स्वच्छता में पिछड़ा शिमला, नेशनल रैंकिंग में 20 पायदान लुढ़का
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पहाड़ों की रानी शिमला स्वच्छता में पिछड़ गई है। साल 2016 की स्वच्छता रैंकिंग में देश भर में 27वें स्थान पर रहने वाला शिमला शहर ताजा रैंकिंग में लुढ़क कर 47वें पायदान पर पहुंच गया है। वर्ष 2014 में शिमला शहर को 14वां रैंक मिला था। शिमला को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिलाने का दावा करने वाले नगर निगम और जिला प्रशासन की एक बार फिर पोल खुल गई है।
पहली बार स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 में शामिल हुआ कुल्लू 434 शहरों में से 259वें नंबर पर रहा। भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 में शामिल शहरों की सूची जारी कर दी है। स्वच्छता के मामले में शिमला शहर इस साल 20 पायदान लुढ़क गया है। इंदौर शहर 149वें नंबर से पहले स्थान पर पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश का गौंडा देश का सबसे गंदा शहर है। इसका रैंक 434 है।
नॉर्थ जोन के 34 शहरों में से प्रथम स्थान पर शिमला
बेशक नेशनल रैंकिंग में नगर निगम शिमला 47वें पायदान पर पहुंच गया है लेकिन नगर निगम का तर्क है कि प्रतिस्पर्धा में इस बार सैकड़ों शहरों के शामिल होने से शिमला पिछड़ा है। नगर निगम शिमला के सहायक आयुक्त प्रशांत सरकैक का दावा है कि शिमला शहर देश के नॉर्थ जोन के 34 शहरों में से प्रथम स्थान पर है जिनकी जनसंख्या 2 से 10 लाख के बीच है।
हिमाचल से दो ही प्रपोजल भेजे गए थे केंद्र को
स्वच्छता रैकिंग को लेकर हिमाचल से केंद्र सरकार को शिमला और कुल्लू दो शहरों के प्रस्ताव भेजे गए थे। शहरी विकास विभाग के प्रोजेक्ट आफिसर बीएस ठाकुर ने कहा कि इन दोनों निकायों ने अपने शहरों को स्वच्छ होने का दावा किया था। अन्य शहरों से विभाग को कोई आवेदन नहीं मिला है।
दूसरे, केंद्र को उन्हीं शहरों का प्रस्ताव को भेजा जाता है तो साफ सुधरे हो। चूंकि केंद्रीय शहरी विभाग के अफसर शहरों का औचक निरीक्षण करते हैं। उन्होंने कहा कि नियमों के हर घर सीवरेज से जुड़ा होना चाहिए, घर में शौचालय, घर घर से कूड़ा उठाने के लिए गाड़ी या फिर डस्टबिन का इस्तेमाल होना चाहिए।