{"_id":"64885d8ab07e84de6e026368","slug":"succes-story-pratibha-appointed-assistant-professor-political-science-2023-06-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Success Story: मन की आंखों से प्रतिभा ने देखे सपने और भरी सफलता की उड़ान, बनीं अस्सिटेंट प्रोफेसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Success Story: मन की आंखों से प्रतिभा ने देखे सपने और भरी सफलता की उड़ान, बनीं अस्सिटेंट प्रोफेसर
Tue, 13 Jun 2023 08:08 PM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Tue, 13 Jun 2023 08:08 PM IST
सार
प्रतिभा का सहायक प्रोफेसर बनना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, उन्होंने जन्म से दिव्यांग होने के बावजूद छोटे-छोटे सपने देखने शुरू किए और उन्हें पूरा करने की जिद्द मन में ठान ली।
विज्ञापन
प्रतिभा ठाकुर।
- फोटो : संवाद
विस्तार
जन्म से आखों से नहीं देख पाने वाली बेटी जब मन की आंखों से सपने देखना शुरू कर दे तो परिजनों की उम्मीदों को पंख लगना स्वाभाविक है। इसी बात को सही साबित किया है मंडी के सदर क्षेत्र की तरनोह पंचायत की प्रतिभा ठाकुर ने। प्रतिभा का चयन राजनीतिक विज्ञान की अस्सिटेंट प्रोफेसर के पद पर हुआ है। वह प्रदेश विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान विषय पर पीएचडी कर रही हैं।
विज्ञापन
प्रतिभा का सहायक प्रोफेसर बनना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, उन्होंने जन्म से दिव्यांग होने के बावजूद छोटे-छोटे सपने देखने शुरू किए और उन्हें पूरा करने की जिद्द मन में ठान ली। पिता खेम चंद शास्त्री बताते हैं कि प्रतिभा का बचपन में बहुत इलाज करवाया, मगर आंखों की रोशनी नहीं लौट सकी। स्कूल जाने की जिद्द की तो पूरा परिवार सोचने के लिए मजबूर हो गया। स्कूल भेजें तो कैसे।
विज्ञापन
घर में ही पढ़ाने की व्यवस्था की गई और पांचवीं कक्षा की परीक्षा स्थानीय स्कूल नेरन में दिलवाई। इसमें अच्छे अंकों के साथ पास हो गईं। इसके बाद उसे छठी कक्षा में दाखिल करवाया तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्रतिभा ने बरयारा स्कूल से जमा दो, मंडी कॉलेज से बीए, एमए, बीएड और एमएड प्रथम श्रेणी में पास की।
विज्ञापन
इसके बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में 2020 में प्रतिभा का चयन पीएचडी राजनीतिक शास्त्र के लिए हुआ। खेमचंद शास्त्री ने बताया कि प्रतिभा की बचपन से ही शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं देने की इच्छा थी। प्रतिभा दिव्यांगता को अपनी राह का रोड़ा नहीं मानती हैं। प्रतिभा ने सफलता का श्रेय परिजनों, प्रो. अजय श्रीवास्तव, प्रो. महेंद्र यादव, प्रो. चमन लाल क्रांति को दिया।