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Shimla News: अधिकारी न तो योजनाओं का लाभ बता पाए, कई बैठक से गायब

Wed, 29 Jul 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jul 2026 11:59 PM IST
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The officials were unable to explain the benefits of the schemes and were absent from several meetings.
अनुसूचित जाति आयोग की बैठक में अधूरी तैयारियों के साथ आए अधिकारी, सख्त की कार्रवाई के निर्देश
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एक अधिकारी को मौके पर बैठक में बुलाया गया
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने बुधवार को शिमला के बचत भवन में समीक्षा बैठक कर अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया।

बैठक में कई विभागाध्यक्षों की अनुपस्थिति पर आयोग ने नाराजगी भी जताई। आयोग ने इसको लेकर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लोक निर्माण विभाग की ओर से अधिशासी अभियंता के स्थान पर एसडीओ और सहायक अभियंता के पहुंचने पर आयोग ने तत्काल एक्सईएन को बैठक में बुलाया। बैठक में लोक निर्माण विभाग के अधिकारी यह नहीं बता सके कि अनुसूचित जाति (अजा) विकास कार्यक्रम के तहत बनाई योजनाओं से वास्तव में अजा समुदाय को कितना लाभ मिला है।
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आयोग ने उपायुक्त को अनुपस्थित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेकर रिपोर्ट भेजने के भी निर्देश दिए। वहीं बैठक में कई विभागों के अधिकारियों अधूरी तैयारी और रिकॉर्ड के साथ पहुंचे। इसको लेकर भी आयोग ने नाराजगी जताई। आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने कहा कि अगर अधिकारी फील्ड स्तर पर प्रभावी ढंग से काम करें तो रिकॉर्ड भी बेहतर रहता है। आयोग ने विभाग को सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि अनुसूचित जाति कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी की जा रही है।
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मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत इस वर्ष जिला शिमला के 61 चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट को भारत भ्रमण पर भेजा है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 के दौरान अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के तहत जिला शिमला को 25.43 करोड़ का बजट मिला है। बैठक से पहले आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों, उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारियों ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।


एट्रोसिटी मामलों की जांच पर भी उठाए सवाल
आयोग के सदस्य दिग्विजय मल्होत्रा ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। केवल कैंसिलेशन रिपोर्ट तैयार कर मामलों का निस्तारण उचित नहीं है। एट्रोसिटी के आरोप सिद्ध नहीं होते हैं तो अन्य संबंधित धाराओं के तहत जांच आगे बढ़ाई जानी चाहिए। आयोग सदस्य डॉ. विजय डोगरा ने एसडीएम स्तर पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति विजिलेंस कमेटी की नियमित बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए।
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