बिलासपुर: 10 फरवरी को पैतृक गांव पहुंचेगी शहीद अंकेश भारद्वाज की पार्थिव देह
छह जनवरी को अंकेश की बर्फीले तूफान में लापता होने की खबर मिलने के बाद से ही क्षेत्र के लोग उनके घर पर माता-पिता को सहारा देने पहुंच रहे थे। मंगलवार रात को शहादत की खबर मिलने के बाद से सैकड़ों लोग अंकेश के घर पहुंचे और उनके माता पिता को ढांढस बंधाया।
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अरुणाचल प्रदेश हिमस्खलन में शहीद हुए हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के सेऊ गांव के 22 वर्षीय 19 जैक राइफलमैन अंकेश भारद्वाज की पार्थिव देह गुरुवार को घुमारवीं पहुंचेगी। यहां सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। बुधवार 11 बजे तक माता-पिता और परिजन अंकेश की सलामती की दुआएं करते रहे। इसके बाद पिता पांचा राम को सेना की तरफ से फोन पर इसकी पुष्टि की गई तो उनकी सारी उम्मीदें टूट गईं। पूरा माहौल गमगीन हो गया। बेटे की शहादत की खबर सुनकर पिता पांचा राम भीतर से एकदम टूट गए और माता कश्मीरी देवी पत्थर बन गई। छह जनवरी को अंकेश की बर्फीले तूफान में लापता होने की खबर मिलने के बाद से ही क्षेत्र के लोग उनके घर पर माता-पिता को सहारा देने पहुंच रहे थे।
मंगलवार रात को शहादत की खबर मिलने के बाद से सैकड़ों लोग अंकेश के घर पहुंचे और उनके माता पिता को ढांढस बंधाया। बुधवार सुबह तक अंकेश के पिता इस सच को मानने के लिए तैयार नहीं थे कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। वे कह रहे थे कि उनका बेटा कोमा में है। वहीं, अंकेश की शहादत की खबर मिलते ही समूचे क्षेत्र के लोग शहीद के घर पहुंचे। शहीद सैनिक की 92 वर्षीय दादी को सुनाई नहीं देता है। दोपहर तक उन्हें अंकेश की शहादत की जानकारी नहीं दी गई थी, लेकिन उसके बाद जब उन्हें बताया गया तो उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे। अपने बड़े भाई को अपना आदर्श मानने वाला छोटा भाई आकाश अब भी विश्वास नहीं कर पा रहा कि उसका भाई भारत माता की सेवा के लिए जान न्योछावर कर गया।
अंकेश की तस्वीर को सीने से लगाकर रोती रही मां
बेटे की शहादत की खबर मिलने के बाद से ही अंकेश की मां कश्मीरी देवी बेटे की तस्वीर को हाथ में लेकर कभी उसे चूमती तो कभी सीने से लगाती। वह लगातार बेटे की तस्वीर पर नजरें बनाकर बैठी रहीं। आंसुओं के सैलाब में बेटे से बिछुड़ने का दुख बयान नहीं किया जा रहा। गांव की महिलाएं शहीद की मां को ढांढस बंधाती रहीं, लेकिन मां की जुबां पर अपने लाल के किस्सों, कहानियों के सिवा कुछ और नहीं था। एसडीएम घुमारवीं राजीव ठाकुर ने बताया कि शहीद अंकेश भारद्वाज की पार्थिव देह गुरुवार को घुमारवीं पहुंचेगी।
जिन जवानों को रेस्क्यू करना था वह लौटे सलामत
अरुणाचल में चीन बॉर्डर पर सरहद की निगरानी के लिए तैनात बिलासपुर जिले के सेऊ गांव के 22 वर्षीय सैनिक अंकेश भारद्वाज सहित सात जवान अन्य सैनिकों को रेस्क्यू करने के लिए पहाड़ियों में गए थे। जिन जवानों को रेस्क्यू करना था वह सकुशल लौट आए और रेस्क्यू करने गई सात जवानों की टीम बर्फ के बवंडर में फंस गई और देश के लिए शहीद हो गई। शहीद सैनिक अंकेश के पिता ने बताया कि 5 फरवरी को अरुणाचल के कामेंग सेक्टर में एक टीम पहाड़ियों के बीच फोन कनेक्टिविटी को दुरुस्त करने गई थी। उस टीम को निर्धारित समय पर कैंप लौटना था, लेकिन टीम नहीं लौटी और उन जवानों के साथ कनेक्टिविटी भी टूट चुकी थी। समय बीत जाने के बाद जवानों की खोज और रेस्क्यू के लिए सात सैनिक भेजे गए, जिसमें उनका बेटा भी शामिल था।
जिस टीम को रेस्क्यू करना था वह टीम मौसम खराब होने के कारण दूसरे रास्ते से कैंप तक पहुंच गई, लेकिन रेस्क्यू करने गए टीम आगे बढ़ती रही। एकाएक मौसम खराब हो गया और बर्फीले तूफान में सात जवान लापता हो गए। सात जवान जब नहीं लौटे तो सेना के अन्य सैनिकों ने टीम को खोजने का काम शुरू किया। तब पता चला कि रेस्क्यू करने गई टीम बर्फीले तूफान में दब गई है। तीन दिन खोजने के बाद सात जवानों के शहीद होने का पता चला। बताया जा रहा है कि जिस जगह यह हादसा हुआ वहां पर ऊंची-ऊंची पहाड़ियां हैं, दुर्गम रास्ते हैं। मौसम खराब होने के कारण हेलिकॉप्टर भी रेस्क्यू ऑपरेशन में भाग नहीं ले पाया। भूटान व सिक्किम से रेस्क्यू टीमें पहुंचीं, लेकिन बर्फीले तूफान में दबे सैनिकों को सलामत नहीं लाया जा सका।