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Shimla News: सोलन में रंगमंच का जलवा, नाटकों ने युद्ध और व्यवस्था पर किया प्रहार

Mon, 29 Jun 2026 01:12 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jun 2026 01:12 AM IST
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The magic of theatre in Solan: Plays take aim at war and the establishment.The magic of theatre in Solan: Plays take aim at war and the establishment.
भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से कला केंद्र कोठो में आयोजित सोलन थिएटर फेस्टिवल के दौरान प्रस्त
कला केंद्र कोठों में सोलन थियेटर फेस्टिवल का हुआ शानदार समापन, कलाकारों ने अपने अभिनय से छोड़ी छाप
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश शिमला और जिला प्रशासन सोलन के सहयोग से सोलन थियेटर फेस्टिवल का समापन हुआ। अनुकृति रंगमंडल कानपुर के कलाकारों ने कला केंद्र कोठों में दो नाटकों का मंचन किया। ये नाटक गांधारी और जामुन का पेड़ थे। दोनों नाटकों ने दर्शकों को महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश दिए। लेखक जयवर्धन के नाटक गांधारी का निर्देशन डॉ. ओमेंद्र कुमार ने किया। इसमें दिखाया गया कि युद्ध से किसी को कुछ भी हासिल नहीं होता। हस्तिनापुर में धृतराष्ट्र के नेत्रहीन होने के कारण पांडु को राज्य की जिम्मेदारी मिली। भीष्म ने गांधार पर आक्रमण कर नरेश सुबल को बंदी बनाया। उन्होंने राजकुमारी चारुवदनी का विवाह धृतराष्ट्र से करने का प्रस्ताव रखा। राज्य हित में सुबल ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। गांधारी ने पति के नेत्रहीन होने पर अपनी आंखों पर पट्टी बांधने का संकल्प लिया। दुर्योधन के कारण हुए महाभारत युद्ध में गांधारी के 99 पुत्र मारे गए। अंत में गांधारी ने कृष्ण को शाप दिया और युद्ध के निरर्थक होने का निष्कर्ष निकाला। यह नाटक महाभारत के प्रमुख पात्रों के माध्यम से युद्ध की विभीषिका दर्शाता है। गांधारी के सौ पुत्रों का जन्म और फिर द्यूत क्रीड़ा में युधिष्ठिर का सब कुछ हारना दिखाया गया। द्रौपदी के चीरहरण और अपमान के बाद भीष्म, द्रोण, युधिष्ठिर, अर्जुन और भीम के मौन रहने पर कृष्ण को पुकारा गया। कृष्ण ने दुर्योधन को चेतावनी दी, पर युद्ध नहीं टला। गांधारी ने भी दुर्योधन को समझाने का प्रयास किया। युद्ध के बाद अपने 99 पुत्रों को खोने के बाद गांधारी ने अपनी आंखों की पट्टी खोली। वहीं कृष्ण चंदर की लोकप्रिय व्यंग्यात्मक कहानी जामुन का पेड़ का मंचन भी हुआ। यह नाटक लाल फीताशाही और नौकरशाही की उदासीनता पर करारा कटाक्ष करता है। एक जामुन के पेड़ के नीचे दबे व्यक्ति की जान बचाने की कोशिशें फाइलों और अनुमतियों के चक्कर में नाकाम रहीं। अंततः उस व्यक्ति की मौत हो जाती है। माली आम आदमी का प्रतीक है जो मदद करना चाहता है। बाकी सभी नियम-कानून और जिम्मेदारी टालने में लगे रहते हैं। कृष्णा सक्सेना, सम्राट और आकाश ने इस कहानी का नाट्य रूपांतरण किया।


इन कलाकारों का रहा प्रभावशाली अभिनय
नाटकों में दीपिका सिंह, आरती प्रकाश, महेंद्र धुरिया, विजयभान सिंह सहित कई कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय किया। महेश जायसवाल ने माली और रोशन सविता ने पेड़ के नीचे दबे आदमी का किरदार निभाया। प्रकाश परिकल्पना कृष्णा सक्सेना और संगीत विजय भास्कर का था।
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यह रहे मौजूद
कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलन कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हिमाचल प्रदेश, उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा, जिला भाषा अधिकारी सोलन ममता वर्मा और एसडीएम सोलन पूनम बंसल ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी विजय पुरी, संजीव अरोड़ा और हेमंत अत्रि सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी मौजूद रहे।

भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से कला केंद्र कोठो में आयोजित सोलन थिएटर फेस्टिवल के दौरान प्रस्त

भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से कला केंद्र कोठो में आयोजित सोलन थिएटर फेस्टिवल के दौरान प्रस्त

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