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तस्वीरें: स्क्वाड्रन लीडर मनोज राणा ने माइनस 30 डिग्री में पार किया चादर ट्रैक

Tue, 09 Feb 2021 11:36 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, उमेश कुमार शर्मा, हमीरपुर
अमर उजाला नेटवर्क, उमेश कुमार शर्मा, हमीरपुर Published by: Krishan Singh Updated Tue, 09 Feb 2021 11:36 AM IST
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Squadron leader Manoj Rana crossed chadar track in minus 30 degrees
मनोज राणा ने चादर ट्रैक पर ट्रैकिंग पूरी की। - फोटो : अमर उजाला

माइनस 30 डिग्री तापमान के बीच सैनिक कल्याण विभाग हमीरपुर के उपनिदेशक 47 साल के स्क्वाड्रन लीडर मनोज राणा ने लद्दाख के जोखिमपूर्ण चादर ट्रैक पर ट्रैकिंग पूरी की। इस मकाम को हासिल करते समय उनके दल में सात अन्य लोग भी शामिल रहे। 62 किलोमीटर के इस ट्रैक पर लद्दाख पर्यटन निगम के सौजन्य से ट्रैकिंग करवाई जाती है, लेकिन इस ट्रैक को पूरा करने का हौसला हर किसी में नहीं होता है।

Squadron leader Manoj Rana crossed chadar track in minus 30 degrees
- फोटो : अमर उजाला

मनोज राणा की अगुवाई में कैप्टन मंजुला राणा, मुंबई से डॉ. ममथा लाला, मरिशा साह, दीपक शिंदे, अजय खानापुरी, दिल्ली से सेवानिवृत्त डीएसपी जसविंद्र सिंह और शशांक ने नौ दिनों में इस ट्रैक को पूरा किया है। चादर ट्रैक लद्दाख सहित दुनिया के खतरनाक ट्रैक में से एक है।




 
Squadron leader Manoj Rana crossed chadar track in minus 30 degrees
- फोटो : अमर उजाला

यहां पर बहने वाली जंस्कार नदी सर्दियों में जम जाती है। इस नदी के ऊपर से ही यह ट्रैकिंग होती है। नदी के ऊपर पांच फीट तक बर्फ जमी होती है, जबकि नीचे पानी बहता है। ऐसे में यदि बर्फ कहीं से पिघलती है तो हादसा होने का डर भी बना रहता है।



 
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Squadron leader Manoj Rana crossed chadar track in minus 30 degrees
- फोटो : अमर उजाला

राणा की अगुवाई में दल 16 जनवरी को लद्दाख पहुंचा और तीन दिन तक तैयारी की। इसके बाद चौथे दिन गाड़ी में 80 किलोमीटर का सफर कर चिलिंग नाम जगह पहुंचे, जहां से यह ट्रैक शुरू होता है। इसके बाद अगले दिन शिंगरा कोमा में ठहराव किया।

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Squadron leader Manoj Rana crossed chadar track in minus 30 degrees
- फोटो : अमर उजाला

अगले दिन योकोमा पहुंचे। जहां ठहराव के बाद ट्रैक के अंतिम पड़ाव नेराक पहुंचे। यहां से फिर वापस आए और कुल नौ दिन में यह ट्रैक पूरा किया। 55 वर्षीय डॉ. ममथा लाला अंटार्कटिका में भी ट्रैकिंग कर चुकी हैं और माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक भी गई हैं। 

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