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Shimla News: चौकीदार से बना दिया माली अब हाईकोर्ट ने रोका आदेश
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लॉ यूनिवर्सिटी घंडल से जुड़ा है मामला
अब दो जनवरी को होगी मामले की अगली सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट शिमला ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी घंडल के उस आदेश के संचालन पर रोक लगा दी है, जिसके तहत याचिकाकर्ता को चौकीदार के पद से माली के पद पर स्थानांतरित कर दिया था।
न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने विश्वविद्यालय को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी 2026 को होगी। विश्वविद्यालय ने याचिकाकर्ता को शुरू में 1 अगस्त 2017 को अनुबंध के आधार पर चौकीदार के रूप में नियुक्त किया था। बाद में 10 नवंबर 2022 को इसी पद पर उनकी सेवाएं नियमित कर दीं। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि सात साल तक चौकीदार के रूप में नियुक्त होने के बाद यूनिवर्सिटी ने 26 नवंबर 2025 के आदेश से उन्हें गलत तरीके से माली के पद में परिवर्तित कर दिया है। न्यायालय ने 10 नवंबर 2022 के नियमितीकरण आदेश की सावधानीपूर्वक जांच पड़ताल करने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता की सेवाएं चौकीदार के पद के विरुद्ध नियमित की गईं थीं। अदालत ने पाया कि यूनिवर्सिटी के पास उनकी सेवाओं को चौकीदार से माली में बदलने का कोई कारण नहीं था।
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अब दो जनवरी को होगी मामले की अगली सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट शिमला ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी घंडल के उस आदेश के संचालन पर रोक लगा दी है, जिसके तहत याचिकाकर्ता को चौकीदार के पद से माली के पद पर स्थानांतरित कर दिया था।
न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने विश्वविद्यालय को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी 2026 को होगी। विश्वविद्यालय ने याचिकाकर्ता को शुरू में 1 अगस्त 2017 को अनुबंध के आधार पर चौकीदार के रूप में नियुक्त किया था। बाद में 10 नवंबर 2022 को इसी पद पर उनकी सेवाएं नियमित कर दीं। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि सात साल तक चौकीदार के रूप में नियुक्त होने के बाद यूनिवर्सिटी ने 26 नवंबर 2025 के आदेश से उन्हें गलत तरीके से माली के पद में परिवर्तित कर दिया है। न्यायालय ने 10 नवंबर 2022 के नियमितीकरण आदेश की सावधानीपूर्वक जांच पड़ताल करने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता की सेवाएं चौकीदार के पद के विरुद्ध नियमित की गईं थीं। अदालत ने पाया कि यूनिवर्सिटी के पास उनकी सेवाओं को चौकीदार से माली में बदलने का कोई कारण नहीं था।
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