नाइजीरिया में समुद्री लुटेरों के चंगुल से छुड़ाए तीनों हिमाचली युवक
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नाइजीरिया में अगवा तीनों हिमाचली युवकों को समुद्री लुटेरों के चंगुल से छुड़वा लिया गया है। दो-तीन दिन के भीतर युवकों को सुरक्षित भारत वापस लाया जाएगा। यह बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंडी के भ्यूली में पत्रकार वार्ता में कही।
विपाशा सदन में मुख्यमंत्री ने बताया कि बुधवार सुबह विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से फोन पर इस बारे में बात हुई है, जिसमें विदेश मंत्री ने युवाओं को लुटेरों के चंगुल से छुड़वाने की जानकारी दी।
तीनों युवक मर्चेंट नेवी में तैनात थे, जिनका 17 समुद्री लुटेरों ने बंदूक के दम पर नाइजीरिया में अपहरण कर लिया था। इसके बाद उन्हें जंगल में बंधक बनाकर रखा गया और परिवार वालों से फिरौती की मांग की थी।
युवाओं को छोड़ने की एवज में लुटेरे फिरौती के रूप में 11 मिलियन नायरा करेंसी की मांग कर रहे थे। अपहृत युवकों के घर पर लुटेरों ने सेटेलाइट कॉल से अपहरण की जानकारी दी थी। बंधकों में नगरोटा सूरियां की पंचायत सुकनाड़ा का सुशील कुमार, पालमपुर का अजय कुमार और नगरोटा बगवां की उस्तेहड़ पंचायत के रड गांव का पंकज शामिल है।
परिवार वाले तीनों को सुरक्षित छुड़वाने की मांग सरकार से कर रहे थे। युवाओं के लिए चिंता में डूबे परिवार वाले लगातार विदेश मंत्रालय के संपर्क में थे। वे लुटेरों को फिरौती की राशि भी देने को तैयार हो गए थे।
We have secured the release of three Indian nationals Sushil Kumar, Pankaj Kumar and Ajay Kumar - all from Himachal Pradesh who were abducted in Nigeria. I appreciate the efforts of Shri B.N.Reddy Indian High Commissioner in Nigeria. @jairamthakurbjp pic.twitter.com/hDZVqWSKRi
— Sushma Swaraj (@SushmaSwaraj) April 11, 2018
केंद्र और विदेश मंत्री के प्रयास से हुआ संभव
पालमपुर (कांगड़ा)। तीनों युवकों के सुरक्षित छुड़वाने पर सांसद शांता कुमार ने कहा कि भारत सरकार और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रयास से ही तीनों युवकों को समुद्री लुटेरों के चंगुल से सकुशल छुड़वाया जा सका। अब इनको भारत लाया जा रहा है।
शांता ने बताया कि युवाओं को छोड़ने की सूचना विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उन्हें फोन पर दी। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के संबंध में मंडी में हैं। जब बैठक चल रही थी तो उन्हें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का फोन आया और उन्होंने तीनों युवकों को सकुशल छुड़वाने और जल्द भारत वापस लाने के बारे में बताया।
शांता ने कहा कि उन्होंने उसी समय कार्यसमिति की बैठक में सभी सदस्यों को भी यह सूचना दी। उन्होंने पूरे प्रदेश और अपनी तथा प्रभावित परिवारों की तरफ से भारत सरकार के इस सराहनीय कार्य पर सुषमा स्वराज का धन्यवाद किया है।
लुटेरों की 12 मार्च को आई थी पहली कॉल
12 मार्च को सेटेलाइट फोन से सुशील के परिवार वालों को लुटेरों ने कॉल कर तीनों युवकों के अपहरण की सूचना दी। उन्हें छोड़ने के एवज में 11 मिलियन नायरा करेंसी के रूप में फिरौती मांगी थी।
लुटेरों ने चेतावनी दी थी कि अगर फिरौती नहीं मिली तो तीनों को मार दिया जाएगा। इससे पहले सुशील की 31 जनवरी को परिवार वालों से बातचीत हुई थी। मर्चेंट नेवी में तैनात सुशील 13 साल से अलग-अलग कंपनियों के साथ काम रहा था।
24 मार्च को फिर आई जान से मारने की धमकी
समुद्री लुटेरों ने 24 मार्च को फिर सुशील के परिवार वालों को फोन कर फिरौती न देने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी। लुटेरों ने 26 मार्च तक का अल्टीमेटम दिया था। इससे तीनों युवाओं के परिवार वाले दहशत में आ गए। चिंता में डूबे परिवार वालों के घर में चूल्हा तक नहीं जला। विदेश मंत्रालय से भी कोई सूचना नहीं आ रही थी।
मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री नड्डा और शांता ने किए प्रयास
