हिमाचल में स्वाइन फ्लू से तीन और मौतें, बच्ची ने आईजीएमसी में तोड़ा दम
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स्वाइन फ्लू की चपेट में आई दो साल की बच्ची की आईजीएमसी में वीरवार देर रात मौत हो गई। बिलासपुर की प्रियंका को 20 जनवरी को तबीयत खराब होने पर आईजीएमसी में दाखिल किया गया था, लेकिन वीरवार देर रात बच्ची की मौत हो गई। अब तक आईजीएमसी में शिमला, मंडी और बिलासपुर के कुल चार मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि प्रदेश भर मेें अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है।
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनक राज ने बताया कि एक मरीजों की मौत वीरवार को हुई, जबकि दो की भी इसी माह मौत हो चुकी है, लेकिन स्वाइन फ्लू की आशंका के चलते इनके सैंपल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे भेजे गए थे, जिनकी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। इनमें जुन्गा के चेवड़ा के चंद्रशेखर (56) को छह जनवरी को दाखिल किया था और इसी दिन उनकी मौत हो गई। इसके अलावा करसोग के गांव ठंडापानी के पदमा राम (65) को दस जनवरी को आईजीएमसी में दाखिल किया गया था। उनकी 14 जनवरी को मौत हो गई थी।
कांगड़ा, शिमला, चंबा में फैलने लगा प्रकोप
कांगड़ा, शिमला और चंबा जिले में स्वाइन फ्लू का प्रकोप फैलने लगा है। जनवरी के दौरान प्रदेश में कुल 125 मरीजों के टेस्ट किए गए। इनमें 25 पॉजिटिव केस मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कांगड़ा में 13, शिमला में तीन, चंबा-सोलन-ऊना में दो-दो और बिलासपुर-कुल्लू और मंडी से एक-एक मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव रही है।
ऐसे की जा सकती है पहचान
स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अजय गुप्ता ने बताया कि सभी जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अलर्ट कर दिया है। मरीजों को सभी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। बताया कि लक्षणों का पता चलते ही तुरंत अस्पताल में इलाज के लिए आना चाहिए।
लापरवाही बरतने से बीमारी के अन्य व्यक्तियों को फैलने की आशंका अधिक रहती है। सभी अस्पतालों में टेमीफ्लू दवा का पर्याप्त मात्रा में स्टॉक रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। आइसोलेशन वार्ड भी तैयार रखने को कहा गया है।
मरीजों को हलका बुखार, जुकाम, गला खराब, तेज बुखार व सांस चढ़ना जैसी समस्याएं पेश आती हैं। छोटा बच्चा, गर्भवती महिला, वरिष्ठ नागरिक अगर इस बीमारी की चपेट में आते है तो उनके लिए यह स्थिति खतरनाक हो जाती है।
ध्यान रखने की दरकार
5 साल से कम उम्र के बच्चे
डायबिटीज के मरीज
अस्थमा के मरीज जिनका इलाज चल रहा हो
कफ और कोल्ड व लगातार खांसी आना
नींद न आना, बहुत ज्यादा थकान होना
बुखार, दवा खाने के बाद भी बुखार लगातार बढ़ना
खुद रोक सकते हैं वायरस
जब भी खांसें तो मुंह पर हाथ या रुमाल रखें
फ्लू के सीजन में किसी से हाथ न मिलाएं
पौष्टिक भोजन खाएं, बुखार पर आराम करें
तौलिया व रुमाल अलग कर दें
खाना खाने से पहले या बाहर से आने पर हाथ अच्छी तरह से धोएं
बच्चे को बुखार व कफ हो तो उसे स्कूल न जाने दें