कैदी मामले में शर्मिंदा हुई हिमाचल सरकार?
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पुलिस द्वारा विचाराधीन कैदी मरीज को अस्पताल में हथकड़ी लगा कर रखने के मामले में हिमाचल सरकार के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और पुलिस अधीक्षक सिरमौर ने हाईकोर्ट के समक्ष माफी मांगी है।
मुख्य सचिव ने शपथपत्र के माध्यम से अदालत को बताया कि इस मामले से संबंधित पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
मुख्य सचिव ने अदालत को आश्वस्त किया कि इस तरह के घिनौने कृत्य भविष्य में नहीं दोहराए जाएंगे। मुख्य सचिव के अनुसार इस तरह के कार्य को अंजाम देने वालों को बिल्कुल भी नहीं बख्शा जाएगा।
हाईकोर्ट ने मेडिकल सुपरिटेंडेंट को भी भेजा नोटिस
अदालत को बताया गया कि इस मामले में आईजीएमसी के सीनियर मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को भी कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है और अस्पताल के संबंधित स्टाफ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने नकारात्मक टिप्पणी करते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस अधीक्षक सिरमौर को आदेश दिए हैं कि वे शपथ पत्र के माध्यम से आगामी 21 मई तक विभागीय जांच में हुई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट अदालत में पेश होकर दायर करें।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल से मिली जानकारी पर अदालत ने इस मामले पर संज्ञान लिया था। रजिस्ट्रार द्वारा फोटोग्राफ सहित जानकारी दी गई कि एक विचाराधीन कैदी को आईजीएमसी में हथकड़ी के साथ इलाज के लिए बांधा गया है जोकि चर्म रोग से ग्रसित है।