शिक्षकों ने पेपर चेकिंग रोकी, मानदेय बढ़ाने की मांग
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पेपर चेकिंग शुल्क न बढ़ाने से नाराज शिक्षकों ने बुधवार को प्रदेशभर में बोर्ड परीक्षाओं की पेपर चेकिंग का काम रोक दिया।
राजधानी शिमला सहित प्रदेश में स्थापित सभी 29 पेपर चेकिंग केंद्रों पर काम प्रभावित हुआ।
कई केंद्रों पर शिक्षकों ने प्रदर्शन भी किया। स्कूल शिक्षा बोर्ड ने करीब 4000 शिक्षकों को इस ड्यूटी पर लगाया है।
पेपर चेकिंग रुकने से 10वीं और 12वीं परीक्षाओं के रिजल्ट लेट होने की आशंका बढ़ गई है।
शिमला स्थित एसडी स्कूल मूल्यांकन का कार्य बंद रहा।
मानदेय 15 रुपये करने की मांग
शिक्षकों ने सुबह मूल्यांकन स्थल पर पहुंच कर सिर्फ हाजिरी लगाई और उसके बाद स्कूल परिसर में मौजूद रहे, मगर पेपर चेक नहीं किए।
राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान की अगुवाई में शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। राज्य के कई हिस्सों से शिक्षकों के प्रदर्शन करने की सूचना है।
28 मार्च से 10वीं और 12वीं के पेपरों की चेकिंग का कार्य शुरू हो चुका है।
शिक्षकों की मांग है कि उनका मानदेय 6 रुपये प्रति पेपर से बढ़ाकर 15 रुपये किया जाए।
स्कूल शिक्षा बोर्ड ने हाल ही में इसे सिर्फ 50 पैसे बढ़ाया।
अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि उनकी मांग पूरा करने के लिए अब चुनाव आचार संहिता का बहाना बनाया जा रहा है। लेकिन यह मंजूर नहीं।
बिलासपुर, हमीरपुर में कुछ पेपर चेक किए
अध्यापक संघ का दावा है कि बिलासपुर और हमीरपुर के कुछ केंद्रों में देरी से प्रदर्शन शुरू होने के कारण शिक्षकों ने कुछ देर पेपर चेक किए थे।
जबकि शिमला के 2, ऊना के 2, कुल्लू के 1, सोलन के 2, सिरमौर के 2, मंडी के 5, कांगड़ा के 8 केंद्रों पर यह काम पूरी तरह ठप रहा।
नहीं चेक हुए 1 लाख पेपर
एक दिन में एक शिक्षक को 32 पेपर चैक करने होते हैं।
प्रदर्शन करने के कारण 1 लाख से अधिक पेपर चैक नहीं हो पाए। इस बारे में स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।