तीन राज्यों की टीमें इस दिन से शिमला में पकड़ेंगी बंदर, शुरू होगा महाअभियान
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मुसीबत बन चुके बंदरों को पकड़ने के लिए सोमवार से शिमला में महाअभियान शुरू होगा। विभाग ने बंदर पकड़ने और नसबंदी के लिए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान से टीमें बुलाई हैं। इनमें एक टीम पहुंच गई है।
बाकी टीमें सोमवार तक पहुंचेंगी। विभाग का दावा है कि इस बार एक-एक बंदर की बजाय पूरे समूह को पकड़कर बंदरों की नसबंदी की जाएगी। इसके बाद इन्हें जंगलों में छोड़ा जाएगा।
पिछले दस साल से लोगों के लिए परेशानी बने बंदरों की नसबंदी को वन विभाग ने नई रणनीति बनाई है। इस बार एक बंदर की बजाय पूरे समूह को एक साथ पकड़ा जाएगा। इससे साथी बंदर के पकड़े जाने पर बंदरों के उग्र होकर हमला करने की घटनाओं में कमी आएगी।
बंदरों के समूह को पकड़कर उसके व्यस्कों की नसबंदी कर वंश को आगे बढ़ने से रोका जाएगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव वन तरुण कपूर ने बताया कि इस बार दो हजार बंदरों को पकड़कर नसबंदी करने का लक्ष्य रखा है।
बंदरों से निपटने को पंचायतों को करेंगे जागरूक
नसबंदी के बाद इन्हें छोड़ने के लिए भी स्थान चिह्नित किए जा रहे हैं। उन स्थानों के आसपास खाने-पीने की भी व्यवस्था देखी जा रही है। विभाग ने यह कवायद ऐसे समय में शुरू की है, जब उसके नसबंदी अभियान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों सवाल उठा रहे हैं।
कपूर ने बताया कि बंदरों को नगर निगम शिमला समेत प्रदेश की 38 तहसीलों में वर्मिन घोषित किया है। वर्मिन घोषित करने की मियाद 24 दिसंबर को खत्म हो रही है। अभी तक महज पांच बंदर ही मारे गए हैं।
ऐसे में पंचायतों को नए सिरे से जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा। विभाग के फील्ड अफसरों को कहा गया है कि वह पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर बंदरों की समस्या से निपटने के लिए चर्चा कर कदम उठाएं।