प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन पर यहां हो रहा मंथन, ये वैज्ञानिक ले रहे भाग
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राजधानी शिमला में पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से हिमाचल प्रदेश विज्ञान प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद् ने शुक्रवार से प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन को अर्ध शुष्क और रेगिस्तान क्षेत्रों और ग्रिड आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली (जीआरआईडीएसएस ) पर दो दिन की एनवीएस क्षेत्रीय मूल्यांकन और प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू हुई।
पर्यावरण मंत्रालय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रधान सलाहकार डॉ. आनंदी सुब्रहमण्यम ने इसका शुभारंभ किया। कार्यशाला में चंडीगढ़ पंजाब, राजस्थान, और दिल्ली में स्थित नौ एनवीएस केंद्रों से 40 एमओईएफसीसी समन्वयक और वैज्ञनिक इसमें भाग ले रहे हैं। मुख्य अतिथि डॉ. आनंदी सुब्रहमण्यम ने कहा कि जीएसडीपी प्रशिक्षण से राज्यों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
उन्होंने अधिकारियों, वैज्ञानिकों और एनवीएस संसाधन भागीदारों जीएसडीपी भागीदारों के एक वर्ष के कार्य के लिए प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पैरा वर्ग्रीकरण के तीन सौ से अधिक और अपशिष्ट प्रबंधन के 200 से अधिक और वायु जल प्रबंधन 150 से अधिक है। उन्होंने इस दिशा में उठाए गए कदमों और प्रयासों को लेकर हिमकोस्ट के सदस्य सचिव कुणाल सत्यार्थी और एजीसैक टीम की सराहना की।
कार्यशाला में जैम्स मैथ्यू , राष्ट्रीय समन्वयक कुमार रजनीश, डा. बृजेश सकलानी, डा. राहित चौहान, अनिरुद्ध चंद्र मोहन सिंह, शालिनी चौहान वैज्ञानिक प्रशिक्षण देंगे। कार्यशाला में बताया गया कि ग्रिड्स योजना में भारत में 76 एनवीएस केंद्रों में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को एक एनवीएस हब चुना जाता है, हिमाचल प्रदेश एनवीएस हब ने प्रदेश में कुल्लू जिले का चयन किया है। अवन संसाधन, नदियों के साथ प्राकृतिक संसाधनों का मानचित्रण किया गया है।