कंडा जेल से फरार तीनों कैदी गिरफ्तार, यहां जंगल में छिपे हुए थे
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कंडा जेल से फरार तीनों विचाराधीन कैदी सुबाथू के नजदीक रड़ियाणा के जंगल से पकड़े गए हैं। तीनों कैदी जेल से भागने के बाद सुबाथू के नजदीक जंगल में ही छिपे थे।
जहां से पुलिस ने वीरवार देर रात करीब ढाई बजे एक कैदी को दबोच लिया है। सबसे पहले पुलिस ने कैदी प्रेम बहादुर को पकड़ा जो सड़क किनारे एक पैरापिट पर बैठा था। गश्त के दौरान सड़क से गुजर रही पुलिस ने कैदी प्रेम बहादुर को आसानी से गिरफ्तार कर लिया।
उससे की गई पूछताछ के आधार पर अन्य दोनों कैदियों के भी जंगल में ही छिपे होने की जानकारी सामने आई। जिसके बाद पुलिस ने जंगल से बाहर निकलने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए और शुक्रवार सुबह से ही खोजबीन शुरू कर दी।
ऐसे चला पुलिस का तलाशी अभियान
दोनों की तलाश में पुलिस ने शुक्रवार को दिन भर सुबाथू के जंगल और संपर्क मार्ग पर तलाशी अभियान छेड़ा गया। जिसमें पुलिस ने शुक्रवार शाम करीब पांच बजे सफलता हाथ लगी।
पुलिस की टीम ने कैदियों को पकड़ने के लिए रड़ियाणा और कालीधार के बीच जंगल में अभियान चला रखा था। शुक्रवार शाम के समय स्थानीय लोगों ने पुलिस को दोनों कैदियों के रड़ियाणा में छिपे होने की सूचना दी।
जिसके आधार पर पुलिस की एक टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों कैदियों को पकड़ने की कोशिश की। लेकिन पुलिस की टीम को आता देखकर कैदी भाग निकले। पुलिस की टीम ने उनका पीछा किया और काफी दूर भागने के बाद दोनों को पकड़ लिया गया।
तीनों कैदियों की पहचान प्रेम बहादुर, लीलाधर व प्रताप सिंह के रूप में हुई है। जो दुष्कर्म व हत्या जैसे संगीन मामले में विचाराधीन हैं और कंडा जेल में बंद थे। यहां से 6 दिसंबर की रात को दीवार फांदकर तीनों फरार हो गए थे।
पुलिस से बचने के लिए लगाई छलांग तारों में फंसे
पुलिस को सूचना मिलने के बाद पूरे जंगल में पुलिस व स्थानीय लोगों ने कैदियों को तलासने की मुहिम तेज कर दी। कैदियों ने पुलिस को देख जंगलों से भागने के लिए झाड़ियों में छलांग लगा दी। लेकिन छावनी परिषद की सीमा पर लगी कंटीली तारों में फंस गए।
पुलिस व कैदियों के बीच इस भागदौड़ का पूरा नजारा रड़ियाणा के ग्रामीणों ने अपनी आंखों के सामने देखा। आखिर पुलिस जक कैदियों को पकड़ कर लाई तो स्थानीय लोगों ने तालियों के साथ पुलिस का मनोबल भी बढ़ाया।
पुलिस ने किए थे पुख्ता बंदोबस्त : एसपी
पुलिस अधीक्षक मोहित चावला ने बताया कि पुलिस ने तीनों कैदियों को पकड़ने के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे। स्थानीय लोगों से मदद ली गई। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात था।
लोगों से संपर्क का फायदा भी पुलिस को मिला और आखिर तीनों कैदी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने से पूर्व ही पकड़े गए। इन तीनों से अब आगे पूछताछ की जाएगी।
आगे कैदी-पीछे पुलिस, लोग बजाते रहे तालियां
दो फरार कैदियों को पकड़ने की कहानी पूरी फिल्मी लगती है। पुलिस के आह्वान पर स्थानीय लोग भी मदद को आगे आए। रडि़याणा में भनक लगते ही कैदी भागे तो उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस भी पीछे दौड़ी। पुलिस को देख कैदी जंगल में झाडि़यों के बीच से भाग निकले।
