फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Thoda game between the Pashi and Shathi groups at the Mata Kamaksha Hariyali fair theog

Shimla: माता कामाक्षा मेले में ठोडा खेल, पाशी और शाठी दलों के बीच जमकर चले तीर, देखें वीडियो

Sat, 14 Sep 2024 04:26 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला/ठियोग
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला/ठियोग Published by: Krishan Singh Updated Sat, 14 Sep 2024 04:26 PM IST
सार

 जिला शिमला की तहसील ठियोग और कोटखाई में सांबर-ब्यौण गांव में आयोजित माता कामाख्या के हरियाली मेले में पारंपरिक ठोडा खेल की झलक देखने को मिली। 

विज्ञापन
Thoda game between the Pashi and Shathi groups at the Mata Kamaksha Hariyali fair theog
पारंपरिक ठोडा खेल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाभारत काल की युद्ध शैली को शिमला संसदीय क्षेत्र के दूरदराज के ग्रामीणों ने ठोडा खेल के रूप में जीवंत रखा है। जिला शिमला की तहसील ठियोग और कोटखाई में सांबर-ब्यौण गांव में आयोजित माता कामाक्षा(कामाख्या) के हरियाली मेले में इस पारंपरिक ठोडा खेल की झलक देखने को मिली।  जिम्मू के पाशी और खशधार के शाठी ठोडा दल के खिलाड़ियों के बीच ठोडा खेला गया। इस दाैरान महाभारत काल की युद्ध शैली के ठोडा खेल में पाशी और शाठी दलों के बीच जमकर तीर चले। 

विज्ञापन


कामाक्षा माता मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सुरेंद्र पाल चौहान ने कहा कि मेला रविवार को संपन्न होगा, जिसमें शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और स्थानीय विधायक कुलदीप सिंह राठौर विशेष रूप से मौजूद होंगे। उन्होंने कहा कि यह मेला हर तीसरे साल होता है। डोमेश्वर गुठाण महाराज का ताला आने के बाद मेला शुरू होता है और पांच दिन चलता है। इस दाैरान माता कामाक्षा यहां विराजमान रहती हैं। इसके बाद वापस अपने देवालय कलाहर जाती हैं। डोम देवता कमेटी कलाहर के सचिव और मेला कमेटी के सदस्य रमेश शर्मा ने कहा कि यह मेला व ठोडा खेल महाभारत काल से चल आ रहा है। 
विज्ञापन



विशेष लिबास पहने ठोडा के खिलाड़ियों ने न सिर्फ विरोधी आक्रमण को झेला बल्कि धनुष और वाण से उसका जवाब भी दिया। ठोडा नृत्य के इस युद्ध में थककर बाहर होने वाले को हारा हुआ माना जाता है। आखिर में जिस टीम के सबसे ज्यादा खिलाड़ी मैदान में रहे, उन्हें जीत का पुरस्कार दिया जाता है। मान्यता है कि ठोडा महाभारत काल की युद्ध शैली है। पहले यह युद्ध शैली थी जो अब खेल का रूप ले चुका है। इस खेल में प्रयोग किए जाने वाले तीर विशेष चांव की लकड़ी से बनते हैं। इसमें हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों के पास तीर कमान, ढांगरू, सिलारा, डागरा और चमड़े का जूता पहना जाता है। खेल में पैर में पर तीर मारने पर फाउल माना जाता है। इस दौरान मैदान में खिलाड़ियों में ठोडा खेलने के लिए काफी उत्साह रहा।  ठोडा खेल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed