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Shimla News: अनाज मंडी की हालत खस्ता, 20 से घटकर रह गईं हैं पांच दुकानें
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अंग्रेजों के शासनकाल में बनी मंडी ताजा मसालों, देसी दालों के लिए है मशहूर, उपेक्षा से अब उजड़ने की कगार पर
कारोबारी बोले, दुकानों तक नहीं पहुंचते पाते हैं ग्राहक
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। अंग्रेजों के शासनकाल में बनी शिमला अनाज मंडी में आज भी ग्राहक ताजे मसालों, दालों और राशन खरीदने के लिए आते हैं लेकिन मंडी का एक हिस्सा पूरी तरह प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो रहा है।
मंडी के इस हिस्से में बेतरतीब लटके बिजली के तार और बाहर टंगे कपड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि वर्षों से दुकानों की मरम्मत तक नहीं हो पाई है। स्थिति देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि यहां कोई बाजार भी है। मुख्य अनाज मंडी की एक लाइन में 15 से 20 दुकानों में से अब केवल 4-5 दुकानें ही बची हैं। कई कारोबारियों ने दुकानें बंद कर दी हैं। कुछ किरायेदार कारोबारियों ने अपनी दुकानें मजदूरों को किराये पर दे दी हैं। नगर निगम की इन दुकानों का किराया तो किरायेदार चुका रहे हैं, लेकिन इनकी हालत देखकर ऐसा लगता है कि लंबे समय से इनकी मरम्मत नहीं हुई है।
यदि इन दुकानों की मरम्मत कर हालात नहीं सुधारे तो वह दिन दूर नहीं जब यहां से सभी दुकानदार मजबूरी में दुकानें बंद कर देंगे। स्मार्ट सिटी शिमला के तहत शहर के कई बाजारों की हालत सुधारी गई लेकिन अनाज मंडी में ऐसा कोई बदलाव नजर नहीं आया। कारोबारियों ने नगर निगम को स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत अनाज मंडी को बहुमंजिला भवन में बदलने का सुझाव भी दिया था लेकिन इस पर आगे काम नहीं हो पाया। यही कारण है कि इस बाजार की आज भी अनदेखी हो रही है।
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वन टाइम सेटलमेंट से सुधार पाएंगे दुकानें
अनाज मंडी की इस लाइन में अभी भी कारोबार कर रहे संजीव ठाकुर, सुभाष चंद, हन्न, महेश श्रीधर और राजेंद्र सूद का कहना है कि यहां की दुकानों की हालत बेहद खराब है। अब समस्या यह है कि वह अपने स्तर दुकानों की मरम्मत नहीं करवा पा रहे हैं। उन्होंने नगर निगम से वन टाइम सेटलमेंट के तहत दुकानें उनके नाम करने की मांग की है। यदि दुकानें उनके नाम हो जाती हैं तो वह अपने स्तर पर इनकी स्थिति सुधार सकते हैं। स्मार्ट सिटी के तहत दुकानों को बहुमंजिला बनाने की योजना थी लेकिन आज तक यह योजना धरातल पर नहीं उतरी।
नए सिरे से बनेगी अनाज मंडी
रामबाजार की वार्ड पार्षद सुषमा कुठियाला ने कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत सब्जी मंडी का निर्माण शुरू किया जा रहा है और बजट उपलब्ध होने पर अनाज मंडी को भी नए सिरे से बनाया जाना प्रस्तावित है। इसमें मल्टी-स्टोरी बाजार बनाने की योजना है। अनाज मंडी में किरायेदार दुकानदार अनुमति लेकर दुकानों की मरम्मत करवा सकते हैं। वन टाइम सेटलमेंट का प्रस्ताव आया है, लेकिन इस पर अभी अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। जरूरत पड़ने पर नगर निगम भी दुकानों के रखरखाव का कार्य करवाता है।
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कारोबारी बोले, दुकानों तक नहीं पहुंचते पाते हैं ग्राहक
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। अंग्रेजों के शासनकाल में बनी शिमला अनाज मंडी में आज भी ग्राहक ताजे मसालों, दालों और राशन खरीदने के लिए आते हैं लेकिन मंडी का एक हिस्सा पूरी तरह प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो रहा है।
मंडी के इस हिस्से में बेतरतीब लटके बिजली के तार और बाहर टंगे कपड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि वर्षों से दुकानों की मरम्मत तक नहीं हो पाई है। स्थिति देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि यहां कोई बाजार भी है। मुख्य अनाज मंडी की एक लाइन में 15 से 20 दुकानों में से अब केवल 4-5 दुकानें ही बची हैं। कई कारोबारियों ने दुकानें बंद कर दी हैं। कुछ किरायेदार कारोबारियों ने अपनी दुकानें मजदूरों को किराये पर दे दी हैं। नगर निगम की इन दुकानों का किराया तो किरायेदार चुका रहे हैं, लेकिन इनकी हालत देखकर ऐसा लगता है कि लंबे समय से इनकी मरम्मत नहीं हुई है।
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यदि इन दुकानों की मरम्मत कर हालात नहीं सुधारे तो वह दिन दूर नहीं जब यहां से सभी दुकानदार मजबूरी में दुकानें बंद कर देंगे। स्मार्ट सिटी शिमला के तहत शहर के कई बाजारों की हालत सुधारी गई लेकिन अनाज मंडी में ऐसा कोई बदलाव नजर नहीं आया। कारोबारियों ने नगर निगम को स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत अनाज मंडी को बहुमंजिला भवन में बदलने का सुझाव भी दिया था लेकिन इस पर आगे काम नहीं हो पाया। यही कारण है कि इस बाजार की आज भी अनदेखी हो रही है।
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वन टाइम सेटलमेंट से सुधार पाएंगे दुकानें
अनाज मंडी की इस लाइन में अभी भी कारोबार कर रहे संजीव ठाकुर, सुभाष चंद, हन्न, महेश श्रीधर और राजेंद्र सूद का कहना है कि यहां की दुकानों की हालत बेहद खराब है। अब समस्या यह है कि वह अपने स्तर दुकानों की मरम्मत नहीं करवा पा रहे हैं। उन्होंने नगर निगम से वन टाइम सेटलमेंट के तहत दुकानें उनके नाम करने की मांग की है। यदि दुकानें उनके नाम हो जाती हैं तो वह अपने स्तर पर इनकी स्थिति सुधार सकते हैं। स्मार्ट सिटी के तहत दुकानों को बहुमंजिला बनाने की योजना थी लेकिन आज तक यह योजना धरातल पर नहीं उतरी।
नए सिरे से बनेगी अनाज मंडी
रामबाजार की वार्ड पार्षद सुषमा कुठियाला ने कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत सब्जी मंडी का निर्माण शुरू किया जा रहा है और बजट उपलब्ध होने पर अनाज मंडी को भी नए सिरे से बनाया जाना प्रस्तावित है। इसमें मल्टी-स्टोरी बाजार बनाने की योजना है। अनाज मंडी में किरायेदार दुकानदार अनुमति लेकर दुकानों की मरम्मत करवा सकते हैं। वन टाइम सेटलमेंट का प्रस्ताव आया है, लेकिन इस पर अभी अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। जरूरत पड़ने पर नगर निगम भी दुकानों के रखरखाव का कार्य करवाता है।