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हिमाचल: कॉलेजों में परीक्षाएं करवाने के हक में विद्यार्थी और प्रिंसिपल, शिक्षा मंत्री से किया संवाद

Tue, 08 Jun 2021 10:01 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 08 Jun 2021 10:01 PM IST
सार

राज्य सचिवालय से की गई वर्चुअल बैठक में प्रदेश भर से करीब 700 शिक्षक, प्रिंसिपल, अभिभावक, विद्यार्थी और विभागीय अधिकारी शामिल हुए। इनमें कॉलेजों में परीक्षाएं करवाने की मांग की गई। 

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Students and Principal in favor of conducting examinations in colleges of himachal
परीक्षा( सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के कॉलेजों में परीक्षाएं होनी चाहिए। अधिकांश कॉलेज प्रिंसिपल और विद्यार्थी इसके हक में है। मंगलवार को शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर के साथ हुए ऑनलाइन संवाद में अधिकांश शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों ने हालात ठीक होने पर परीक्षाएं करवाने की पैरवी की। 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद फर्स्ट ईयर के दाखिलें शुरू करने की मांग भी इस दौरान रखी गई। कुछ जिलों से यूजी के पहले और दूसरे साल के विद्यार्थियों को प्रमोट करने और फाइनल ईयर की परीक्षाएं करवाने की मांग की गई। राज्य सचिवालय से की गई वर्चुअल बैठक में प्रदेश भर से करीब 700 शिक्षक, प्रिंसिपल, अभिभावक, विद्यार्थी और विभागीय अधिकारी शामिल हुए।

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शिक्षा मंत्री ने हर जिले से कुछ प्रिंसिपलों, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों से संवाद किया। सभी ने एकमत होकर फाइनल ईयर की परीक्षाएं अनिवार्य तौर पर करवाने की वकालत की। सुझाव दिए गए कि अगर आने वाले दिनों में हालात ठीक होते हैं तो फर्स्ट और सेकेंड ईयर के विद्यार्थियों की परीक्षाएं भी ली जाएं। एक दिन में एक ही विषय की परीक्षा होनी चाहिए, जिससे उचित शारीरिक दूरी बनी रहे। करीब दो घंटे तक चले संवाद के बाद शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि सभी हितधारकों के सुझाव आने के बाद छात्र हित में उचित फैसला लिया जाएगा। 
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मंत्रिमंडल लेगा परीक्षाओं को लेकर अंतिम फैसला: गोविंद
शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा है कि स्नातक स्तर की परीक्षाएं करवाने के लिए विद्यार्थियों, अभिभावकों और महाविद्यालयों के प्राध्यापकों के सुझावों का गहन आंकलन किया जाएगा। प्राप्त हुए सुझावों से संबंधित रिपोर्ट तैयार कर मंत्रिमंडल के समक्ष रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों से शिक्षकों की ओर से विद्यार्थियों को विषय संबंधी पढ़ाई करवाई जा रही है। ऑनलाइन शिक्षा से जुड़ी कमियों को दूर करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों के दृष्टिगत शिक्षा में विशेष प्रयास करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में शिक्षा सचिव राजीव शर्मा, विशेष सचिव शिक्षा राखी काहलो, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. अमरजीत शर्मा, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति सिकंदर कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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बच्चों को महामारी से बचाने के लिए विभाग पर अधिक जिम्मेवारी
 शिक्षा मंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर का 18 वर्ष से कम आयु वालों पर अधिक असर होने की बातें सामने आ रही है। ऐसे में शिक्षा विभाग की जिम्मेवारियां बहुत अधिक बढ़ने वाली हैं। विद्यार्थियों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए जागरूकता अभियान में तेजी लाई जाएगी।

संक्रमितों और उनके परिजनों से फोन पर बनाए रखे संपर्क
शिक्षा मंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमित होने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों और गैर शिक्षकों की चिंता करना सबसे बड़ी जिम्मेवारी है। ऐसे में हमें संक्रमित होने वालों का अधिक ख्याल रखने के लिए उनसे फोन पर बात करनी चाहिए। उनके परिवार में कोई परेशानी हो तो उसे दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर विभाग के किसी कर्मी की संक्रमण के कारण मृत्यु हो गई है तो उनके परिवार का भी ख्याल रखना होगा। समाज से निराशा को दूर करने के लिए यह बहुत अधिक आवश्यक है।

बंदिशें हटते ही परीक्षा करवाने के लिए एचपीयू तैयार

शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने यूजी की परीक्षा को लेकर मंगलवार को विवि के आला अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। मंत्री ने कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार, परीक्षा नियंत्रक डॉ. जेएस नेगी और अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. अरविंद कालिया  को बुलाया था।  इस दौरान कोरोना संक्रमण के घट रहे मामलों को देखते हुए स्नातक डिग्री कोर्स की परीक्षाएं करवाने पर मंथन हुआ।  अधिकारियों ने शिक्षा मंत्री से कहा कि विवि यूजी के तीनों वर्ष या सिर्फ अंतिम वर्ष की परीक्षा आदेश होते ही करवाने को तैयार है। विश्वविद्यालय जून अंत से परीक्षा करवाने की व्यवस्था कर लेगा। 

अधिकारियों ने साफ किया कि अनुकुल, सुरक्षित माहौल, परिवहन सेवाएं शुरू होने और कोरोना कर्फ्यू की बंदिशें हटने पर परीक्षा करवा लेगा। इसके लिए प्रश्नपत्र सहित हर तरह की तैयारियां लगभग पूरी हैं। इसमें कहा गया कि यदि सरकार सिर्फ फाइनल ईयर की परीक्षा करवाने के आदेश देगी तो परीक्षाएं 30 कार्य दिवस में निपटा दी जाएंगी। अधिकारियों ने कहा कि यूजी के तीनों वर्ष के करीब सवा लाख छात्र-छात्राओं की पूरी परीक्षाएं करवाने को करीब 45  दिन लग जाएंगे। इनके परिणाम तैयार करने और घोषित करने में कम से कम डेढ़ माह लग जाएगा। 

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