एक वक्त लगा अब बचना मुश्किल, पर देवदूत बन वायुसेना ने बचा लिया
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भारी बर्फबारी में लाहौल-स्पीति के विभिन्न हिस्सों में फंसे करीब 431 लोगों को सुरक्षित कुल्लू व मनाली पहुंचाया गया। नौ विदेशियों समेत 74 लोगों को लाहौल-स्पीति की विभिन्न जगहों से वायु सेना के हेलीकॉप्टरों से एयरलिफ्ट कर कुल्लू और मनाली पहुंचाया, जबकि रोहतांग टनल के रास्ते करीब 350 लोग मनाली पहुंचे। वहीं, बीआरओ की टीम ने भी पैदल ही कोकसर से सात लोगों को सुरक्षित मनाली पहुंचाया।
वायुसेना पहले तीन हेलीकॉप्टरों की मदद ले रही थी, वहीं अब दो चीता हेलीकॉप्टर भी रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल किए गए हैं। चंबा जिले के होली इलाके में पिछले पांच दिनों से फंसे छात्र-छात्राओं और स्टाफ सदस्यों को रेस्क्यू कर लिया गया है। सुबह नौ बजे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। 416 छात्र-छात्राओं और 321 स्टाफ सदस्यों को पहले पैदल और फिर गाड़ियों के जरिये जिला मुख्यालय पहुंचाया गया।
वायुसेना के जांबाज अधिकारियों ने तीन बच्चों समेत दस लोगों को एयरलिफ्ट किया
स्पीति के छोटा दड़ा में बर्फ के बीच बिना लैंडिंग ही वायुसेना के जांबाज अधिकारियों ने तीन बच्चों समेत दस लोगों को एयरलिफ्ट किया। यहां हेलीकॉप्टर को लैंड नहीं किया जा सकता था। छतड़ू से निकाले गए 4 लोगों को मनाली के निकट सासे हेलीपैड पर उतारा। वायु सेना के ऑपरेशन को विंग कमांडर एसके आहुजा कोऑर्डिनेट कर रहे हैं, जबकि रोहतांग टनल होकर बसों और निजी वाहनों से करीब 350 लोग मनाली पहुंचे।
बीआरओ की टीम ने कैप्टन इशान के नेतृत्व में कोकसर से बुधवार रात्रि पैदल ही रेस्क्यू अभियान चलाकर सात लोगों को सुरक्षित मनाली पहुंचाया। करीब 12 घंटे तक कई फीट बर्फ में बीआरओ जवान और अधिकारियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, जिन्हें मनाली में उपचार दिया गया।
रोहतांग टनल होकर छह एचआरटीसी बसें, एक निजी बस, 70 एलएमवी वाहन मनाली पहुंचे। जिलाधीश कुल्लू यूनुस ने बताया कि कुल्लू पहुंचाए लोगों को क्षेत्रीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। बीआरओ कमांडर कर्नल एके अवस्थी ने बताया कि बीआरओ टीम ने सात लोगों को कोकसर से सुरक्षित मनाली पहुंचाया।
देवदूत बन वायुसेना ने बचा लिया
यहां के नागरिक किए रेस्क्यू- जर्मन के तीन, नेपाल के छह, केरल के दो, दिल्ली के 11, पंजाब के दो, गुजरात के तीन, महाराष्ट्र के आठ, बेंगलुरु के दो, गुजरात के पांच, अरुणाचल के दो, बिहार का एक, देहरादून के पांच, लुधियाना के चार, हरियाणा के चार, जम्मू-कश्मीर का एक, कुल्लू के दो, सिरमौर का एक, बिलासपुर का एक, मंडी के तीन, यूपी के पांच, हैदराबाद का एक, कोलकाता का एक और चंडीगढ़ के एक व्यक्ति को एयरलिफ्ट किया गया।
लाहौल स्पीति में भारी बर्फबारी के बीच फंसे केलांग-काजा मार्ग में छोटा दड़ा से रेस्क्यू कर हेलीकॉप्टर की मदद से कुल्लू लाए गए पर्यटकों ने अब राहत की सांस ली है। कुल्लू पहुंचने पर करीब पांच दिन बाद दिल्ली, गुजरात, देहरादून और बेंगलुरु के पर्यटकों ने अपने परिजनों से बातचीत की। परिजनों से बात करते समय इनकी आंखें छलक पड़ीं।
गुजरात के बड़ौदा की रहने वाली 28 साल की दीक्षा ने कहा कि वह परिवार के साथ लाहौल के चंद्रताल घूमने गई थीं। इस दौरान तीन बच्चों के साथ 22 सितंबर को लौट रहे थे कि अचानक बर्फबारी से वे छोटा दड़ा में फंस गए। बर्फबारी कई घंटों तक चलती रही। छोटा दड़ा में होटल के दो कमरों में करीब 50 लोगों को रुकना पड़ा।
फूड पैकेट फेंके जाने के बाद जिंदगी की आस जगी
इनमें तीन बच्चे भी शामिल थे। दीक्षा ने कहा कि एक-एक कमरे में 25-25 लोग रुके। बाहर बर्फ के ढेर थे। नेटवर्क ठप और उन्हें कड़ाके की ठंड के बीच एक समय लगा कि अब बचना मुश्किल है। लेकिन वायुसेना के हेलीकॉप्टर देवदूत बनकर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर से फूड पैकेट फेंके जाने के बाद जिंदगी की आस जगी।
इस बीच बर्फ को पिघलाकर पानी पिया और अपनी जान बचाई। बेंगलुरु की सुष्मिता ने कहा कि उनकी शादी हाल ही में हुई है। बाइक पर चंद्रताल से मनाली की तरफ आ रहे थे। बर्फबारी से वे छोटा दड़ा में फंस गए।
उन्होंने कहा कि होटल में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कुल्लू आकर उनकी सात दिन बाद परिजनों से बात हुई है, जबकि परिजनों ने थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी है। उन्होंने कहा कि अभी तक छोटा दड़ा में कई लोग फंसे हुए हैं।