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हिमाचल में जहां सेब उगते थे, अब वहां पैदा हो रहे आम

Fri, 19 Jul 2019 10:33 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 19 Jul 2019 10:33 AM IST
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Standard apple species belt shifted to higher belt in himachal due to climate change

हिमाचल में जहां पहले रॉयल और गोल्डन सेब की किस्में उगती थीं, वहां अब आम पैदा हो रहा है। जलवायु में बदलाव के कारण सेब की स्टैंडर्ड किस्म की बेल्ट लगातार ऊपर की ओर सरक रही है। कुल्लू में ब्यास किनारे अब हिमाचल की परंपरागत सेब किस्में नहीं उग रही हैं।

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लाहौल स्पीति में जहां ज्यादा बर्फ गिरने और ठंड के कारण सेब नहीं होता था, वहां अब स्टैंडर्ड सेब किस्म रॉयल और गोल्डन उग रही हैं। यह खुलासा शिमला में जलवायु परिवर्तन पर चल रही एक कार्यशाला में विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने किया है। इस तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन शुक्रवार को होगा।  
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हिमाचल प्रदेश वन अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. एसएस सामंत ने इस कार्यशाला में कहा कि कुल्लू के नगवाईं क्षेत्र में 15-20 साल पहले जहां सेब के फल उगते थे, वहां अब गरमी बढ़ जाने के कारण परंपरागत किस्मों को उगाना मुश्किल हो गया है।
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कटराईं के पास पनडोबी एक जगह है, वहां लोगों ने अनार और नेक्ट्रिन लगाना शुरू कर दिए हैं। अब वहां आम, अमरूद और पपीते उगने शुरू हो गए हैं। पहले ये ठंड से मर जाते थे।

वहां औषधीय पौधा अश्वगंधा भी उग गया है। सेब का लाहौल और स्पीति वैली में होना भी जलवायु परिवर्तन का सूचक है। पहले यहां अत्यधिक बर्फ गिरती थी, जिससे सेब के पेड़ टूट जाते थे। मगर अब वैसी बर्फ नहीं गिर रही है।

इससे सेब उगना शुरू हो गया है। एवालांच प्रोन एरिया में जहां अंतिम ट्री लाइन से ऊपर के इलाके हैं, वहां भोजपत्र के पौधे उगने शुरू हो गए हैं। ये आखिरी ट्री लाइन पर ही उगते हैं। जस्पा, दारचा जैसे इलाकों में इन्हें देखा जा सकता है। 

अब 1200 मीटर ऊंचाई पर नहीं हो रही सेब की स्टैंडर्ड किस्म  

Standard apple species belt shifted to higher belt in himachal due to climate change

डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के वैज्ञानिक डॉ. एसके भारद्वाज ने बताया कि हिमाचल में सेब की परंपरागत किस्तें रॉयल और गोल्डन हैं। पहले ये किस्में 1200 से 1500 मीटर ऊंचाई तक हो जाती थीं। अब 1500 मीटर से ऊपर हो रही हैं।

अब 1800-1900 मीटर की ऊंचाई वाला क्षेत्र इसके लिए मार्जिनल एरिया हो गया है। सेब की इस किस्म की बेल्ट 2400-2500 मीटर ऊपर चली गई हैं। हालांकि, निचले क्षेत्रों में सेब बागवान अब लो चिलिंग किस्में लगा रहे हैं।

ये काफी नीचे तक यानी हमीरपुर, बिलासपुर तक उगने लगी हैं। मगर स्टैंडर्ड किस्मेें तो ऊपर की ओर ही सरक रही हैं। यही स्थिति रही तो आने वाले वक्त में इनके अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाएगा। हालांकि, दूसरी ओर सांगला से छितकुल तक बर्फ से कवर कुछ एरिया ओपन हो गए हैं।

वहां सेब के बगीचे लग गए हैं। यहां स्टैंडर्ड किस्में उग रही हैं। यह सब जलवायु परिवर्तन का असर है। आने वाले वक्त में हमारे किसानों-बागवानों को फसलों-फलों की अल्टरनेट किस्में भी उगानी होंगी। किसान ऐसी तमाम किस्मों को अडॉप्ट भी कर रहे हैं। 

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