कृषि विभाग ने किसानों पर थोपी शर्त, नहीं मिल पाएगी सब्सिडी
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कृषि महकमे ने प्रदेश के किसानों पर शर्त थोप दी है कि अगर उन्होंने विभाग की ओर से चयनित कंपनियों से पॉवर टिल्लर नहीं खरीदे तो उन्हें सब्सिडी से हाथ धोना पड़ेगा। महकमे ने चुनिंदा कंपनियों के उत्पादों को खरीद के लिए सूचीबद्ध भी कर दिया है।
अब आशंका यह जताई जा रही है कि क्या महकमा कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए तो नहीं उक्त शर्त किसानों पर थोप रहा। सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि बागवानी विभाग ने ऐसी कोई शर्त बागवानों के लिए नहीं लगाई है।
यानी दो महकमों में पॉवर टिल्लर सब्सिडी दिलाने को अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। हिमाचल में गेहूं, मक्की, सब्जियां और सामान्य फसलें उगाने वाले किसानों के लिए सरकार पॉवर टिल्लर खरीदने के लिए बेशक सब्सिडी योजना लाई, मगर इसका लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है।
दूसरी ओर, बागवानी महकमे में ऐसी कोई शर्त नहीं हैं। सेब या अन्य फलों को उगाने वाले बागवानों की ओर से खरीदे गए तमाम तरह के पॉवर टिल्लरों पर सब्सिडी दी जा रही है। इससे प्रदेश में मुश्किल से खेतीबाड़ी से गुजारा करने वाले किसान परेशान हैं।
गरीब किसान सब्सिडी पाने को दरबदर
कई किसानों ने पॉवर टिल्लर खरीदने के बाद इस पर देय सब्सिडी के लिए आवेदन किए, मगर ये खारिज किए जा रहे हैं। सब्सिडी पाने को किसान दरबदर हो रहे हैं।
विभाग तर्क यह दे रहा है कि उक्त पॉवर टिल्लर उन कंपनियों के नहीं खरीदे गए हैं, जिनको कृषि विभाग ने सूचीबद्ध किया है। इससे बड़ी संख्या में किसान परेशान हैं।
कृषि निदेशक ने दिया तर्क
राज्य कृषि विभाग के निदेशक डा. देस राज का कहना है कि किसान गुणवत्तायुक्त पॉवर टिल्लर ही खरीदें। यह फैसला इसी वजह से लिया गया है।
उन्होंने कहा कि कई बार किसान चाइनीज कंपनियों के पॉवर टिल्लर खरीद लेते हैं। ये खराब हो जाते हैं। इसलिए ऐसी कंपनियों के पॉवर टिल्लर ही खरीदे जा सकेंगे, जो सूची में हैं।