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Himachal: करोड़ों के घाटे में चल रहे बोर्ड-निगम सरकार की ग्रांट पर निर्भर, कई के पास वेतन के लिए पैसा नहीं

Tue, 10 Feb 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 10 Feb 2026 05:00 AM IST
सार

परिवहन निगम, राज्य विद्युत बोर्ड, पर्यटन विकास निगम सहित अन्य करोड़ों के घाटे में हैं। कई निगम व बोर्ड ऐसे हैं, जिनके पास अपने कर्मचारियों को तनख्वाह देने के भी लाले पड़े हैं। 

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The govt has warned corporations and boards: there is no money for grants, they will have to increase their ow
हिमाचल सरकार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में घाटे में चल रहे निगम और बोर्ड सरकार की ग्रांट पर निर्भर हैं। परिवहन निगम, राज्य विद्युत बोर्ड, पर्यटन विकास निगम सहित अन्य करोड़ों के घाटे में हैं। कई निगम व बोर्ड ऐसे हैं, जिनके पास अपने कर्मचारियों को तनख्वाह देने के भी लाले पड़े हैं। यह निगम-बोर्ड हर साल सरकार से ग्रांट जारी करने की मांग करते रहे हैं। हिमाचल के बजट में भी हर साल निगम-बोर्डों के लिए ग्रांट निर्धारित की जाती रही है, लेकिन इस बार के बजट में ग्रांट मिलने की संभावना दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है। हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में निगमों-बोर्डों की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही है। 

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खुद अपने आय के साधन जुटाने होंगे
अब इन्हें खुद अपने आय के साधन जुटाने होंगे। सरकार के पास इनके लिए ग्रांट देने के लिए पैसा नहीं है। दूसरी ओर, सरकार ने इन्हें मर्ज करने का भी सुझाव दिया है। हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड का घाटा है। यह घाटा 3246.97 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अतिरिक्त राज्य पथ परिवहन निगम का घाटा दो हजार करोड़ तक पहुंचने वाला है। बिजली बोर्ड ने हिमाचल के लोगों के लिए 125 यूनिट तक बिजली फ्री की है। वहीं परिवहन निगम की ओर से भी हिमाचल में 28 कैटेगरी के यात्रियों को निशुल्क परिवहन सेवाएं दी जा रही हैं। हिमाचल में इस समय निगम-बोर्ड 7 हजार करोड़ रुपये के घाटे में चल रहे हैं।

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किस निगम-बोर्ड को कितना घाटा
हिमाचल प्रदेश में 39 निगम-बोर्ड हैं। इसके अलावा 8 शिक्षण संस्थान हैं। स्कूल शिक्षा बोर्ड और यूनिवर्सिटी इसमें शामिल हैं।  प्रदेश बिजली बोर्ड लिमिटेड को 3246.97 करोड़, राज्य पथ परिवहन निगम को 1966.13 करोड़, वित्त निगम को 180.97 करोड़, वन निगम को 110.42 करोड़, एचपीएमसी को 91.20 करोड़, एग्रो इंडस्ट्रीज निगम को 10.86 करोड़, पॉवर ट्रांसमिशन निगम को 105.13 करोड़, पर्यटन विकास निगम को 36.28 करोड़, हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम को 12.42 करोड़ समेत अन्य निगम-बोर्ड भी घाटे में चल रहे हैं। प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार की ओर से दी गई वित्तीय प्रस्तुति में उन्होंने कहा कि निगम-बोर्डों को मर्ज करने की जरूरत है। ग्रांट बंद करने का भी सुझाव दिया।

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