी इंतजार करना पड़ रहा है। कई मरीजों को रिपोर्ट के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। थायरॉयड की जांच कई बीमारियों के उपचार में महत्वपूर्ण होती है। समय पर रिपोर्ट न मिलने से मरीजों के इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अस्पताल में आने वाले कुछ मरीजों का कहना है कि पहले लैब में ही जांच हो जाती थी, लेकिन अब सैंपल बाहर भेजे जा रहे हैं, जिससे रिपोर्ट मिलने में ज्यादा समय लग रहा है।
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अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक सुधीर शर्मा ने बताया कि रिएजेंट उपलब्ध होते ही प्रयोगशाला में थायरॉयड जांच की सुविधा फिर से शुरू कर दी जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अटल सुपर स्पेशियलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना की सरकारी प्रयोगशाला में इन दिनों थायरॉयड की जांच नहीं हो पा रही है। प्रयोगशाला में आवश्यक रिएजेंट उपलब्ध न होने के कारण मरीजों के सैंपल जांच के लिए इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज भेजे जा रहे हैं। इस व्यवस्था के चलते मरीजों को रिपोर्ट मिलने में पहले की तुलना में अधिक समय लग रहा है।
अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंचते हैं जिन्हें थायरॉयड की जांच करानी होती है। सामान्य स्थिति में लैब में ही यह जांच हो जाती थी और मरीजों को अपेक्षाकृत कम समय में रिपोर्ट मिल जाती थी। लेकिन रिएजेंट खत्म होने के कारण अब यहां जांच संभव नहीं हो पा रही है। मरीजों के सैंपल लेने के बाद उन्हें जांच के लिए आईजीएमसी भेजा जा रहा है।
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सैंपल बाहर भेजने की प्रक्रिया के कारण रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। इससे इलाज शुरू करने या दवा की खुराक तय कराने में भी इंतजार करना पड़ रहा है। कई मरीजों को रिपोर्ट के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। थायरॉयड की जांच कई बीमारियों के उपचार में महत्वपूर्ण होती है। समय पर रिपोर्ट न मिलने से मरीजों के इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अस्पताल में आने वाले कुछ मरीजों का कहना है कि पहले लैब में ही जांच हो जाती थी, लेकिन अब सैंपल बाहर भेजे जा रहे हैं, जिससे रिपोर्ट मिलने में ज्यादा समय लग रहा है।
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अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक सुधीर शर्मा ने बताया कि रिएजेंट उपलब्ध होते ही प्रयोगशाला में थायरॉयड जांच की सुविधा फिर से शुरू कर दी जाएगी।