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Sanjauli Mosque Case: दो गुटों के झगड़े से शुरू हुआ विवाद मस्जिद गिराने तक पहुंचा, 14 साल बाद आया फैसला

Sun, 04 May 2025 12:54 PM IST
शिमला ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: शिमला ब्यूरो Updated Sun, 04 May 2025 12:54 PM IST
सार

संजौली मस्जिद के चर्चा में आने और इसके गिराने का बड़ा कारण दो गुटों के बीच हुआ झगड़ा रहा। आयुक्त कोर्ट में भी करीब 14 साल तक लगातार इस मामले पर सिर्फ सुनवाई होती रही। पढ़ें पूरी खबर...

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The dispute that started with a fight between two groups led to the demolition of the mosque
शिमला के संजौली की मस्जिद। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

राजधानी के मल्याणा में दो गुटों के बीच हुआ झगड़ा संजौली मस्जिद के चर्चा में आने और इसके गिराने का बड़ा कारण बना था। संजौली मस्जिद में अवैध निर्माण का मामला साल 2010 से चल रहा था। कई नोटिस जारी होने के बावजूद मस्जिद कमेटी ने पांच मंजिला भवन तैयार कर लिया। आयुक्त कोर्ट में भी करीब 14 साल तक लगातार इस मामले पर सिर्फ सुनवाई होती रही। इसी बीच 29 अगस्त 2024 को शहर के मल्याणा में दो गुटों के बीच झगड़ा हो गया। इसमें मल्याणा के एक युवक को गंभीर चोटें लगीं।
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आरोप था कि हमलावर आरोपी मल्याणा से भागकर संजौली की इस मस्जिद में जाकर छिप गए थे। मामला पुलिस तक पहुंचा और केस दर्ज हुआ। गुस्साए मल्याणा, भट्ठाकुफर, सांगटी, संजौली के लोगों ने एक सितंबर को संजौली मस्जिद के बाहर पहुंचकर धरना दे दिया। इसमें कांग्रेस के कई पार्षद और भाजपा पदाधिकारी भी शामिल थे। धरने के बाद ही मस्जिद के अवैध होने की बात भी आम जनता के सामने आ गई। पांच सितंबर को इस मामले पर आयुक्त कोर्ट में भी सुनवाई हुई लेकिन फैसला टल गया। इसी बीच हिंदू संगठनों ने संजौली बाजार में 11 सितंबर को उग्र प्रदर्शन कर दिया। प्रदर्शन रोकने के लिए पुलिस को कई लोगों पर लाठीचार्ज करना पड़ा। कई लोगों पर केस भी दर्ज हुए। लोगों की मांग थी कि यदि मस्जिद अवैध है तो इसे तुरंत तोड़ा जाए।
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हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला, फैसले के आदेश
हिंदू संगठनों के उग्र प्रदर्शन के बाद नगर निगम पर इस मामले में फैसला लेने का दबाव बढ़ा। कई लोगों ने हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर ली। उधर पांच अक्तूबर को आयुक्त कोर्ट ने इस मस्जिद की ऊपरी तीन मंजिलों को अवैध माना और इन्हें गिराने के आदेश दिए। वहीं शहर के साथ प्रदेश भर में गरमाए इस मामले के बीच मस्जिद कमेटी ने भी आदेश मानने का फैसला लिया। अवैध निर्माण गिराने का काम शुरू कर दिया। हालांकि, दो महीने में गिराया जाने वाला अवैध निर्माण सात महीने बाद भी पूरा नहीं हुआ। कोर्ट ने तीन मई तक इसे गिराने के आदेश दिए थे। अब निचली दो मंजिलों को भी गिराने के आदेश दिए हैं। अब मस्जिद की जमीन को लेकर भी विवाद छिड़ गया है। दावा किया जा रहा है कि मस्जिद की जमीन सरकार के नाम है और इस पर वक्फ बोर्ड ने कब्जा कर रखा है।

चार केस हुए, थाने के चक्कर काटे, अब मिला न्याय : पार्षद
संजौली मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर प्रदर्शन करने पर भाजपा पार्षद कमलेश मेहता पर चार केस दर्ज किए गए। पार्षद को कई बार पुलिस थाने में आकर पूछताछ में शामिल होना पड़ा। फैसला आने के बाद पार्षद ने कहा कि यह न्याय की जीत हुई है। कोर्ट के फैसले से स्पष्ट है कि उनका प्रदर्शन सही था। मस्जिद अवैध रूप से बनी थी और अब इसे पूरी तरह से गिराने के आदेश जारी होना ऐतिहासिक फैसला है।
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प्रदर्शन किए, डंडे खाए, आज मिला इंसाफ
सरकार की जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई इस मस्जिद को गिराने के लिए शहरभर में प्रदर्शन हुआ। कई लोगों पर केस हुए और कुछ ने तो पुलिस के डंडे भी खाए। लेकिन आज उन्हें इंसाफ मिल गया है। आयुक्त कोर्ट से लेकर प्रदेश हाईकोर्ट तक इस मस्जिद को गिराने का मामला उठाने वाली संजौली की रेजीडेंट सोसायटी ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया। सोसायटी के अधिवक्ता जगत पाल ने कहा कि हम पहले दिन से कह रहे थे कि यह मस्जिद अवैध है। इसका निर्माण सरकारी जमीन पर हुआ है। अब आयुक्त कोर्ट ने भी इसे अवैध करार दे दिया है। निचली दो मंजिलें भी अब गिरानी होंगी। आयुक्त कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि यह मस्जिद जिस जमीन पर बनी है, वह जमीन सरकार की है। यह पूरा अवैध निर्माण किया गया था।
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