लोग पूरा नजारा देख रहे थे। आगे कैदी-पीछे पुलिस। लोग जवानों का तालियां बजाकर मनोबल बढ़ाते रहे। छावनी परिषद की सीमा पर लगी कंटीली तारों में भागते-भागते दोनों कैदी फंस गए और आखिरकार पुलिस ने उन्हें पकड़ ही लिया।
कैदियों ने रड़ियाणा के जंगल में बिताई थी रात
कंडा जेल से फरार कैदियों ने सुबाथू से सटे रड़ियाणा के जंगल में वीरवार देर रात एक खंडहर में आग जलाकर रात बिताई थी। पुलिस ने इस सूचना के आधार पर खंडहर में जाकर भी जांच की। कैदियों के जंगल में छिपे होने की सूचना के बाद पुलिस ने पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर रखा था।
कैदियों के पास खाने-पीने का सामान भी नहीं था। ऐसे में कैदी जल्द पुलिस की गिरफ्त में आ गए। शुक्रवार को दिन भर जारी रखा गया। पुलिस न सिर्फ जंगल, बल्कि सड़क से गुजरने वाले वाहनों की भी तलाशी ले रही थी।
सोलन-बिलासपुर और सुबाथू -चंडीगढ़ -कुनिहार-शिमला को मार्ग आपस में जोड़ता है। यह पूरा मार्ग इस जंगल के आसपास से गुजरता है और मार्ग पर छोटे वाहनों के अलावा ट्रकों की आवाजाही रहती है। पुलिस जगह-जगह नाके लगाकर ट्रकों की भी तलाशी लेती रही।
घेरेबंदी से पकड़े गए तीनों कैदी
कंडा जेल से फरार कैदियों को पकड़ने में शिमला और सोलन पुलिस की साझा मुहिम रंग लाई। इससे पहले कि तीनों कैदी दूर भाग जाते, इन्हें 48 घंटे के भीतर ग्रामीणों की मदद से दबोच लिया गया। पुलिस को पुख्ता सूचना मिल चुकी थी कि तीनों आरोपी रड़ियाणा क्षेत्र में देखे गए हैं।
ऐसे में सोलन और शिमला पुलिस ने घेरेबंदी शुरू कर दी। जेल पुलिस के जवान भी पुलिस के साथ थे और आखिरकार बारी बारी तीनों फरार कैदियों को पकड़ लिया गया। बताया जा रहा है कि तीनों पहले साथ ही जंगल में छिपते फिर रहे थे, लेकिन फिर इनमें झगड़ा हो गया।
इसके बाद दो कैदी अपने साथी को छोड़कर जंगल से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान ग्रामीणों की नजर भी इन पर पड़ी। बताया जा रहा है कि तीनों कैदियों ने एक दुकान से बिस्कुट और नमकीन खरीदा था।
इसके लिए पैसे कहां से आए, इसको लेकर पूछताछ चल रही है। पुलिस इस पहलू से भी जांच कर रही है कि कहीं किसी अन्य व्यक्ति ने तो इनकी मदद नहीं की। जेल से भागने, जंगल में छिपने और खाने पीने को लेकर, कहीं कोई और शख्स तो इस मामले में शामिल नहीं है, इसका भी पता लगाया जा रहा है।
पुलिस जवानों और ग्रामीणों की मदद से मिली कामयाबी
एसपी शिमला सौम्या सांबशिवान ने कहा कि 48 घंटों से फरार कैदियों को पकड़ने के लिए पूरा पुलिस महकमा, जेल विभाग के कर्मी जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाए हुए थे। रड़ियाणा गांव के लोगों ने भी इस ऑपरेशन में पुलिस की पूरी मदद की।
इसी तालमेल के चलते तीनों फरार कैदियों को पकड़ा जा सका। शुक्रवार सुबह से ही एसपी शिमला सौम्या सांबशिवान, एएसपी कुलवंत सिंह, डीएसपी विद्याचंद नेगी सहित करीब तीन दर्जन से अधिक जवान घेरेबंदी किए हुए थे।
तीनों कैदियों को शुक्रवार देर रात बालूगंज थाने लाया गया। कैदियों के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए इनके साथ अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं। शनिवार को इन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।