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Shimla News: ओलावृष्टि के नुकसान से बचाव के लिए करें फफूंदनाशकों का छिड़काव

Tue, 31 Mar 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 31 Mar 2026 11:59 PM IST
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Spray fungicides to prevent hail damage.
प्रभावित बगीचों में 200 लीटर पानी में एक किलो यूरिया घोलकर छिड़काव करने करने की सिफारिश
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कुमारसैन क्षेत्र में भी ओलावृष्टि से हुई है भारी क्षति
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले के ऊपरी इलाकों में सोमवार को हुई ओलावृष्टि से सेब के बगीचों को नुकसान हुआ है। सबसे ज्यादा प्रभावित कुमारसैन क्षेत्र के बगीचे हुए हैं। ऐसी स्थिति में कृषि वैज्ञानिकों ने बगीचों में समय रहते फफूंदनाशकों का छिड़काव करने की सिफारिश की है। इसके अलावा ओलावृष्टि से प्रभावित बगीचों में 200 लीटर पानी में एक किलो यूरिया घोलकर छिड़काव कर सकते हैं।

कुमारसैन के बागवान सुरेंद्र भलैक ने बताया कि यह सीजन में दूसरी बार ओलावृष्टि हुई है लेकिन इस बार बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। पहले ही सेब के पेड़ों में कम फूल आ रहे थे, ओले पड़ने से वह भी झड़ गए हैं। वहीं जिन पेड़ों में फ्रूट सेट होना शुरू हो गया था वह ओलों से कट गया है और पत्तियां भी पूरी तरह से कट गईं हैं। इसके अलावा एंटी हेल नेट भी टूट गए हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र की प्रभारी डॉ. उषा शर्मा ने बागवानों को सलाह दी है कि बगीचे में स्वच्छता बनाए रखें, उचित जल निकास सुनिश्चित करें और छिड़काव साफ मौसम में ही करें। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते उचित प्रबंधन नहीं किया तो यह नुकसान आने वाली फसल को भी प्रभावित कर सकता है। बागवानी विभाग के अनुसार ओलावृष्टि के बाद सबसे पहला कदम प्रभावित पेड़ों का निरीक्षण करना है। इसमें जिन टहनियों को अधिक क्षति हुई है उन्हें साफ-सुथरे औजारों से काटकर हटा देना चाहिए। इससे संक्रमण फैलने का खतरा कम होता है और पेड़ को नई वृद्धि के लिए प्रोत्साहन मिलता है। इसके अलावा कृषि वैज्ञानिकों की ओर से बागवानों को सलाह दी जाती है कि ओलावृष्टि के 24 घंटे के भीतर कार्बेन्डाजिम 100 ग्राम या मैन्कोजेब 600 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें ताकि घावों के माध्यम से होने वाले फफूंदजनित रोगों को रोका जा सके। एक सप्ताह के बाद एक किलोग्राम यूरिया 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें जिससे पौधों का तनाव कम हो और विभिन्न अवस्थाओं में फल धारण एवं पौधों की रिकवरी में सुधार हो।
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कोट
जलवायु परिवर्तन के चलते इस तरह की मौसमी घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए बागवानों को पहले से ही एंटी-हेल नेट (ओलारोधी जाल) जैसी सुरक्षात्मक तकनीकों को अपनाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। ओलावृष्टि से हुए नुकसान से बचाव के लिए बागवान, विभाग की ई उद्यान वेबसाइट पर दिए स्प्रे शेड्यूल को अपना सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए बागवान अपने नजदीकी उद्यान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।
-सुदर्शना नेगी, उप निदेशक, उद्यान विभाग शिमला
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