परिवार वालों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और सांसद शांता कुमार को अपना दुखड़ा बताया। इसके बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पास मामला पहुंचा। सभी तरह से प्रयास के बाद आखिर तीनों युवाओं को समुद्री लुटेरों के चंगुल से छुड़ा लिया गया।
घर में लौटी रौनक, खुशी का नहीं ठिकाना
नीरज शर्मा, नगरोटा सूरियां (कांगड़ा)। नाइजीरिया में समुद्री लुटेरों की कैद से जिला कांगड़ा के सुशील धीमान, पंकज कुमार और अजय कुमार को छुड़वाने की खबर मिलते ही उनके घरों में खुशी का माहौल है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। तीनों युवक अभी नाइजीरिया में ही हैं।
जरूरी कागजी कार्यवाही के दो से तीन दिन के भीतर युवकों को भारत लाया जाएगा। युवकों की रिहाई के बाद परिजन बेहद खुश हैं। सभी भारत सरकार का धन्यवाद कर रहे हैं। लुटेरों की कैद से रिहा होने के बाद नगरोटा सूरियां की पंचायत सुगनाडा के सुशील धीमान के घर रौनक लौट आई है।
सुशील धीमान के पिता रघुवीर धीमान को उनके बेटे की रिहाई की खबर विधायक अर्जुन सिंह ठाकुर ने फोन पर दी। रघुवीर ने बताया कि विधायक ने सांसद शांता कुमार से उनकी बात करवाई।
रघुवीर ने बताया कि करीब ढाई महीने बाद उनके बेटे की रिहाई की खबर आई है। उन्होंने पिछले कई दिनों से खाना भी नहीं खाया है। सुशील की पत्नी ने बताया कि दोनों बच्चे पापा के जल्द घर आने का इंतजार कर रहे हैं। घर पर बधाई देने वाले पहुंच रहे हैं।
मां बोली-पंकज को खिलाउंगी मनपसंद आलू की सब्जी
अनिल भंडारी, नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। नाइजीरिया में पंकज कुमार की रिहाई की खबर का पता लगते ही पंकज के घर का गमगीन माहौल खुशी में बदल गया। सदमे में बदहवास पंकज की मां सलोचना को तो मन्नतों का खजाना मिल गया।
मां ने बताया कि बेटे के घर पहुंचते ही वह उसे उसकी मनपसंद की आलू की सब्जी के अलावा सभी पकवान खिलाएगी जिन्हें वह चाव से खाता है। वहीं, कई दिनों से बीमार पंकज के पिता वेद प्रकाश के लिए बेटे की रिहाई की खबर संजीवनी बन गई।
उन्होंने बताया कि 17 जनवरी 2018 को आखिरी बार उनकी मोबाइल पर पंकज के साथ बात हुई थी। वह यही समझते रहे कि शायद बेटा नेटवर्क से बाहर है। जब मैं पीजीआई में दाखिल था तब 26 वर्षीय बेटे के अपहरण की खबर घर में आई थी।
मुझे तो अस्पताल वापस आने पर यह खबर बताई गई। पंकज के पिता वेद प्रकाश, माता सलोचना देवी और उसतेहड़ पंचायत प्रधान अविनाश उपाध्याय ने सरकार का आभार जताया है।
सऊदी अरब से डेढ़ माह बाद भी नहीं पहुंचा ओंकार का शव
विक्रम मेहरा,लंज (कांगड़ा)। शाहपुर विधानसभा क्षेत्र की मनेई पंचायत के डीव्वर गांव के ओंकार सिंह का शव डेढ़ माह बाद भी घर नहीं पहुंचा है। सऊदी अरब में 23 फरवरी को ओंकार की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। आेंकार सिंह सऊदी अरब के रियाद में जीएसटीसी कंपनी में दस साल से नौकरी करता था।
उसकी मौत हुए एक महीना और 18 दिन बीत गए हैं, लेकिन शव को भारत लाने के परिजनों के सारे प्रयास विफल रहे हैं। ओंकार के परिजन सांसद शांता कुमार और शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी से भी बेटे के शव को लाने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आ रहा है।
ओंकार के बड़े भाई शमशेर सिंह भी सऊदी अरब में नौकरी करते हैं। वे नौकरी छोड़कर अपने स्तर पर ही पिछले 48 दिन से कागजी कार्रवाई कर रहे हैं। ओंकार के परिजनों का यह भी कहना है कि भारतीय दूतावास के अधिकारी पेपर वर्क करने में देरी कर रहे हैं। ऐसे में अब उन्हें आखिरी बार अपने बेटे का चेहरा देखने की उम्मीद भी टूटने लगी है।
उन्होंने केंद्र सरकार पर भी मदद नहीं करने का आरोप लगाया। ओंकार के छोटे भाई नरेंद्र भारतीय सेना में हैं। भाई की मौत की खबर सुनकर डेढ़ महीने की छुट्टी पर घर आए थे। सात अप्रैल को उनकी छुट्टी भी खत्म हो गई, लेकिन भाई का शव नहीं पहुंचा।
बेटियां देख रहीं पिता की राह
ओंकार सिंह की दो बेटियां सिया और सायना अपने पिता की राह देख रही हैं। अंतिम बार बेटियाें से ओंकार ने जब बात की थी तो एक हफ्ते में घर आने की बात कही थी। तब से बेटियां पिता के आने की राह देख रही हैं। जब ओंकार सिंह अंतिम बार सऊदी अरब गया था, उसके दो-तीन महीने बाद छोटी बेटी सायना का जन्म हुआ था। ओंकार छोटी बेटी का मुंह तक नहीं देख पाया।