चांशल घाटी में बने कैंप पर गिरी आसमानी बिजली, 3 ट्रैकरों की मौत, 7 झुलसे
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जिला शिमला की दुर्गम घाटी चांशल से सटे उत्तराखंड क्षेत्र में शुक्रवार देर शाम बिजली गिरने से तीन ट्रैकरों की मौत हो गई। सात अन्य लोग बुरी तरह से झुलस गए हैं। सभी उत्तराखंड के रहने वाले हैं। वे दो दिन पूर्व ही ट्रैकिंग कैंप के लिए आए थे। घटना की सूचना मिलते ही शनिवार सुबह उत्तराखंड से एक हेलीकॉप्टर भेजा गया, लेकिन सिंगल इंजन होने के कारण तीन शवों को ही पुरोला लिफ्ट कर पाया।
दूसरी बार मौसम ने साथ नहीं दिया। घायलों को पैदल रास्ते से ही ले जाना पड़ा। उधर, उत्तराखंड प्रशासन की सूचना पर चिड़गांव पुलिस की एक टीम भी दस किलोमीटर पैदल चलकर घायलों की मदद करने पहुंची। उत्तराखंड पर्यटन विकास निगम की ओर से चांशल घाटी को ट्रैक ऑफ द ईयर चुना गया था। पर्यटन निगम ने ट्रैकर को चांशल पर कैंप बनाने के लिए के लिए स्थानीय लोगों को तैनात किया था।
दो दिन पहले तक पर्यटन निगम के अधिकारी भी मौके पर थे, लेकिन हादसे के पहले दिन अधिकारी और सरकारी कर्मचारी मौके से लौट चुके थे। शुक्रवार शाम इस कैंप पर आसमानी बिजली गिर गई। मृतकों में अमर सिंह पुत्र दलीप चंद गांव बलावट उम्र 55 साल, लोकिंद्र सिंह उम्र 27 साल पुत्र रतन सिंह गांव बलावट, मोहर सिंह उम्र 48 साल गांव मौंडा तहसील पुरोला जिला उत्तरकाशी के रहने वाले थे।
छोटा हेलिकाप्टर होने से राहत कार्यों में देरी
घायलों में दिनेश सिंह, जगदीश ,चमन सिंह, अखिलेश, जितेंद्र, संजय सिंह और जनक सिंह निवासी मौंडा तहसील मोरी जिला उत्तरकाशी शामिल हैं। हादसा सड़क से करीब बीस किलोमीटर दूर पैदल ट्रैक पर हुआ। सूचना पुरोला के एसडीएम शैलेंद्र नेगी ने डीएसपी मदन रोहडू कांत शर्मा को दी।
सूचना के बाद थाना प्रभारी मनीश राज शर्मा को टीम के साथ घटना स्थल के लिए रवाना किया गया। चांशल घाटी से करीब दस किलोमीटर पैदल सफर के बाद चिड़गांव पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शवों को लोगों के साथ निकालने में सहयोग किया।
उत्तराखंड प्रशासन की ओर से घायलों और शवों को निकालने के लिए केदारनाथ से छोटा हेलिकाप्टर भेजा गया। सिंगल इंजन के कारण पहले हेलिकाप्टर को उतरने में परेशानी हुई। उसमें केवल तीन लोगों के बैठने की पायलट ने हामी भरी। ऐसे में सोलह घंटे से घायल पडें लोग गुस्सा हो गए।
हेलिकाप्टर तीन लोगों को पुरोला उतार कर वापस लौट गया। प्रशासन को दोबारा हेलिकाप्टर मंगवाना पड़ा। करीब साढे़ चार बजे हेलिकाप्टर ने चांशल घाटी के लिए दूसरी उड़ान भरी। खराब मौसम के कारण हेलिकाप्टर नहीं उतर सका।