आउटसोर्स कर्मियों को लग सकता है झटका, शिक्षकों की नौकरी भी खतरे में
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हिमाचल में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनाने में जुटी सरकार की पीटीए मामले को लेकर सुप्रीमकोर्ट से आए फैसले ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सुप्रीमकोर्ट ने आरएंडपी नियमों को पूरा करने और सभी को बराबर मौका देकर ही भर्तियां करने के सरकार को आदेश दिए हैं।
बजट सत्र में आउटसोर्स कर्मियों के लिए सरकार की ओर से नीति की घोषणा होने की संभावना है। ऐसे में सुप्रीमकोर्ट का फैसला आने के बाद सरकार इस बाबत क्या फैसला लेती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
उधर, पीटीए मामले में सुप्रीमकोर्ट में सरकार के खिलाफ केस करने वाले पंकज कुमार का कहना है कि सुप्रीमकोर्ट ने सभी को बराबर मौका देकर भर्तियां करने को कहा है। अगर सरकार आउटसोर्स या पीटीए को अनुबंध पर लाती है या नियमित करती है तो यह सुप्रीमकोर्ट के आदेशों की अवहेलना होगी।
35 हजार कर्मियों के लिए नीति बनाने की घोषणा कर चुके हैं सीएम
सरकार को कोर्ट की अवमानना का सामना करना पड़ सकता है। कहा कि सुप्रीमकोर्ट ने हिमाचल सरकार को भविष्य में शिक्षकों की भर्ती कमीशन के माध्यम से करने को कहा है। सरकार को भविष्य में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने को कहा गया है।
उधर, प्रदेश के विभिन्न विभागों में 35 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी तैनात हैं। मुख्यमंत्री इनके लिए अनुबंध नीति बनाने का आश्वासन दे चुके हैं। इसी कड़ी में 15 फरवरी को शिमला में एक सम्मेलन भी आयोजित हुआ था।
2500 एसएमसी शिक्षकों की नौकरी भी खतरे में
सेवा विस्तार और अनुबंध नीति के इंतजार में बैठे प्रदेश के करीब 2500 एसएमसी शिक्षकों की नौकरी भी खतरे में आ गई है। राज्य सरकार ने एसएमसी शिक्षकों के मामले को भी पीटीए, पैट और पैरा मामले से जोड़कर विधि विभाग को भेज दिया है।
शनिवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल बैठक में भी एसएमसी शिक्षकों को एक साल का सेवा विस्तार देने को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका। 13 फरवरी से प्रदेश में शीतकालीन स्कूल खुल गए हैं। प्रदेश में कई ऐसे स्कूल हैं, जहां सिर्फ एसएमसी शिक्षक ही तैनात थे।
सेवा विस्तार नहीं मिलने के चलते एसएमसी पर लगे जेबीटी, टीजीटी, सीएंडवी और पीजीटी स्कूल नहीं जा रहे हैं। ऐसे स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शीतकालीन स्कूलों में पढ़ाने वाले एसएमसी शिक्षकों का कार्यकाल 31 दिसंबर, 2016 को समाप्त हुआ था।
सरकार से सेवा विस्तार नहीं मिलने के चलते इन शिक्षकों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। एसएमसी शिक्षक संघ के महासचिव मनोज रौंगटा ने बताया है कि 27 फरवरी को शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से सचिवालय में मुलाकात करेगा।