सात अप्रैल से पहले पेश नहीं होगा धूमल के खिलाफ चालान
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एचपीसीए केस में स्टेट विजिलेंस की ड्राफ्ट चार्जशीट सरकार को मिल गई है। बुधवार को ही विजिलेंस मुख्यालय से सारी फाइलें कार्यवाहक मुख्य सचिव के दफ्तर में सचिवालय पहुंच गई थीं।
वीरवार सुबह कार्यवाहक मुख्य सचिव पी. मित्रा आरबीआई की सिक्योरिटी संबंधी बैठक के लिए सचिवालय से बाहर थे। दोपहर बाद आए और विजिलेंस अफसरों से साथ लंबी बैठक की।
सूत्र कहते हैं कि गृह और कार्मिक विभाग अभियोजन मंजूरी की प्रक्रिया शुरू करने से पहले समीक्षा में करीब एक हफ्ता लगाएंगे। विधि सलाह भी ली जा सकती है।
दूसरी ओर वीरवार को ही एचपीसीए की ओर से मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर इस केस की सुनवाई प्री-पोन करने के लिए हाईकोर्ट में आवेदन दिया गया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर के सामने इस मसले पर एडवोकेट जनरल ने कहा कि सरकार से अभियोजन मंजूरी लेने के लिए फाइलें भेजी गई हैं। ये प्रक्रिया का हिस्सा है। 7 अप्रैल से पहले चालान दायर नहीं हो रहा है।
हालांकि एडवोकेट जनरल ने ये स्टेटमेंट रिकार्ड करवाने से इनकार किया। इस जवाब के बाद कोर्ट ने एचपीसीए के आवेदन को खारिज कर दिया। अब केस की सुनवाई 7 अप्रैल को होगी।
गवर्नर मंजूरी देंगी या विधानसभा अध्यक्ष?
यह सवाल बना हुआ है कि पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ अभियोजन मंजूरी कौन देगा?
यदि वर्तमान पद को माना जाए तो विधायक होने के नाते यह मंजूरी विधानसभा अध्यक्ष बीबीएल बुटेल देंगे।
लेकिन यदि केस की अवधि को देखा जाए तो तब धूमल मुख्यमंत्री थे। ऐसे में मंजूरी राज्यपाल से आएगी।
सांसद अनुराग ठाकुर के लिए फाइल लोकसभा अध्यक्ष को भेजी जा रही है।