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Shimla News: विश्वबैंक देखने आ रहा काम कंपनी टेंडर तक नहीं कर पाई
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शहरवासियों को 24 घंटे पेयजल योजना का काम देखने 20 को शिमला पहुंचेगी विश्वबैंक की टीम
निदेशक मंडल की बैठक न होने से कंपनी शुरू नहीं कर पा रही काम
850 करोड़ से शिमला शहर में बिछनी हैं नई पेयजल लाइनें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पानी की सुविधा देने के लिए सतलुज पेयजल परियोजना में अब तक कितना काम किया गया, इसका जायजा लेने विश्वबैंक की टीम 20 नवंबर को शिमला पहुंच रही है।
बैंक की टीम देखेगी कि पिछले एक साल में इस परियोजना में कितना काम हुआ है। लेकिन परेशानी यह है कि जिस कार्य को देखने के लिए यह टीम आ रही है, उसका अभी तक टेंडर अवार्ड नहीं हो पाया है, काम होना तो दूर की बात है। शहरवासियों को 24 घंटे पेयजल सुविधा देने के लिए सतलुज का पानी शिमला पहुंचाया जाना है। इसका काम दो चरणों में हो रहा है। पहले चरण में सतलुज से शिमला तक मुख्य पेयजल लाइन बिछाई जाएगी और पंपिंग स्टेशन तैयार होंगे। इसका काम बीते दो साल से चल रहा है। दूसरे चरण में शिमला शहर में नई पेयजल लाइनें बिछनी हैं और 40 से ज्यादा जलभंडारण टैंक तैयार होने हैं। इसमें करीब 850 करोड़ रुपये के इस काम का टेंडर बीते साल रद्द कर दिया था। विश्वबैंक ने दोबारा इसका टेंडर कॉल कर काम शुरू करने को कहा था। लेकिन बीते एक साल से अब तक काम शुरू होना तो दूर, टेंडर प्रक्रिया तक पूरी नहीं हो पाई है।
निदेशक मंडल की बैठक
न होने से लटका है काम
पेयजल कंपनी के अनुसार इस प्रोजेक्ट का टेंडर अवार्ड करने के लिए सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब निदेशक मंडल से मंजूरी ली जानी है। निदेशक मंडल की बैठक बुलाने के लिए सचिवालय में अधिकारियों से भी संपर्क किया गया था लेकिन कई सचिव स्तर के अधिकारी शिमला से बाहर होने के कारण बैठक नहीं हो पाई। अब कंपनी को प्रोग्रेस रिपोर्ट देने की बजाय यह बताना पड़ेगा कि टेंडर क्यों अवार्ड नहीं हुआ। कंपनी का कहना है कि बैंक की टीम को इस बार फिलहाल टेंडर संबंधी रिपोर्ट ही दी जाएगी।
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निदेशक मंडल की बैठक न होने से कंपनी शुरू नहीं कर पा रही काम
850 करोड़ से शिमला शहर में बिछनी हैं नई पेयजल लाइनें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पानी की सुविधा देने के लिए सतलुज पेयजल परियोजना में अब तक कितना काम किया गया, इसका जायजा लेने विश्वबैंक की टीम 20 नवंबर को शिमला पहुंच रही है।
बैंक की टीम देखेगी कि पिछले एक साल में इस परियोजना में कितना काम हुआ है। लेकिन परेशानी यह है कि जिस कार्य को देखने के लिए यह टीम आ रही है, उसका अभी तक टेंडर अवार्ड नहीं हो पाया है, काम होना तो दूर की बात है। शहरवासियों को 24 घंटे पेयजल सुविधा देने के लिए सतलुज का पानी शिमला पहुंचाया जाना है। इसका काम दो चरणों में हो रहा है। पहले चरण में सतलुज से शिमला तक मुख्य पेयजल लाइन बिछाई जाएगी और पंपिंग स्टेशन तैयार होंगे। इसका काम बीते दो साल से चल रहा है। दूसरे चरण में शिमला शहर में नई पेयजल लाइनें बिछनी हैं और 40 से ज्यादा जलभंडारण टैंक तैयार होने हैं। इसमें करीब 850 करोड़ रुपये के इस काम का टेंडर बीते साल रद्द कर दिया था। विश्वबैंक ने दोबारा इसका टेंडर कॉल कर काम शुरू करने को कहा था। लेकिन बीते एक साल से अब तक काम शुरू होना तो दूर, टेंडर प्रक्रिया तक पूरी नहीं हो पाई है।
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निदेशक मंडल की बैठक
न होने से लटका है काम
पेयजल कंपनी के अनुसार इस प्रोजेक्ट का टेंडर अवार्ड करने के लिए सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब निदेशक मंडल से मंजूरी ली जानी है। निदेशक मंडल की बैठक बुलाने के लिए सचिवालय में अधिकारियों से भी संपर्क किया गया था लेकिन कई सचिव स्तर के अधिकारी शिमला से बाहर होने के कारण बैठक नहीं हो पाई। अब कंपनी को प्रोग्रेस रिपोर्ट देने की बजाय यह बताना पड़ेगा कि टेंडर क्यों अवार्ड नहीं हुआ। कंपनी का कहना है कि बैंक की टीम को इस बार फिलहाल टेंडर संबंधी रिपोर्ट ही दी जाएगी।
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