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स्वतंत्रता के प्रहरी: घर कुर्क करने के आदेश से भी नहीं डरे पंडित दुर्गादास, दो अंग्रेज अफसरों की थी पिटाई

Sat, 16 Aug 2025 01:09 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर/कुल्लू।
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर/कुल्लू। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 16 Aug 2025 01:09 PM IST
सार

 बकारटी गांव के स्वतंत्रता सेनानी पंडित दुर्गादास शर्मा आजादी के गुमनाम नायक थे। उन्होंने आजादी के लिए 11 वर्ष तक लाहौर की वोस्टल समेत आधा दर्जन जेलों में अंग्रेजों की यातनाएं सहीं।

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swatantrata ke prahari: Pandit Durgadas was not afraid even after the order to confiscate his house
स्वतंत्रता सेनानी पंडित दुर्गादास शर्मा, युवराज कंवर प्रताप सिंह। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के बकारटी गांव के स्वतंत्रता सेनानी पंडित दुर्गादास शर्मा आजादी के गुमनाम नायक थे। उन्होंने आजादी के लिए 11 वर्ष तक लाहौर की वोस्टल समेत आधा दर्जन जेलों में अंग्रेजों की यातनाएं सहीं। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लेने पर उन्हें छह माह का कारावास हुआ। अंग्रेज सरकार ने घर को कुर्क करने के आदेश भी दिए। पंडित दुर्गा दास को उनकी बहादुरी के लिए जाना जाता था। एक दफा जब मसियाणा घाट में अंग्रेज अधिकारी उन्हें हिरासत में लेने आए तो गाली-गलौज करने पर उन्होंने दो अंग्रेज अधिकारियों की पिटाई कर डाली। वर्ष 1928 में लाला लाजपत राय के साइमन कमीशन वापस जाओ आंदोलन में लाहौर की जेल में रहे। 1930 में नमक सत्याग्रह के दौरान धर्मशाला के योल में नौ माह जेल में रहे।

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इसके बाद 1933 में लाहौर जेल में रहे। असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने पर उन्हें अंग्रेजों ने लाहौर, फिरोजपुर और जालंधर में डेढ़ वर्ष तक जेल में रखा। 1941 में गुरदासपुर में एक वर्ष जेल में अंग्रेजों की यातनाएं सहीं, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम की लिखित कविताओं एवं लेखों को रैलियों और जनसभाओं में पढ़कर आम जनमानस में आजादी की अलख जगाते थे। वह आजाद हिंद फौज से भी परोक्ष रूप से जुड़े रहे। मरणोपंरात उनके उत्तराधिकारियों को वर्ष 1972 में केंद्रीय सरकार ने तांब्र पत्र से सम्मानित किया। उनके बेटे पंजाब पुलिस में थे, जिनका निधन हो गया है। है। पंडित दुर्गादास के पौत्र नरेश शर्मा स्वतंत्रता सेनानी एवं उतराधिकारी कल्याण संघ हमीरपुर के अध्यक्ष हैं।

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कंवर प्रताप सिंह थे पहाड़ी रियासतों के पहले स्वतंत्रता सेनानी, टैक्स देने से कर दिया इन्कार
 देश को आजादी दिलाने में कुल्लू जिले के स्वतंत्रता सेनानियों ने भी कुर्बानी दी है। उनमें पहला नाम युवराज कंवर प्रताप सिंह का आता है। उन्होंने अंग्रेजों की तानाशाही हुकूमत हुकूमत की खिलाफत की थी। वर्ष 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ विरोध का बिगुल बजाया था। कुल्लू की जनता को अंग्रेजी हुकूमत को कर देने से मना किया और कुल्लू, लाहौल व बीड़ भंगाल की रियासतों के नेगी, नंबरदारों और गांव के मुखिया सहित सभी लोगों को अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार किया, लेकिन किसी कारण उनका एक गुप्तचर पकड़ा गया। इससे सामूहिक विद्रोह नहीं हो पाया। अंग्रेजों ने उन्हें तीन अगस्त 1857 को धर्मशाला में फांसी दी। 

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