25 फीसदी से कम परिणाम पर रुक जाएगी शिक्षकों की इंक्रीमेंट
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राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं और जमा दो कक्षा की वार्षिक परीक्षाओं में लगातार दूसरे साल 25 फीसदी से कम परिणाम देने वाले प्रिंसिपलों और शिक्षकों की इंक्रीमेंट रुकेगी। पहले साल में 25 फीसदी से कम परिणाम देने वाले प्रिंसिपलों और शिक्षकों को चेतावनी पत्र जारी किया जाएगा।
खराब परीक्षा परिणाम देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी में जुटे उच्च शिक्षा निदेशालय ने सोमवार को स्कूल शिक्षा बोर्ड से एक हफ्ते के भीतर दसवीं और जमा दो कक्षा के परीक्षा परिणाम का पूरा ब्यौरा तलब किया है। नौ बिंदुओं को लेकर बोर्ड से विस्तृत जानकारी मांगी गई है।
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने कहा है कि स्कूल शिक्षा बोर्ड से दसवीं और जमा दो कक्षाओं के परिणाम का ब्यौरा आने के बाद समीक्षा की जाएगी। बेहतर परिणाम नहीं देने वाले शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह मांगी गई हैं जानकारियां
उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव को लिखे पत्र में दसवीं और जमा दो कक्षा का ओवर ऑल पास प्रतिशत का ब्योरा मांगा है। इसके अलावा पूछा गया है कि कितने बच्चों के 60 फीसदी से अधिक अंक आए हैं? टॉप 500 बच्चे कौन हैं? टॉप 50 में कौन बच्चे हैं?
थर्ड डिविजन में कितने बच्चे पास हुए हैं? कितने स्कूलों का परीक्षा परिणाम 80 से 100 फीसदी के बीच है? कितने स्कूल का परिणाम शून्य से 25 फीसदी के बीच है? कितने स्कूलों का परिणाम 26 से 50 फीसदी के बीच है? सभी विषयों में अलग-अलग परिणाम किस तरह का है?
बीते साल नहीं हुई थी कार्रवाई
बोर्ड परीक्षाओं में साल 2018 के दौरान कम परिणाम देने वाले शिक्षकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। निदेशालय द्वारा इंक्रीमेंट रोकने को लेकर जारी किए गए आदेशों का अधिकांश शिक्षक संगठनों एकजुट होकर विरोध किया था।
मामला सरकार के पास पहुंचने के बाद कम परिणाम देने वाले शिक्षकों को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था। साल 2019 में कम परिणाम देने वाले शिक्षकों पर सरकार ने कार्रवाई के प्रति चेताया था।