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पर्यटन कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, 30 हजार तक बढ़ेगी पेंशन

Fri, 25 Nov 2016 08:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 25 Nov 2016 08:52 AM IST
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Supreme Court Ordered to Increase Pension of HPTDC Employees.

सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन से जुड़े मामले में हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत दी है। भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को 1000 से 3000 की बजाय 1000 से 30 हजार रुपये या इससे अधिक पेंशन सेवा अवधि और वेतन अनुसार मिलेगी।

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वर्ष 1995 से सेवानिवृत्त पेंशनरों को भी इतना ही लाभ मिलेगा, हालांकि, उन्हें अपने मामले विभाग के समक्ष उठाने होंगे। हिमाचल हाईकोर्ट की खंडपीठ के निर्णय को रद्द करते हुए उच्चतम न्यायालय ने इसी कोर्ट की एकल पीठ के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है।
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उच्चतम न्यायालय ने भविष्य निधि संगठन को आदेश दिए हैं कि निगम कर्मचारियों के मूल वेतन और महंगाई भत्ते की कुल राशि के 8.33 फीसदी हिस्से को नियोक्ता के हिस्से में से वर्ष 1995 से पेंशन निधि में शामिल किया जाए।
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याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार जब से प्रदेश में पर्यटन निगम की स्थापना हुई तब से पर्यटन निगम अपने कर्मचारियों के मूल वेतन और महंगाई भत्ते की कुल राशि का 10 फीसदी और 12 फीसदी हिस्सा काटकर तथा इतना ही हिस्सा नियोक्ता अंशदान का डालकर भविष्य निधि संगठन में जमा करवाता रहा है।

16 नवंबर 1995 से भविष्य निधि संगठन ने अपने अंशधारकों के लिए एक पेंशन स्कीम शुरू की। इस स्कीम के तहत यह प्रावधान था कि कर्मचारी और नियोक्ता इस योजना में नियोक्ता के अंशदान में से कर्मचारी के मूल वेतन और महंगाई भत्ते की कुल राशि का 8.33 फीसदी या 5000 रुपये में से अधिकतम का 8.33 फीसदी हिस्सा ही इस फंड में जमा करवा सकता था। इसे बाद में 6500 रुपये और 15000 किया गया।

एकल पीठ ने निगम कर्मचारियों के हक में दिया फैसला

Supreme Court Ordered to Increase Pension of HPTDC Employees.

इस पेंशन योजना में वर्ष 1996 में भविष्य निधि संगठन ने एक संशोधन किया जिसके तहत कर्मचारी और नियोक्ता अगर चाहे तो नियोक्ता के हिस्से में से इस पेंशन स्कीम में कर्मचारी के मूल वेतन और महंगाई भत्ते की कुल राशि का 8.33 फीसदी हिस्सा बिना किसी अधिकतम सीमा के जमा करवा सकते थे। इसी अनुरूप इन्हें बढ़ी हुई पेंशन मिलनी थी।

इस संशोधन का पता लगने पर कर्मचारियों ने इस मामले को अपने नियोक्ता निगम के माध्यम से भविष्य निधि संगठन के समक्ष उठाया। मगर भविष्य निधि संगठन ने कर्मचारियों की इस मांग को अस्वीकार कर दिया। निगम कर्मचारियों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने फैसला निगम कर्मचारियों के हक में दिया। लेकिन भविष्य निधि संगठन की अपील को हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा मंजूर करने पर फैसला निगम कर्मचारियों के खिलाफ  हो गया। निगम कर्मचारियों ने खंडपीठ के फैसले को उच्चतम न्यायालय के समक्ष चुनौती दी। अब फैसला निगम कर्मचारियों के हक में आ गया है।

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