जस्टिस सूर्यकांत को नहीं भूला पाएगा पंजाब-हरियाणा
2004 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का जज बनने वाले जस्टिस सूर्यकांत 14 वर्ष अपनी सेवाएं देने के बाद अब हिमाचल प्रदेश के चीफ जस्टिस का पद संभालने जा रहे हैं। इस दौरान पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में उनके द्वारा निभाई गई भूमिका को शायद ही कोई भूल पाएगा। खासतौर पर पंचकूला में हुई हिंसा को नियंत्रित करने में फुल बेंच में शामिल होकर स्थिति से निपटने के लिए जारी किए गए आदेशों के चलते ही हिंसा विकराल रूप धारण नहीं कर पाई थी।
जस्टिस सूर्यकांत ने समाज के हित में कई फैसले दिए जिसके चलते वे लोकप्रिय जजों में शामिल हैं। भूमि अधिग्रहण को लेकर जस्टिस सूर्यकांत के फैसले से बड़ी संख्या में किसान लाभान्वित हुए। जस्टिस सूर्यकांत ने अधिग्रहण की अधिसूचना के बाद 5 वर्ष की अवधि की सरकार को मोहलत दी थी और इस अवधि के बाद किसानों को हक दिया था कि वे अपनी जमीन वापस लेने केलिए दावा कर सकते हैं। पीजीआई के मरीजों और पीयू के छात्रों सहित शहर वासियों को रात में अच्छा और स्वच्छ भोजन मिले इसे सुनिश्चित करने के लिए इसे जनहित याचिका के तौर पर उन्होंने जस्टिस अजय तिवारी के साथ सुना।
पंचकूला हिंसा मामले में सुनवाई करने वाली फुल पीठ में शामिल थे जस्टिस
इसके साथ ही स्कूली बच्चों की बसों में सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर लगाने वाली खंडपीठ में शामिल थे। इसके बाद ज्यादातर बसों में स्पीड गवर्नर लगाए गए। पर्यावरण से बेहद प्रेम रखने वाले जस्टिस सूर्यकांत अक्सर ही शहर में पर्यावरण से जुड़े आयोजनों का हिस्सा बनते दिखाई दे जाते हैं।
14 साल में उन्होंने करीब 50 हजार मामलों का निपटारा किया है जो अपने आप में बड़ी संख्या है। इसके साथ ही जस्टिस सूर्यकांत को उनके स्मूथ नेचर के लिए जाना जाता है।जब राम रहीम की सजा को लेकर ट्रायल कोर्ट में फैसला आना था तो जो फुल बेंच बनाई गई थी उसमें जस्टिस सूर्यकांत भी शामिल थे। इस दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने ही कड़े आदेश पारित किए जिसके चलते ही पंचकूला सहित हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ जलने से बच गए।