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Shimla News: सोने को फर्जी बताने पर बैंक को बाजार दर पर सोने की कीमत चुकाने का आदेश
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सोने को गिरवी रखकर ग्राहक ने लिया था ऋण, बैंक ने बाद में ऑडिट में सोने को बताया था नकली
50 हजार रुपये भी करने होंगे बैंक को अदा
रुचि सांख्यान
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने गोल्ड लोन के मामले में एक्सिस बैंक को सेवा में कोताही और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराया है।
आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता के गिरवी रखे 22 कैरेट के 103.537 ग्राम सोने का आज के बाजार मूल्य के हिसाब से भुगतान करे। इसके साथ ही बैंक पर मानसिक प्रताड़ना के लिए 30 हजार रुपये और मुकदमा खर्च के तौर पर 20 हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है। ठियोग क्षेत्र निवासी इंदर जस्टा ने मालरोड स्थित एक्सिस बैंक से सोने के गहने गिरवी रखकर गोल्ड लोन लिया था। उन्होंने वर्ष 2022 में गहने गिरवी रखकर 3.98 लाख रुपये का ऋण लिया था। इसे समय पर चुकाने के बाद मार्च 2023 में उन्हें इतनी ही राशि का ऋण दोबारा मिला। इसके बाद अप्रैल 2023 में कुछ अतिरिक्त सोने के जेवर गिरवी रखकर 6.42 लाख रुपये का एक और ऋण लिया गया। हर बार ऋण स्वीकृत करने से पहले बैंक के अधिकृत वैल्यूअर द्वारा सोने के वजन और शुद्धता की पूरी जांच-परख की थी।
जुलाई 2023 में बैंक ने शिकायतकर्ता को अचानक नोटिस थमा दिया। इसमें कहा कि रूटीन इंटरनल ऑडिट के दौरान उनके गिरवी रखे गहने 100 फीसदी नकली पाए गए हैं। लिहाजा उन्हें 10 दिन के भीतर ब्याज सहित 20,95,593 रुपये का बकाया ऋण चुकता करने को कहा गया। इस पर शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया और आरोप लगाया कि यह ऑडिट उनकी पीठ पीछे, बिना सहमति और सूचना के किया गया। इसमें गहनों से छेड़छाड़ या उन्हें बदलने की पूरी आशंका है।
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बैंक की दलील खारिज
बैंक ने आयोग में तर्क दिया कि शुरुआती वैल्यूअर के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाया है और धोखाधड़ी का मामला होने के कारण इसकी सुनवाई दीवानी अदालत में होनी चाहिए। हालांकि आयोग ने बैंक की दलील को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गोल्ड लोन नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि बैंक को समय-समय पर औचक निरीक्षण या ऑडिट करने का अधिकार तभी है, जब लोन एग्रीमेंट में ग्राहक की स्पष्ट सहमति ली हो। बैंक यह साबित करने में नाकाम रहा कि उसने ग्राहक को यह शर्तें समझाई थीं या उनकी कोई सहमति ली थी। आयोग ने माना कि जब बैंक पहले दो बार सोने की शुद्धता की पुष्टि कर चुका था तो ग्राहक की अनुपस्थिति में उसे नकली बताना बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आयोग के प्रमुख निर्देश
उपभोक्ता आयोग ने शिकायत को स्वीकार करते हुए एक्सिस बैंक को शिकायतकर्ता के 87.700 ग्राम के कंगन और 13.500 ग्राम की चेन शुद्ध वजन 103.537 ग्राम 22 कैरेट सोने का आज के बाजार भाव के अनुसार मूल्य तय करने का आदेश दिया है। इस मूल्यांकन में से शिकायतकर्ता के बकाया मूल ऋण और तय ब्याज की राशि काटकर शेष रकम शिकायतकर्ता को अदा की जाए। बैंक को इस पूरे आदेश की अनुपालना आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर सुनिश्चित करनी होगी।
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50 हजार रुपये भी करने होंगे बैंक को अदा
रुचि सांख्यान
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने गोल्ड लोन के मामले में एक्सिस बैंक को सेवा में कोताही और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराया है।
आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता के गिरवी रखे 22 कैरेट के 103.537 ग्राम सोने का आज के बाजार मूल्य के हिसाब से भुगतान करे। इसके साथ ही बैंक पर मानसिक प्रताड़ना के लिए 30 हजार रुपये और मुकदमा खर्च के तौर पर 20 हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है। ठियोग क्षेत्र निवासी इंदर जस्टा ने मालरोड स्थित एक्सिस बैंक से सोने के गहने गिरवी रखकर गोल्ड लोन लिया था। उन्होंने वर्ष 2022 में गहने गिरवी रखकर 3.98 लाख रुपये का ऋण लिया था। इसे समय पर चुकाने के बाद मार्च 2023 में उन्हें इतनी ही राशि का ऋण दोबारा मिला। इसके बाद अप्रैल 2023 में कुछ अतिरिक्त सोने के जेवर गिरवी रखकर 6.42 लाख रुपये का एक और ऋण लिया गया। हर बार ऋण स्वीकृत करने से पहले बैंक के अधिकृत वैल्यूअर द्वारा सोने के वजन और शुद्धता की पूरी जांच-परख की थी।
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जुलाई 2023 में बैंक ने शिकायतकर्ता को अचानक नोटिस थमा दिया। इसमें कहा कि रूटीन इंटरनल ऑडिट के दौरान उनके गिरवी रखे गहने 100 फीसदी नकली पाए गए हैं। लिहाजा उन्हें 10 दिन के भीतर ब्याज सहित 20,95,593 रुपये का बकाया ऋण चुकता करने को कहा गया। इस पर शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया और आरोप लगाया कि यह ऑडिट उनकी पीठ पीछे, बिना सहमति और सूचना के किया गया। इसमें गहनों से छेड़छाड़ या उन्हें बदलने की पूरी आशंका है।
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बैंक की दलील खारिज
बैंक ने आयोग में तर्क दिया कि शुरुआती वैल्यूअर के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाया है और धोखाधड़ी का मामला होने के कारण इसकी सुनवाई दीवानी अदालत में होनी चाहिए। हालांकि आयोग ने बैंक की दलील को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की खंडपीठ ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गोल्ड लोन नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि बैंक को समय-समय पर औचक निरीक्षण या ऑडिट करने का अधिकार तभी है, जब लोन एग्रीमेंट में ग्राहक की स्पष्ट सहमति ली हो। बैंक यह साबित करने में नाकाम रहा कि उसने ग्राहक को यह शर्तें समझाई थीं या उनकी कोई सहमति ली थी। आयोग ने माना कि जब बैंक पहले दो बार सोने की शुद्धता की पुष्टि कर चुका था तो ग्राहक की अनुपस्थिति में उसे नकली बताना बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आयोग के प्रमुख निर्देश
उपभोक्ता आयोग ने शिकायत को स्वीकार करते हुए एक्सिस बैंक को शिकायतकर्ता के 87.700 ग्राम के कंगन और 13.500 ग्राम की चेन शुद्ध वजन 103.537 ग्राम 22 कैरेट सोने का आज के बाजार भाव के अनुसार मूल्य तय करने का आदेश दिया है। इस मूल्यांकन में से शिकायतकर्ता के बकाया मूल ऋण और तय ब्याज की राशि काटकर शेष रकम शिकायतकर्ता को अदा की जाए। बैंक को इस पूरे आदेश की अनुपालना आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर सुनिश्चित करनी होगी।