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Shimla News: मालरोड लिफ्ट की आय से 30 फीसदी हिस्सा लेगा नगर निगम
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खास खबर
एचपीटीडीसी से मांगा आय का पूरा रिकॉर्ड, आर्थिक तंगी से जूझ रहे निगम ने लाखों रुपये का हिस्सा लेने की तैयारी की
लिफ्ट निर्माण के लिए निगम ने शर्त पर दी थी जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निगम शिमला ने अब मालरोड लिफ्ट की कमाई में अपने 30 फीसदी हिस्से का दावा मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए नगर निगम ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) से लिफ्ट की आय और इससे जुड़े फैसलों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।
निगम आयुक्त सचिन कंवल ने एचपीटीडीसी प्रबंधन को लिफ्ट की कमाई और निदेशक मंडल में लिए फैसलों का लिखित रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम लंबे समय से लिफ्ट की कमाई में 30 फीसदी हिस्से का दावा करता रहा है, लेकिन अब तक उसे इससे एक भी पैसा नहीं मिला है। निगम के अनुसार कार्टरोड को मालरोड से जोड़ने के लिए निर्मित इस लिफ्ट के निर्माण में नगर निगम की जमीन का इस्तेमाल किया गया है। निगम ने जमीन पर निर्माण की मंजूरी इस शर्त पर दी थी कि लिफ्ट से होने वाली आय का 30 फीसदी हिस्सा नगर निगम को दिया जाएगा। वर्ष 2018 से संचालित लिफ्ट से नगर निगम को अब तक कोई भुगतान नहीं हुआ है। निगम के अनुमान के मुताबिक 30 फीसदी हिस्से के आधार पर हर साल करीब 30 से 50 लाख रुपये की आय नगर निगम को हो सकती है। निगम आयुक्त सचिन कंवल ने कहा कि एचपीटीडीसी से रिकॉर्ड मांगा गया है। साथ ही निदेशक मंडल में इस मामले को लेकर लिए गए फैसले की प्रति भी मांगी गई है।
एचपीटीडीसी पैसों की जगह दे रहा तर्क
नगर निगम प्रशासन के अनुसार एचपीटीडीसी का तर्क है कि निगम को शेयर नहीं देने के संबंध में उसके निदेशक मंडल में फैसला लिया जा चुका है। इस आधार पर निगम ने बैठक में लिए गए फैसले की प्रति मांगी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शेयर न देने का निर्णय किन आधारों पर लिया गया। नगर निगम का कहना है कि जब लिफ्ट निर्माण के समय 30 फीसदी शेयर की शर्त पर एनओसी दी थी तो बाद में एचपीटीडीसी के निदेशक मंडल में इसे समाप्त करने का फैसला कैसे लिया गया। निगम प्रशासन एनओसी जारी करते समय हुए समझौते से जुड़े रिकॉर्ड को भी खंगाल रहा है। रिकॉर्ड मिलने के बाद मामले की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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सदन में भी चर्चा के आसार
नगर निगम सदन की बैठक में विभिन्न संपत्तियों से मिलने वाले शेयर का मुद्दा भी उठ सकता है। कई पार्षदों ने सवाल लगाए हैं कि आर्थिक संकट के बीच निगम अपने हिस्से की आय क्यों नहीं ले रहा है। पार्षदों ने ऐसी संपत्तियों का रिकॉर्ड भी मांगा है, जिनसे नगर निगम को शेयर मिलना है।
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एचपीटीडीसी से मांगा आय का पूरा रिकॉर्ड, आर्थिक तंगी से जूझ रहे निगम ने लाखों रुपये का हिस्सा लेने की तैयारी की
लिफ्ट निर्माण के लिए निगम ने शर्त पर दी थी जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। आर्थिक तंगी से जूझ रहे नगर निगम शिमला ने अब मालरोड लिफ्ट की कमाई में अपने 30 फीसदी हिस्से का दावा मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए नगर निगम ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) से लिफ्ट की आय और इससे जुड़े फैसलों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।
निगम आयुक्त सचिन कंवल ने एचपीटीडीसी प्रबंधन को लिफ्ट की कमाई और निदेशक मंडल में लिए फैसलों का लिखित रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम लंबे समय से लिफ्ट की कमाई में 30 फीसदी हिस्से का दावा करता रहा है, लेकिन अब तक उसे इससे एक भी पैसा नहीं मिला है। निगम के अनुसार कार्टरोड को मालरोड से जोड़ने के लिए निर्मित इस लिफ्ट के निर्माण में नगर निगम की जमीन का इस्तेमाल किया गया है। निगम ने जमीन पर निर्माण की मंजूरी इस शर्त पर दी थी कि लिफ्ट से होने वाली आय का 30 फीसदी हिस्सा नगर निगम को दिया जाएगा। वर्ष 2018 से संचालित लिफ्ट से नगर निगम को अब तक कोई भुगतान नहीं हुआ है। निगम के अनुमान के मुताबिक 30 फीसदी हिस्से के आधार पर हर साल करीब 30 से 50 लाख रुपये की आय नगर निगम को हो सकती है। निगम आयुक्त सचिन कंवल ने कहा कि एचपीटीडीसी से रिकॉर्ड मांगा गया है। साथ ही निदेशक मंडल में इस मामले को लेकर लिए गए फैसले की प्रति भी मांगी गई है।
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एचपीटीडीसी पैसों की जगह दे रहा तर्क
नगर निगम प्रशासन के अनुसार एचपीटीडीसी का तर्क है कि निगम को शेयर नहीं देने के संबंध में उसके निदेशक मंडल में फैसला लिया जा चुका है। इस आधार पर निगम ने बैठक में लिए गए फैसले की प्रति मांगी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शेयर न देने का निर्णय किन आधारों पर लिया गया। नगर निगम का कहना है कि जब लिफ्ट निर्माण के समय 30 फीसदी शेयर की शर्त पर एनओसी दी थी तो बाद में एचपीटीडीसी के निदेशक मंडल में इसे समाप्त करने का फैसला कैसे लिया गया। निगम प्रशासन एनओसी जारी करते समय हुए समझौते से जुड़े रिकॉर्ड को भी खंगाल रहा है। रिकॉर्ड मिलने के बाद मामले की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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सदन में भी चर्चा के आसार
नगर निगम सदन की बैठक में विभिन्न संपत्तियों से मिलने वाले शेयर का मुद्दा भी उठ सकता है। कई पार्षदों ने सवाल लगाए हैं कि आर्थिक संकट के बीच निगम अपने हिस्से की आय क्यों नहीं ले रहा है। पार्षदों ने ऐसी संपत्तियों का रिकॉर्ड भी मांगा है, जिनसे नगर निगम को शेयर मिलना है।