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Shimla News: वाहन में सवारी होने पर क्लेम को खारिज नहीं सकती कंपनी
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दुर्घटनाग्रस्त वाहन का मुआवजा खारिज करने पर बीमा कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग की टिप्पणी
किन्नौर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था मालवाहक वाहन
रुचि सांख्यान
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील को खारिज करते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि किसी मालवाहक वाहन में अनधिकृत यात्री सवार हों तो केवल इस आधार पर बीमा कंपनी पूरे दावे (मुआवजे) को खारिज नहीं कर सकती।
आयोग के अनुसार दावा तभी निरस्त किया जा सकता है जब कंपनी यह साबित करे कि दुर्घटना का मुख्य कारण सवारियों का बैठना था। राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंद्र सिंह मेहता और सदस्य प्रताप सिंह ठाकुर की पीठ ने जिला उपभोक्ता आयोग शिमला के फैसले को कानूनी रूप से सही ठहराते हुए बीमा कंपनी की अपील को खारिज कर दिया।
किन्नौर निवासी लीला देवी ने अपनी बोलेरो कैंपर का बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से 3,25,185 रुपये की आईडीवी पर करवाया था। 23 दिसंबर 2009 को यह वाहन बास्पा-दो पावर हाउस के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना के समय वाहन में सामान लदा हुआ था और चालक सहित पांच लोग सवार थे। दुर्घटना के बाद वाहन मालिक ने दावे के लिए आवेदन किया लेकिन लंबे समय तक टालमटोल के बाद बीमा कंपनी ने 9 जनवरी 2018 को यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि मालवाहक वाहन में चार अनधिकृत सवारियां बैठी थीं जो नीति की शर्तों का उल्लंघन है। इसके खिलाफ पीड़िता ने जिला उपभोक्ता आयोग शिमला में शिकायत दर्ज करवाई। जिला आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया जिसके खिलाफ बीमा कंपनी ने राज्य आयोग में अपील दायर की थी। बीमा कंपनी ने अपील में मुख्य रूप से तीन आपत्तियां उठाई थीं। वाहन मालवाहक था और उसमें अनधिकृत रूप से सवारियां ले जाई जा रही थीं। परिवाद समय-सीमा समाप्त होने के बाद दायर किया गया था। हादसा किन्नौर में हुआ था, इसलिए शिमला जिला आयोग के पास इस मामले की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र नहीं था। राज्य आयोग ने बीमा कंपनी की सभी आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया। बीमा कंपनी का संभागीय कार्यालय शिमला में स्थित है, इसलिए शिमला जिला आयोग को इस पर सुनवाई का पूरा अधिकार था। आयोग ने कहा कि स्थापित कानून के अनुसार दावा केवल तभी खारिज हो सकता है जब नीति की शर्तों का ऐसा गंभीर उल्लंघन हुआ हो जिससे दुर्घटना घटित हुई हो। बीमा कंपनी ऐसा कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सकी जिससे यह साबित हो कि दुर्घटना चार सवारियों के बैठने की वजह से ही हुई थी। आयोग ने माना कि मालवाहक वाहन में सवारियां होने की स्थिति में दावे का निपटारा गैर-मानक आधार (मरम्मत खर्च का 75 फीसदी तक) पर किया जाना उचित है। जिला आयोग ने सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर जो हर्जाना तय किया है, उसमें किसी भी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
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किन्नौर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था मालवाहक वाहन
रुचि सांख्यान
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील को खारिज करते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि किसी मालवाहक वाहन में अनधिकृत यात्री सवार हों तो केवल इस आधार पर बीमा कंपनी पूरे दावे (मुआवजे) को खारिज नहीं कर सकती।
आयोग के अनुसार दावा तभी निरस्त किया जा सकता है जब कंपनी यह साबित करे कि दुर्घटना का मुख्य कारण सवारियों का बैठना था। राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंद्र सिंह मेहता और सदस्य प्रताप सिंह ठाकुर की पीठ ने जिला उपभोक्ता आयोग शिमला के फैसले को कानूनी रूप से सही ठहराते हुए बीमा कंपनी की अपील को खारिज कर दिया।
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किन्नौर निवासी लीला देवी ने अपनी बोलेरो कैंपर का बीमा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से 3,25,185 रुपये की आईडीवी पर करवाया था। 23 दिसंबर 2009 को यह वाहन बास्पा-दो पावर हाउस के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना के समय वाहन में सामान लदा हुआ था और चालक सहित पांच लोग सवार थे। दुर्घटना के बाद वाहन मालिक ने दावे के लिए आवेदन किया लेकिन लंबे समय तक टालमटोल के बाद बीमा कंपनी ने 9 जनवरी 2018 को यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि मालवाहक वाहन में चार अनधिकृत सवारियां बैठी थीं जो नीति की शर्तों का उल्लंघन है। इसके खिलाफ पीड़िता ने जिला उपभोक्ता आयोग शिमला में शिकायत दर्ज करवाई। जिला आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया जिसके खिलाफ बीमा कंपनी ने राज्य आयोग में अपील दायर की थी। बीमा कंपनी ने अपील में मुख्य रूप से तीन आपत्तियां उठाई थीं। वाहन मालवाहक था और उसमें अनधिकृत रूप से सवारियां ले जाई जा रही थीं। परिवाद समय-सीमा समाप्त होने के बाद दायर किया गया था। हादसा किन्नौर में हुआ था, इसलिए शिमला जिला आयोग के पास इस मामले की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र नहीं था। राज्य आयोग ने बीमा कंपनी की सभी आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया। बीमा कंपनी का संभागीय कार्यालय शिमला में स्थित है, इसलिए शिमला जिला आयोग को इस पर सुनवाई का पूरा अधिकार था। आयोग ने कहा कि स्थापित कानून के अनुसार दावा केवल तभी खारिज हो सकता है जब नीति की शर्तों का ऐसा गंभीर उल्लंघन हुआ हो जिससे दुर्घटना घटित हुई हो। बीमा कंपनी ऐसा कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सकी जिससे यह साबित हो कि दुर्घटना चार सवारियों के बैठने की वजह से ही हुई थी। आयोग ने माना कि मालवाहक वाहन में सवारियां होने की स्थिति में दावे का निपटारा गैर-मानक आधार (मरम्मत खर्च का 75 फीसदी तक) पर किया जाना उचित है। जिला आयोग ने सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर जो हर्जाना तय किया है, उसमें किसी भी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
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