हमें खाना खिलाने के लिए कई बार भूखे पेट सोई थी मां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैं एक ऐसे गांव में जन्मी हूं, जहां पढ़ाई-लिखाई का कोई महत्व नहीं था। दादाजी अपने पुराने रीति-रिवाज मान- मर्यादाओं को निभाते रहे और बच्चों को पढ़ाई से वंचित रखा। मां ने हमारे लिए बहुत संघर्ष किया।
दादाजी और आस-पड़ोस के लोग कहते तुम्हारे पास एक ही बेटा है, उसे पढ़ाओ, लड़कियों से घर के कामकाज करवाओ और खेतीबाड़ी का काम सिखाओ। मां ने सोचा एक-दो लड़कियां होती तो स्कूल, कॉलेज का खर्च उठा लेते, लेकिन चारों को कैसे पढ़ाएं।
वह इससे दुखी रहने लगीं। इसके बाद माता-पिता ने गांव छोड़ने का फैसला किया और कफोटा स्कूल में दाखिला दिलवाया। पिता ने हमारे साथ कोई भेदभाव नहीं किया। कहते थे कि अगर बेटा स्कूल जाएगा तो चारों बेटियां भी पढ़ेंगी।
मां भूखे पेट ही सोती थी
मैं 9वीं में पढ़ती थी और पिताजी मजदूरी के लिए कहीं दूर गए थे। एक दिन घर में राशन को पैसे कम थे। शाम को मां ने सभी को खाना दिया, लेकिन उनके लिए खाना नहीं बचा। मां भूखे पेट सो गईं। मुझे दुख हुआ।
मां न जाने कितनी बार भूखे पेट सोई होगी। हमारी खुशियों, पढ़ाई के लिए बहुत दुख उठाए। 12वीं के बाद तीनों बहनों का दाखिला कोटशेरा कॉलेज शिमला में करवाया। हम तीनों अपनी-अपनी कक्षा में प्रथम, द्वितीय आते रहे।
सभी प्रोफेसर हमारी प्रशंसा करते। मेरी तीनों साल अमर उजाला अखबार में खबर प्रकाशित हुई। अब में एमए इंग्लिश कर रही हूं।
मां बाप की प्रेरणा से आगे बढ़ी
यह कहानी है रीना जाजलियां की। रीना सिरमौर के जाजला गांव की रहने वाली है। रीना कहती है कि जब माता-पिता ने खेतीबाड़ी का काम छोड़ा तो हमें कुछ भी सामान साथ ले जाने को नहीं मिला। खुद तंगी में रहते, लेकिन हमें किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी। कफोटा में जहां हम रहते थे, वहां अध्यापक ही रहते थे।
बीच में हमारा मकान था। पढ़ाई का माहौल दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा। अगर गांव में ही रहते तो हम अनपढ़ ही रहते। हमारी मां कम पढ़ी लिखी हैं, लेकिन हमें पढ़ाई से वंचित नहीं रखा। मैं आज जो भी हूं अपने मां-बाप और गुरुजनों के आशीर्वाद से हूं।
प्रेरणा
1. छात्रों को वही विषय रखने चाहिए, जिसमें वे रुचि रखते हैं। किसी के कहने या दबाव पर नहीं। अगर वे ऐसा करेंगे तो बाद में उन्हें परेशानियां उठानी पड़ सकती है। सोच समझकर विषय चुनें।
2. अगर कोई छात्र फेल होता है तो स्कूल नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि दूसरी बार टॉपर आने के लक्ष्य के साथ पढ़ाई करें।
3. आज भी हिमाचल के अधिकतर गांवों में अशिक्षा का अंधकार है। यह तभी मिटेगा, जब सभी पढ़ेंगे- लिखेंगे और शिक्षा के प्रति जागरूक होंगे।