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Shimla News: कंडम हो रहे वाहनों पर खर्च कर दिए 2.86 लाख, सदन में पेश कर दिया गलत रिकॉर्ड
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अमर उजाला एक्सक्लूसिव...
आरटीआई सूचना में सामने आया नगर निगम का कारनामा, कंडम हो रही गाड़ियों की मरम्मत पर फूंक दिए लाखों रुपये
एक गाड़ी पर 1.70 लाख, दूसरी पर खर्चा एक लाख रुपये
सदन में पेश की गई रिपोर्ट में दिखाया गया कम खर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। चंद दिन बाद कंडम हो रही सरकारी गाड़ियों पर नगर निगम ने रिपेयर के नाम पर लाखों रुपये फूंक डाले। एक गाड़ी पर 1.70 लाख तो दूसरी पर एक लाख रुपया खर्च कर दिया। फिर चंद दिन बाद पासिंग अवधि खत्म बताकर इन्हें सड़क पर खड़ा कर दिया।
निगम में जब इस पर सवाल उठे तो सदन में गलत रिकॉर्ड पेश कर पार्षदों को शांत कर दिया गया। अभी मामला शांत ही हुआ था कि आरटीआई से मिली जानकारी ने नगर निगम की कार्यप्रणाली को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। इसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। निगम सदन में पेश किए रिकॉर्ड के अनुसार पांच वाहनों की रिपेयर पर करीब 2.86 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। वहीं आरटीआई से मिली सूचना के अनुसार इतना खर्च तो सिर्फ दो गाड़ियों पर ही हुआ था। पांच गाड़ियों का खर्च चार लाख रुपये से भी ज्यादा है।
बड़ा सवाल यह भी है कि जब चंद दिन बाद यह गाड़ियां खड़ी होनी थीं तो इन पर पानी की तरह जनता का पैसा क्यों बहाया गया। मामला शहर में कूड़ा उठाने के लिए चलाई जा रहीं गाड़ियों से जुड़ा है। वार्डाें की संकरी सड़कों से कूड़ा उठाने के लिए नगर निगम ने कई पिकअप वाहन साल 2010 में खरीदे थे। निगम प्रशासन के अनुसार मार्च 2026 में इनकी पासिंग अवधि खत्म हो चुकी है। सरकार के निर्देशानुसार 15 साल बाद किसी भी सरकारी वाहन को नहीं चला सकते।
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सदन में भाजपा ने मांगा था रिकॉर्ड
बीते महीने भाजपा पार्षद कमलेश मेहता ने पांच गाड़ियों का रिकॉर्ड सदन में मांगा था। इसमें निगम से पिछले सात महीने के दौरान इन वाहनों पर किए गए खर्च का ब्योरा मांगा गया था। निगम प्रशासन ने सदन में रिकॉर्ड पेश कर बताया कि कुल 2.86 लाख रुपये इन पांच वाहनों पर सात महीने में खर्च किए गए हैं। निगम ने यह भी माना कि यह कंडम हो गई हैं और अब इन्हें खड़ा कर दिया गया है।
आरटीआई सूचना से चौंकाने वाला खुलासा
आरटीआई कार्यकर्ता पवन कुमार ने नगर निगम से इन्हीं पांच गाड़ियों की आरटीआई से सूचना मांगी थी। सदन की तरह बीते सात महीनों का खर्च का ब्योरा मांगा गया लेकिन यहां जो सूचना मिली वह सदन से बिल्कुल अलग दी गई। गाड़ी नंबर एचपी 7 बी 0751 पर निगम ने कंडम होने से पहले सात महीने में 1.70 लाख रुपये खर्चे। सदन में इसके सिर्फ 74,170 रुपये खर्च करने की जानकारी दी गई। इसी तरह गाड़ी नंबर एचपी 7 बी 0758 पर निगम ने रिपेयर के लिए एक लाख रुपये खर्च किए। सदन में पेश रिपोर्ट के अनुसार इसका खर्च 70580 रुपये दर्शाया है। आरटीआई में कई गाड़ियों के खर्च का ब्योरा तो दिया है लेकिन इसके पूरे बिल नहीं दिए। इस पर भी अब सवाल उठ रहे हैं। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा का कहना है कि पहले आरटीआई से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड देने के निर्देश दिए हैं। सदन और आरटीआई के बिल में अंतर है, इसे चेक किया जाएगा।
