फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Supreme Court of India has slammed judgment of Himachal pradesh High Court

विधायिका के काम में दखल न दें कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

Thu, 09 Feb 2017 09:15 AM IST
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 09 Feb 2017 09:15 AM IST
विज्ञापन
Supreme Court of India has slammed judgment of Himachal pradesh High Court

न्यायालय को अपने दायरे में रहने की हिदायत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को दरकिनार कर दिया, जिसमें राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश टिनेंसी एंड लैंड रिफार्म एक्ट, 1972 में संशोधन करने के लिए कहा गया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक्ट में बदलाव कर राज्य में वर्ष 1972 से पहले से रहने वालों को खेतिहर और गैर खेतिहर जमीनों को खरीदने की इजाजत देने के लिए कहा था।

विज्ञापन


शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को दोषपूर्ण बताते हुए कहा कि अदालत को विधायिका के कामों में दखल नहीं देना चाहिए। न्यायमूर्ति अभय मोहन सप्रे और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को दोषपूर्ण बताते हुए कहा कि कानून बनाना विधायिका का काम है।
विज्ञापन


इसमें न्यायालय को दखल नहीं देना चाहिए। पीठ ने कहा कि न्यायपालिका, लोकतंत्र के तीन स्तंभों में से एक है। दो अन्य स्तंभ कार्यपालिका और विधायिका हैं। तीनों ही स्तंभ बराबर हैं। सभी स्तंभों के अपने-अपने दायरे हैं और सभी के लिए काम निर्धारित है। न्यायपालिका का काम यह सुनिश्चित करना है कि कार्यपालिका का कोई भी काम संविधान या कानून के अनुरूप हो। 

विज्ञापन
विज्ञापन

नीतियां या कानून बनाने का काम विधायिका का: सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court of India has slammed judgment of Himachal pradesh High Court

पीठ ने कहा कि न्यायपालिका कोई नीति नहीं बनाती और न ही वह यह कहती है कि किसी खास नीति को पालन करना चाहिए। नीतियां या कानून बनाने का काम विधायिका का है। अदालत सरकार को यह नहीं कह सकती है वह यह कानून बनाए या कानून में ये संशोधन करें।

शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणी करते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा गत वर्ष 23 सितंबर को दिए फैसले को दरकिनार कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में राज्य सरकार को हिमाचल प्रदेश टिनेंसी एंड लैंड रिफार्म एक्ट, 1972 की धारा-118 में बदलाव कर वर्ष 1972 से पहले से रहने वालों को खेतिहर और गैर खेतिहर जमीनों को खरीदने की इजाजत देने के लिए कहा था।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि हिमाचल में गैर-कृषक खुद को अलग महसूस करते हैं। गैर कृषक भी राज्य के अहम हिस्सा हैं। उन्हें भी ऐसा लगना चाहिए कि वह भी राज्य के निवासी हैं। हाईकोर्ट ने सरकार को 90 दिनों के भीतर एक्ट में संशोधन करने के लिए कहा था। हाईकोर्ट के इस फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed