फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Supreme Court Judge Justice AK Sikri Statement in High Court of Himachal Pradesh

जस्टिस सिकरी बोले- अपराध की स्थिति के आधार पर तय होती है सजा

Sun, 07 Oct 2018 01:32 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 07 Oct 2018 01:32 PM IST
विज्ञापन
Supreme Court Judge Justice AK Sikri Statement in High Court of Himachal Pradesh

हिमाचल हाईकोर्ट में सातवें लाला अमर चंद सूद मेमोरियल व्याख्यान का आयोजन किया गया। भारत की बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित समानुपातिकता के सिद्धांत पर मानवाधिकारों को संतुलित करने के व्याख्यान में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश डॉ. एके सिकरी ने बतौर मुख्य वक्ता संबोधन किया। न्यायाधीश डॉ. एके सिकरी ने सर्वोच्च न्यायालय की ओर से पारित फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि निजता का सिद्धांत, विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट और आधार कार्ड की वैधता के लिए इस सिद्धांत को ध्यान में रखकर सर्वोच्च न्यायालय ने फैसले पारित किए हैं।

विज्ञापन


उन्होंने एक ही तरह के आपराधिक मामलों में न्यायालयों की ओर से अलग-अलग सजा निर्धारित करने के पीछे इसी सिद्धांत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि न्यायालयों की ओर से एक ही तरह के अपराधों में अलग-अलग सजा निर्धारित करने के पीछे अपराध की स्थिति और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। स्पष्ट तौर पर यह कहा जा सकता है कि यह सिद्धांत किसी अपराध के लिए क्या सजा दी जानी चाहिए, में सहायक सिद्ध होता है।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि मानव अधिकार सर्वोपरि है। समाज में मानव अधिकारों के प्रति संतुलन बनाए रखने के लिए समानुपातिकता के सिद्धांत को अपनाया जाता है। हालांकि भारतीय संविधान में इस सिद्धांत पर मानवाधिकारों को संतुलित करने बाबत किसी भी तरह का उल्लेख नहीं है। न्यायपालिका की ओर से कानून का राज के सिद्धांत को संरक्षित करने के उद्देश्य से इसे उपकरण के तौर सृजित किया है। यह सिद्धांत समाज में संतुलन बनाए रखने के लिए मार्गदर्शन करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह सिद्धांत न केवल न्यायपालिका तक ही सीमित है बल्कि इस सिद्धांत को राज्य सरकार की ओरसे लॉ एंड ऑर्डर को मेंटेन करने और दूसरे तरह के कार्य को करने के लिए इस सिद्धांत को अपनाया जाता है। अमर चंद सूद एक प्रख्यात अधिवक्ता थे। उनका जन्म वर्ष 1906 में हुआ था, उन्होंने वर्ष 1941 में अपनी वकालत शुरू की थी। वर्ष 1974 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के तौर पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त किया गया था। उन्होंने अपनी सौ वर्ष की आयु पूरा करने तक वकालत जारी रखी थी। वर्ष 2009 में 103 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद उनका देहांत हो गया था।


हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने लाला अमर चंद को एक अच्छा इंसान होने के साथ मानवाधिकारों की रक्षा करने के लिए ट्रस्टी के तौर पर काम करने के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह सिद्धांत विवेक का सिद्धांत है और मानवाधिकारों की रक्षा करने के लिए ज्यूडिशरी की ओर से भी इस प्रक्रिया को इस्तेमाल में लाया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed