Mandi News: चार माह बाद खुले शिकारी देवी मंदिर के कपाट, बर्फ के बीच दर्शन करने पहुंच रहे श्रद्धालु
प्रदेश के मंडी जिले की सबसे ऊंची चोटी माता शिकारी देवी के कपाट चार माह बाद सोमवार को पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं।
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हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की सबसे ऊंची चोटी माता शिकारी देवी के कपाट चार माह बाद सोमवार को पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं। सोमवार को बर्फ के बीच कई श्रद्धालु माता के दर्शन करने के लिए पहुंचे। मंगलवार से शुरू होने जा रहे चैत्र नवरात्रों से शिकारी देवी में भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। मंदिर में पुजारी तैनात हो गए हैं। साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से होमगार्ड के जवानों ने भी मोर्चा संभाल लिया है। गर्मी से राहत पाने और मां शिकारी के दर्शन करने के लिए शिकारी देवी में अब लोगों की भीड़ दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगेगी।
शिकारी देवी में अभी बर्फ है, लेकिन लोक निर्माण विभाग ने सड़क से बर्फ हटा दी है। मंडी जिले में बर्फ पड़ने से शिकारी देवी के कपाट करीब चार माह बंद रहते हैं। गर्मी की दस्तक के साथ ही लंबे अंतराल के बाद अब कपाट खुल गए हैं। इससे शिकारी देवी में अब फिर रौनक लौटने लग गई है। शिकारी देवी मंडी की सबसे ऊंची चोटी होने के कारण यहां मौसम खराब होते ही बर्फ पड़ना शुरू हो जाती है। मंदिर वाली पहाड़ी में अधिक समय तक बर्फ रहती है। इससे यहां पहुंचना सर्दी में जोखिम भरा रहता है। उधर, एसडीएम थुनाग ललित पोसवाल ने बताया कि शिकारी देवी के कपाट खोल दिए गए हैं।
ट्रैकिंग के लिए है प्रसिद्ध
कमरूनाग से पर्यटक शिकारी देवी के लिए ट्रैकिंग करते हैं। चैलचौक के जालपा मंदिर से ट्रैकिंग शुरू होती है और कमरूनाग तक यह ट्रैकिंग होती। कमरूनाग से शिकारी देवी और फिर जंजैहली पहुंचकर पर्यटक रोमांचित होते हैं।
भुलाह और बू़ढ़ा केदार पर्यटकों के लिए है आकर्षण के स्थल
भुलाह और बूढ़ा केदार पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। यहां के कल-कल बहते नाले पर्यटकों को बरबस अपनी और आकर्षित करते हैं। देवीदहड़ और सरोआ जालपा मंदिर अब पर्यटन के आकर्षण का केंद्र बनने लगे हैं।