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Shimla News: रंगमंच पर जीवंत हुई देवयानी और कच की प्रेमकथा
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गेयटी थियेटर में श्याम दरिहरे रंग महोत्सव का आगाज, पहले दिन स्वयंदीपा नाटक का मंचन
अरविंद सिंह चंद्रवंशी ने किया नाटक का निर्देशन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में शनिवार को तृतीय श्याम दरिहरे रंग महोत्सव का आगाज हुआ। बारहमासा दिल्ली की ओर से आयोजित इस तीन दिवसीय महोत्सव के पहले दिन गौथिक हॉल में स्वयंदीपा नाटक का मंचन हुआ।
केंद्र के संस्कृति मंत्रालय और गेयटी थियेटर शिमला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रस्तुति में पौराणिक प्रेमकथा के माध्यम से प्रेम, त्याग, कर्तव्य तथा विश्वासघात के जटिल पक्षों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक का मंचन सुमुखा दिल्ली ने किया। माधुरी सुबोध द्वारा लिखित और अरविंद सिंह चंद्रवंशी द्वारा निर्देशित स्वयंदीपा देवयानी और कच की प्रेमकथा पर केंद्रित है।
नाटक में दिखाया गया कि देवयानी असुरों के गुरु शुक्राचार्य की पुत्री और कच देवताओं के गुरु बृहस्पति के पुत्र थे। देवासुर संग्राम के दौरान शुक्राचार्य की मृतसंजीवनी विद्या असुरों के लिए वरदान बनी हुई थी। इसी विद्या को सीखने के उद्देश्य से कच शुक्राचार्य के शिष्य बनकर उनके आश्रम पहुंचे। कच की स्थिति जानने के बाद शुक्राचार्य ने उसे मृतसंजीवनी विद्या की शिक्षा दी। कच इस विद्या को सीखकर शुक्राचार्य के शरीर से बाहर आता है और बाद में उन्हें भी पुनर्जीवित कर देता है। इसके बाद कच देवलोक लौट जाता है और देवयानी अकेली रह जाती है। नाटक की कथा आगे देवयानी और राजा ययाति के संबंधों तक पहुंचती है।
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देवयानी का विवाह ययाति से होता है, लेकिन जब उसे पता चलता है कि ययाति ने शर्मिष्ठा से गंधर्व विवाह किया है, तो वह आहत होकर ययाति को छोड़ देती है और अपने पिता शुक्राचार्य के पास लौट आती है। नाटक से रिश्तों में टूटते भरोसे और व्यक्तिगत भावनाओं के बीच के द्वंद्व को दिखाया है। बारहमासा के निदेशक मुकेश झा ने कहा कि स्वयंदीपा केवल एक पौराणिक प्रेमकथा नहीं है, बल्कि प्रेम और कर्तव्य रंगमंचीय संवेदना के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास है।
नाटक में इन कलाकारों ने किया अभिनय
नाटक में सूत्रधार की भूमिका अक्सा सैफी ने निभाई। वहीं देवयानी की भूमिका शिवानी, कच की हिमांशु हिमानिया, शुक्राचार्य की मुकेश झा, ययाति की विशाल खत्री, वृषपर्वा की रघुवीर सिंह, शर्मिष्ठा की पूजा चंद्रा, गंधर्व की राजेश वर्मा, आदिक की अभिषेक धिरासरिया, शंभर की अक्षत गोयल, तक्षक की चंद्रभान कुमार, धूम्रकेतु की विशाल खत्री और कन्नू की भूमिका मनीष यादव ने निभाई।
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अरविंद सिंह चंद्रवंशी ने किया नाटक का निर्देशन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में शनिवार को तृतीय श्याम दरिहरे रंग महोत्सव का आगाज हुआ। बारहमासा दिल्ली की ओर से आयोजित इस तीन दिवसीय महोत्सव के पहले दिन गौथिक हॉल में स्वयंदीपा नाटक का मंचन हुआ।
केंद्र के संस्कृति मंत्रालय और गेयटी थियेटर शिमला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रस्तुति में पौराणिक प्रेमकथा के माध्यम से प्रेम, त्याग, कर्तव्य तथा विश्वासघात के जटिल पक्षों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक का मंचन सुमुखा दिल्ली ने किया। माधुरी सुबोध द्वारा लिखित और अरविंद सिंह चंद्रवंशी द्वारा निर्देशित स्वयंदीपा देवयानी और कच की प्रेमकथा पर केंद्रित है।
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नाटक में दिखाया गया कि देवयानी असुरों के गुरु शुक्राचार्य की पुत्री और कच देवताओं के गुरु बृहस्पति के पुत्र थे। देवासुर संग्राम के दौरान शुक्राचार्य की मृतसंजीवनी विद्या असुरों के लिए वरदान बनी हुई थी। इसी विद्या को सीखने के उद्देश्य से कच शुक्राचार्य के शिष्य बनकर उनके आश्रम पहुंचे। कच की स्थिति जानने के बाद शुक्राचार्य ने उसे मृतसंजीवनी विद्या की शिक्षा दी। कच इस विद्या को सीखकर शुक्राचार्य के शरीर से बाहर आता है और बाद में उन्हें भी पुनर्जीवित कर देता है। इसके बाद कच देवलोक लौट जाता है और देवयानी अकेली रह जाती है। नाटक की कथा आगे देवयानी और राजा ययाति के संबंधों तक पहुंचती है।
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देवयानी का विवाह ययाति से होता है, लेकिन जब उसे पता चलता है कि ययाति ने शर्मिष्ठा से गंधर्व विवाह किया है, तो वह आहत होकर ययाति को छोड़ देती है और अपने पिता शुक्राचार्य के पास लौट आती है। नाटक से रिश्तों में टूटते भरोसे और व्यक्तिगत भावनाओं के बीच के द्वंद्व को दिखाया है। बारहमासा के निदेशक मुकेश झा ने कहा कि स्वयंदीपा केवल एक पौराणिक प्रेमकथा नहीं है, बल्कि प्रेम और कर्तव्य रंगमंचीय संवेदना के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास है।
नाटक में इन कलाकारों ने किया अभिनय
नाटक में सूत्रधार की भूमिका अक्सा सैफी ने निभाई। वहीं देवयानी की भूमिका शिवानी, कच की हिमांशु हिमानिया, शुक्राचार्य की मुकेश झा, ययाति की विशाल खत्री, वृषपर्वा की रघुवीर सिंह, शर्मिष्ठा की पूजा चंद्रा, गंधर्व की राजेश वर्मा, आदिक की अभिषेक धिरासरिया, शंभर की अक्षत गोयल, तक्षक की चंद्रभान कुमार, धूम्रकेतु की विशाल खत्री और कन्नू की भूमिका मनीष यादव ने निभाई।