{"_id":"6ad628f5356560599f0fa2e0","slug":"the-play-expressed-the-pain-of-the-memories-of-the-wife-and-loneliness-shimla-news-c-19-sml1002-806741-2026-10-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: पत्नी की यादों और तन्हाई \nका दर्द बयां कर गया नाटक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: पत्नी की यादों और तन्हाई का दर्द बयां कर गया नाटक
विज्ञापन
गेयटी में निर्मल वर्मा की कहानी का मंचन
केशव आर्या के अभिनय ने दर्शकों को किया भावुक
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गेयटी थियेटर में सोमवार को मंच पर अकेलेपन, बिछड़ने के दर्द और अतीत की यादों ने ऐसा भावनात्मक संसार रचा कि दर्शक कहानी के किरदार से जुड़ते चले गए।
चतुर्थ पद्मश्री कलाऋषि बाबा योगेंद्र बहुभाषीय नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन गौथिक हॉल में डेढ़ इंच ऊपर नाटक का मंचन किया गया। निर्मल वर्मा की चर्चित कहानी पर आधारित इस नाटक को आर्ट्स न्यू वे ऑर्गेनाइजेशन, दिल्ली की ओर से प्रस्तुत किया गया। कुलदीप वशिष्ठ के निर्देशन में कलाकारों ने मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की जटिलताओं को प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा। नाटक की कहानी एक ऐसे वृद्ध व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पत्नी की गिरफ्तारी और उससे बिछड़ने के बाद अकेलेपन का जीवन जी रहा है। बीयर बार में एक अनजान व्यक्ति से बातचीत के दौरान वह अपने बीते दिनों पत्नी की यादों और मन में दबे दर्द को साझा करता है। संवादों के सहारे आगे बढ़ती कहानी धीरे-धीरे उसके भीतर छिपी पीड़ा और भावनात्मक संघर्ष को उजागर करती है। नाटक में अकेलापन, टूटते रिश्ते और स्मृतियों का बोझ प्रमुखता से उभरकर सामने आया।
नाटक में मुख्य किरदार निभाने वाले केशव आर्या ने अपने सशक्त और संवेदनशील अभिनय से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। मुकेश झा के संगीत ने नाटक के भावनात्मक पक्ष को मजबूती दी जबकि अशोक की प्रकाश व्यवस्था ने दृश्यों के प्रभाव को और गहरा किया। प्रस्तुति नियंत्रक के रूप में रिजवान रजा ने अहम भूमिका निभाई। महोत्सव के तीसरे दिन 20 अक्तूबर को लोक नायिका (नाचनी) नाटक का मंचन किया जाएगा। भानु भारती द्वारा लिखे गए इस नाटक का निर्देशन मधुर भाटिया करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
केशव आर्या के अभिनय ने दर्शकों को किया भावुक
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गेयटी थियेटर में सोमवार को मंच पर अकेलेपन, बिछड़ने के दर्द और अतीत की यादों ने ऐसा भावनात्मक संसार रचा कि दर्शक कहानी के किरदार से जुड़ते चले गए।
चतुर्थ पद्मश्री कलाऋषि बाबा योगेंद्र बहुभाषीय नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन गौथिक हॉल में डेढ़ इंच ऊपर नाटक का मंचन किया गया। निर्मल वर्मा की चर्चित कहानी पर आधारित इस नाटक को आर्ट्स न्यू वे ऑर्गेनाइजेशन, दिल्ली की ओर से प्रस्तुत किया गया। कुलदीप वशिष्ठ के निर्देशन में कलाकारों ने मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की जटिलताओं को प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा। नाटक की कहानी एक ऐसे वृद्ध व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पत्नी की गिरफ्तारी और उससे बिछड़ने के बाद अकेलेपन का जीवन जी रहा है। बीयर बार में एक अनजान व्यक्ति से बातचीत के दौरान वह अपने बीते दिनों पत्नी की यादों और मन में दबे दर्द को साझा करता है। संवादों के सहारे आगे बढ़ती कहानी धीरे-धीरे उसके भीतर छिपी पीड़ा और भावनात्मक संघर्ष को उजागर करती है। नाटक में अकेलापन, टूटते रिश्ते और स्मृतियों का बोझ प्रमुखता से उभरकर सामने आया।
विज्ञापन
नाटक में मुख्य किरदार निभाने वाले केशव आर्या ने अपने सशक्त और संवेदनशील अभिनय से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। मुकेश झा के संगीत ने नाटक के भावनात्मक पक्ष को मजबूती दी जबकि अशोक की प्रकाश व्यवस्था ने दृश्यों के प्रभाव को और गहरा किया। प्रस्तुति नियंत्रक के रूप में रिजवान रजा ने अहम भूमिका निभाई। महोत्सव के तीसरे दिन 20 अक्तूबर को लोक नायिका (नाचनी) नाटक का मंचन किया जाएगा। भानु भारती द्वारा लिखे गए इस नाटक का निर्देशन मधुर भाटिया करेंगे।
विज्ञापन