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बच्चों को बांटे टॉकिंग वॉच
बयूरो/ अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 27 Apr 2014 09:50 PM IST
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उमंग फाउंडेशन की ओर से वाईएमसीए में रविवार को दृष्टि बाधितों को नई सूचना और प्रौद्योगिक की से जोड़ने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। इसका शुभारंभ प्रदेश विश्वविद्यालय के अंग्रेजी वरिष्ठ प्रोफेसर पंकज सिंह ने किया।
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सीआईआई के पर्यटन विभाग के अध्यक्ष अजीत बुटेल ने कहा कि नई सूचना और प्रौद्योगिकी तकनीकों के विकास से दृष्टि बाधित और दृष्टिहीन लोगों के जीवन में क्रांति आई है। कल तक जहां इन्हें एक अक्षर पढ़ना असंभव था, वहीं आज के समय में तकनीकों के प्रयोग से ये लोग शिक्षा के क्षेत्र में सक्षम लोगों से भी आगे बढ़ रहे हैं।
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पंजाब नेशनल बैंक के उप महाप्रबंधक बीके गोयल ने कहा कि आज चुनौती शारीरिक अक्षमता नहीं। लोगों की सामाजिक मानसिक अक्षमता ज्यादा घातक है। यह इंसान को जिंदगी भर के लिए नाकामयाब कर देती है।
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कार्यशाला के आयोजक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि दृष्टि बाधित लोग भी सामान्य जीवन जी सकते हैं। उन्हें सहानुभूति की बजाय प्रेरणा की जरूरत है। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों और चंडीगढ़ से आए दृष्टिहीन बच्चों ने हिस्सा लिया। इन बच्चों को टॉकिंग वॉच और एंजेल प्लेयर बांटे गए।
प्रशांत ने दी टॉकिंग सॉफ्टवेयर की जानकारी
राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित प्रशांत रंजन ने टॉकिंग सॉफ्टवेयर और अन्य श्रवण उपकरणों के बारे में प्रयोग करके दिखाया। उन्होंने टॉकिंग कंप्यूटर और टॉकिंग मोबाइल सॉफ्टवेयर की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस तरह एक दृष्टिहीन व्यक्ति मोबाइल फोन और इंटरनेट की मदद से अलग अलग रंगों की पहचान कर सकता है।
टॉकिंग सॉफ्टवेयर की सहायता से की बीए
कुल्लू के खेमराज ने बताया कि स्नातक की पढ़ाई उन्होंने कंप्यूटर टॉकिंग सॉफ्टवेयर की सहायता से की। कॉलेज में लेक्चर को रिकॉर्ड करके और किताबों को टॉकिंग सॉफ्टवेयर से आवाज में बदलकर पढ़ाई की। दृष्टिहीन होने के बावजूद ये फेसबुक, गूगल और इंटरनेट का प्रयोग आसानी से कर लेते हैं।