फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   success story of reena of sirmaur.

हमें खाना खिलाने के लिए कई बार भूखे पेट सोई थी मां

Mon, 27 Apr 2015 08:40 AM IST
Updated Mon, 27 Apr 2015 08:40 AM IST
विज्ञापन
success story of reena of sirmaur.

मैं एक ऐसे गांव में जन्मी हूं, जहां पढ़ाई-लिखाई का कोई महत्व नहीं था। दादाजी अपने पुराने रीति-रिवाज मान- मर्यादाओं को निभाते रहे और बच्चों को पढ़ाई से वंचित रखा। मां ने हमारे लिए बहुत संघर्ष किया।

विज्ञापन


दादाजी और आस-पड़ोस के लोग कहते तुम्हारे पास एक ही बेटा है, उसे पढ़ाओ, लड़कियों से घर के कामकाज करवाओ और खेतीबाड़ी का काम सिखाओ। मां ने सोचा एक-दो लड़कियां होती तो स्कूल, कॉलेज का खर्च उठा लेते, लेकिन चारों को कैसे पढ़ाएं।
विज्ञापन


वह इससे दुखी रहने लगीं। इसके बाद माता-पिता ने गांव छोड़ने का फैसला किया और कफोटा स्कूल में दाखिला दिलवाया। पिता ने हमारे साथ कोई भेदभाव नहीं किया। कहते थे कि अगर बेटा स्कूल जाएगा तो चारों बेटियां भी पढ़ेंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

मां भूखे पेट ही सोती थी

success story of reena of sirmaur.

मैं 9वीं में पढ़ती थी और पिताजी मजदूरी के लिए कहीं दूर गए थे। एक दिन घर में राशन को पैसे कम थे। शाम को मां ने सभी को खाना दिया, लेकिन उनके लिए खाना नहीं बचा। मां भूखे पेट सो गईं। मुझे दुख हुआ।

मां न जाने कितनी बार भूखे पेट सोई होगी। हमारी खुशियों, पढ़ाई के लिए बहुत दुख उठाए। 12वीं के बाद तीनों बहनों का दाखिला कोटशेरा कॉलेज शिमला में करवाया। हम तीनों अपनी-अपनी कक्षा में प्रथम, द्वितीय आते रहे।

सभी प्रोफेसर हमारी प्रशंसा करते। मेरी तीनों साल अमर उजाला अखबार में खबर प्रकाशित हुई। अब में एमए इंग्लिश कर रही हूं।

मां बाप की प्रेरणा से आगे बढ़ी

success story of reena of sirmaur.

यह कहानी है रीना जाजलियां की। रीना सिरमौर के जाजला गांव की रहने वाली है। रीना कहती है कि जब माता-पिता ने खेतीबाड़ी का काम छोड़ा तो हमें कुछ भी सामान साथ ले जाने को नहीं मिला। खुद तंगी में रहते, लेकिन हमें किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी। कफोटा में जहां हम रहते थे, वहां अध्यापक ही रहते थे।

बीच में हमारा मकान था। पढ़ाई का माहौल दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा। अगर गांव में ही रहते तो हम अनपढ़ ही रहते। हमारी मां कम पढ़ी लिखी हैं, लेकिन हमें पढ़ाई से वंचित नहीं रखा। मैं आज जो भी हूं अपने मां-बाप और गुरुजनों के आशीर्वाद से हूं।

प्रेरणा
1. छात्रों को वही विषय रखने चाहिए, जिसमें वे रुचि रखते हैं। किसी के कहने या दबाव पर नहीं। अगर वे ऐसा करेंगे तो बाद में उन्हें परेशानियां उठानी पड़ सकती है। सोच समझकर विषय चुनें।
2. अगर कोई छात्र फेल होता है तो स्कूल नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि दूसरी बार टॉपर आने के लक्ष्य के साथ पढ़ाई करें।
3. आज भी हिमाचल के अधिकतर गांवों में अशिक्षा का अंधकार है। यह तभी मिटेगा, जब सभी पढ़ेंगे- लिखेंगे और शिक्षा के प्रति जागरूक होंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed