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Teachers Day Special: युवाओं का भविष्य संवारने में भी पीछे नहीं हैं शिक्षक, भर्ती के लिए कर रहे मार्गदर्शन

Mon, 05 Sep 2022 11:17 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, नारी (ऊना)
संवाद न्यूज एजेंसी, नारी (ऊना) Published by: Krishan Singh Updated Mon, 05 Sep 2022 11:17 AM IST
सार

प्रदेश के ऊना जिले के विभिन्न स्कूलों में कई शिक्षक अध्यापन कार्य के अलावा युवाओं का भविष्य संवारने में भी पीछे नहीं है। अपने स्तर से पहल कर ये शिक्षक ड्यूटी के अलावा भी सक्रिय रहकर बेहतरीन समाज के निर्माण में जुटे हैं। 

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Teachers are not behind even in grooming the future of youth, guiding for army-police recruitment
ऊना जिले के शिक्षक। - फोटो : संवाद

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के विभिन्न स्कूलों में कई शिक्षक अध्यापन कार्य के अलावा युवाओं का भविष्य संवारने में भी पीछे नहीं है। अपने स्तर से पहल कर ये शिक्षक ड्यूटी के अलावा भी सक्रिय रहकर बेहतरीन समाज के निर्माण में जुटे हैं। कोई अपनी जेब से खर्चा कर विद्यार्थियों को सुविधा दे रहा है तो कोई अतिरिक्त कक्षाएं लेकर बच्चों को पढ़ाई में निपुण बनाने में जुटा है। युवाओं को सेना व पुलिस भर्ती के अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं कराने में भी जिले के कई शिक्षक सक्रिय हैं। पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए शिक्षक अपने ही खर्चे से साधन जुटा रहे हैं। शिक्षक दिवस पर ऊना जिला के ऐसे ही कुछ शिक्षकों से अवगत कराती यह रिपोर्ट...

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विश्व रतन तैयार कर रहे अग्निवीर

 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बदोली में तैनात अध्यापक विश्व रतन सेना की नई अग्निपथ भर्ती योजना के लिए अग्निवीर तैयार करने में जुटे हुए हैं। खिलाड़ी विश्व रतन ने अपनी 16 वर्ष की सेवा में खिलाड़ियों को अभ्यास करवा कर सेना और पुलिस भर्ती के लिए तैयार किया। अब तक उनसे प्रशिक्षित 70 युवा भर्ती हो चुके हैं। अब अग्निवीर टेस्ट की तैयारी के लिए भी वह निशुल्क अभ्यास करवा रहे हैं। विश्व रतन का कहना है कि अध्यापक केवल बच्चों के लिए ही नहीं समस्त समाज के लिए रोल मॉडल होना चाहिए। एक अध्यापक से सारा समाज अच्छे कार्य की अपेक्षा रखता है। अपना मान सम्मान बरकरार रखना अध्यापक के अपने हाथ में है।

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बच्चों को शिक्षा से जोड़ रहे जसमेर सिंह
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रायंसरी में सेवारत जसमेर सिंह स्कूल न आने वाले विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने का काम कर रहे हैं। कक्षा में न आने वाले विद्यार्थियों के घर पहुंचकर वह उन्हें अपनी गाड़ी में स्कूल तक पहुंचाते हैं। स्कूल न आने का कारण पता लगाने के साथ काउंसलिंग कर उन्हें शिक्षा से जोड़ते हैं। कोरोना काल में भी उन्होंने ऑफलाइन मोड पर बच्चों का मार्गदर्शन किया। शिक्षक जसमेर सिंह का कहना है कि वह अपनी ड्यूटी को ईमानदारी से निभाने का प्रयास करते हैं। शिक्षा से विद्यार्थी को जोड़ना ही उनका कर्तव्य है।
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रोजाना एक घंटा अतिरिक्त पढ़ाई करवा रही मोना शर्मा
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धुसाड़ा में तैनात विज्ञान अध्यापक मोना शर्मा स्कूल खुलने से पहले रोजाना एक घंटा पढ़ाई में कमजोर बच्चों को पढ़ाती हैं। विषय समझ न आने पर उन्हें आसान तरीकों से बताने और अलग-अलग माध्यमों से समझाने का प्रयास मोना शर्मा कर रही हैं। स्कूल में सांस्कृतिक और अन्य गतिविधियों में उनकी भूमिका सक्रिय रहती है। मोना शर्मा का कहना है कि पढ़ाई में कमजोर बच्चों पर अधिक जोर देने की जरूरत रहती है। ऐसे में उनकी अतिरिक्त कक्षाएं ली जाती हैं।

महेशा शारदा ने पढ़ाई के अनुकूल बनाया वातावरण
राजकीय प्राथमिक पाठशाला लमलेडा में बतौर जेबीटी अध्यापक महेश शारदा कोरोना के दौरान घर-घर जाकर बच्चों का मार्गदर्शन किया। विद्यालय में अपने खर्च पर पेड़-पौधे लगवाए। पढ़ाई को मनोरंजक बनाने के लिए स्वयं जमीन पर बैठकर बच्चों को पढ़ाते हैं। ताकि बच्चे बिना किसी झिझक उनके साथ घुल मिल सकें। महेश शारदा का कहना है कि बच्चों के साथ घुल मिलकर उन्हें आसानी से सब समझाया जा सकता है। विषयों को मनोरंजक तरीके से पेश करने से बच्चे भी खुश रहते हैं।


बच्चों के लिए राजीव ने बनवाया स्मार्ट रूम
राजकीय प्राथमिक पाठशाला लोअर बसाल में जेबीटी राजीव कुमार ने तीन कंप्यूटर लगवाकर स्मार्ट रूम बनवाया। कक्षा में बेहतरीन माहौल के लिए दीवारों पर राजीव कुमार ने खुद पेंटिंग कर इन्हें जीवंत कर दिया है। राजीव कुमार विद्यालय में संगीत की शिक्षा भी विद्यार्थियों को दे रहे हैं। राजीव कुमार का कहना है कि अच्छे माहौल में ही बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जा सकती है। बच्चों को बेहतरीन शिक्षा देने के लिए ही उन्होंने यह कदम उठाए। इससे बच्चों की पढ़ाई में और रुचि बढ़ी है।

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