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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   The next hearing on the legal status of CPS appointments will be held on June 13.

Himachal: सीपीएस की नियुक्तियों के कानूनी दर्जे पर अगली सुनवाई 13 जून को

Mon, 10 Jun 2024 06:23 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 10 Jun 2024 06:23 PM IST
सार

हाईकोर्ट में मुख्य संसदीय सचिव की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली पीपल फॉर रिस्पॉन्सिबल गवर्नेंस संस्था की याचिका पर अब 13 जून को सुनवाई होगी। 

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The next hearing on the legal status of CPS appointments will be held on June 13.
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में मुख्य संसदीय सचिव की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली पीपल फॉर रिस्पॉन्सिबल गवर्नेंस संस्था की याचिका पर अब 13 जून को सुनवाई होगी। अदालत ने पहले ही दो याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश विपिन्न चंद्र नेगी की खंडपीठ कर रही है। अदालत में पीपल फॉर रिस्पॉन्सिबल गवर्नेंस संस्था की ओर से वर्ष 2016 में याचिका दायर की गई थी।

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अदालत ने अपने पिछली सुनवाई में संस्था के अधिवक्ता से पूछा था कि इस याचिका को दायर करने का क्या औचित्य है? अदालत में सोमवार को संस्था की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनी कटाला ने अदालत को बताया कि इस याचिका को दायर करने का उद्देश्य प्रदेश की जनता के पैसों को र्बबाद करने से रोकना है। प्रदेश सरकार 90 हजार करोड़ के ऋण में चल रही है। सरकार अगर ऐसे में सीपीएस को नियुक्त करती है तो प्रदेश पर और वित्तीय घाटे का बोझ पढ़ेगा। उन्होंने अदालत को बताया कि अगर सरकार कोई भी कानून बनाती है जो गैर सांवैधानिक और गैर कानूनी है तो इसके खिलाफ हर व्यक्ति अदालत में आ सकता है।
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अदालत में दूसरी याचिका कल्पना और तीसरी भाजपा नेता पूर्व सीपीएस सतपाल सत्ती सहित अन्य 11 भाजपा के विधायकों की ओर से दायर की गई है। इस पर अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। गौरतलब है कि इन तीनों याचिकाओं में मूल प्रश्न हिमाचल प्रदेश में 2006 में बनाया गया कानून है। इसके तहत पहले भाजपा सरकार ने अपने विधायकों को सीपीएस बनाया था। अब कांग्रेस सरकार ने छह विधायकों को सीपीएस बनाया है। सरकार ने इस मामले में बहस के लिए सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ अधिवक्ता नियुक्त किए हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 में किए गए संशोधन के तहत, राज्य में विधायकों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक मंत्री नहीं हो सकते। हिमाचल विधानसभा में 68 विधायक हैं। इसके तहत यहां पर 12 ही मंत्री बन सकते हैं।

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