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आरटीआई सूचना में सामने आया नगर निगम का कारनामा, कंडम हो रही गाड़ियों की मरम्मत पर फूंक दिए लाखों रुपये
एक गाड़ी पर 1.70 लाख, दूसरी पर खर्चा एक लाख रुपये
सदन में पेश की गई रिपोर्ट में दिखाया गया कम खर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। चंद दिन बाद कंडम हो रही सरकारी गाड़ियों पर नगर निगम ने रिपेयर के नाम पर लाखों रुपये फूंक डाले। एक गाड़ी पर 1.70 लाख तो दूसरी पर एक लाख रुपया खर्च कर दिया। फिर चंद दिन बाद पासिंग अवधि खत्म बताकर इन्हें सड़क पर खड़ा कर दिया।
निगम में जब इस पर सवाल उठे तो सदन में गलत रिकॉर्ड पेश कर पार्षदों को शांत कर दिया गया। अभी मामला शांत ही हुआ था कि आरटीआई से मिली जानकारी ने नगर निगम की कार्यप्रणाली को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। इसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। निगम सदन में पेश किए रिकॉर्ड के अनुसार पांच वाहनों की रिपेयर पर करीब 2.86 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। वहीं आरटीआई से मिली सूचना के अनुसार इतना खर्च तो सिर्फ दो गाड़ियों पर ही हुआ था। पांच गाड़ियों का खर्च चार लाख रुपये से भी ज्यादा है।
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बड़ा सवाल यह भी है कि जब चंद दिन बाद यह गाड़ियां खड़ी होनी थीं तो इन पर पानी की तरह जनता का पैसा क्यों बहाया गया। मामला शहर में कूड़ा उठाने के लिए चलाई जा रहीं गाड़ियों से जुड़ा है। वार्डाें की संकरी सड़कों से कूड़ा उठाने के लिए नगर निगम ने कई पिकअप वाहन साल 2010 में खरीदे थे। निगम प्रशासन के अनुसार मार्च 2026 में इनकी पासिंग अवधि खत्म हो चुकी है। सरकार के निर्देशानुसार 15 साल बाद किसी भी सरकारी वाहन को नहीं चला सकते।
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सदन में भाजपा ने मांगा था रिकॉर्ड
बीते महीने भाजपा पार्षद कमलेश मेहता ने पांच गाड़ियों का रिकॉर्ड सदन में मांगा था। इसमें निगम से पिछले सात महीने के दौरान इन वाहनों पर किए गए खर्च का ब्योरा मांगा गया था। निगम प्रशासन ने सदन में रिकॉर्ड पेश कर बताया कि कुल 2.86 लाख रुपये इन पांच वाहनों पर सात महीने में खर्च किए गए हैं। निगम ने यह भी माना कि यह कंडम हो गई हैं और अब इन्हें खड़ा कर दिया गया है।
आरटीआई सूचना से चौंकाने वाला खुलासा
आरटीआई कार्यकर्ता पवन कुमार ने नगर निगम से इन्हीं पांच गाड़ियों की आरटीआई से सूचना मांगी थी। सदन की तरह बीते सात महीनों का खर्च का ब्योरा मांगा गया लेकिन यहां जो सूचना मिली वह सदन से बिल्कुल अलग दी गई। गाड़ी नंबर एचपी 7 बी 0751 पर निगम ने कंडम होने से पहले सात महीने में 1.70 लाख रुपये खर्चे। सदन में इसके सिर्फ 74,170 रुपये खर्च करने की जानकारी दी गई। इसी तरह गाड़ी नंबर एचपी 7 बी 0758 पर निगम ने रिपेयर के लिए एक लाख रुपये खर्च किए। सदन में पेश रिपोर्ट के अनुसार इसका खर्च 70580 रुपये दर्शाया है। आरटीआई में कई गाड़ियों के खर्च का ब्योरा तो दिया है लेकिन इसके पूरे बिल नहीं दिए। इस पर भी अब सवाल उठ रहे हैं। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा का कहना है कि पहले आरटीआई से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड देने के निर्देश दिए हैं। सदन और आरटीआई के बिल में अंतर है, इसे चेक किया जाएगा।