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एसआईटी गठित, पीलिया के लिए जिम्मेदार अफसर नपेंगे

Mon, 18 Jan 2016 11:38 AM IST
Updated Mon, 18 Jan 2016 11:38 AM IST
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special investigation team will take action against the officers responsible for viral of jaundice in shimla city

राजधानी में बेकाबू पीलिया के मामले में अब शिमला पुलिस भी सक्रिय हो गई है। शहर में सरकारी और गैर सरकारी जिन जिम्मेदार अफसरों और ठेकेदार की लापरवाही की वजह से पीलिया फैला है, उनकी जांच के लिए रविवार को पुलिस प्रशासन ने स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम का गठन किया है। जल्द ही इस मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ की जाएगी।

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जांच के दायरे में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालक के अलावा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और आईपीएच के जिम्मेदार अफसर भी आ सकते हैं। एसपी ने दो टूक शब्दों में टीम को निर्देश दिए हैं कि इस मामले से जुड़े व्यक्तियों को गिरफ्तार करें। इस पूरे मामले पर जांच टीम से एसपी रोजाना अपडेट लेंगे और तय सीमा पर जांच पूरी कर दी जाएगी।
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सीवरेज युक्त दूषित पानी की सप्लाई को लेकर नगर निगम के डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर की शिकायत के आधार पुलिस ने थाना ढली में मुकदमा दर्ज किया है। पंवर ने कहा था कि शहर में एकाएक पीलिया के मामले बढ़ने के बाद इसका कारण जानना जरूरी था। दिल्ली की लैब में ब्लड सैंपल की जांच के दौरान हैपेटाइटिस ई का खुलासा हुआ।
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मामले की तह तक पहुंचने के लिए हाउस में पार्षदों की कमेटी गठित कर निरीक्षण किया गया। कमेटी की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से रोजाना करीब दो एमएलडी पानी बिना ट्रीट किए अश्वनी खड्ड में छोड़ा जा रहा था। इतना ही नहीं, सितंबर 2014 के ब्लीचिंग पाउडर का एसटीपी में इस्तेमाल किया जा रहा था।

एसआईटी में ये हैं शामिल

special investigation team will take action against the officers responsible for viral of jaundice in shimla city

एसआईटी में एएसपी संदीप धवल को एसआईटी का मुखिया बनाया गया है। इसके अलावा एएसपी गौरव सिंह, डीएसपी दुष्यंत सरपाल, इंस्पेक्टर पीडी ठाकुर और सब इंस्पेक्टर देसराज को टीम में शामिल किया गया है। एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि एसआईटी मामले की जांच कर रही है। जांच में जिस किसी की भी लापरवाही पाई जाती है, उसे तत्काल गिरफ्तार करने के निर्देश टीम को दे दिए गए हैं।

ऐसे आया मामला सामने- शहर में पीलिया के मामले एकाएक कैसे बढ़ गए, ब्लड सैंपल की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। पीलिया पीड़ित लोगों के ब्लड सैंपल की दिल्ली स्थित लैब में जांच के बाद हैपेटाइटिस ई वायरस की मौजूदगी का पता चला है। सीवरेज युक्त पानी का सेवन करने से हैपेटाइटिस ई वायरस पनपता है।

दिल्ली स्थित लैब की रिपोर्ट आने के बाद नगर निगम की टीम ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान प्लांट में भारी अनियमितताएं पाई गईं। पीने के पानी में सीवरेज का पीला पानी मिलता रहा। बावजूद इसके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

क्लीयरिफायर है खराब- पीलिया फैलने का मुख्य कारण बताए जा रहे मल्याणा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन पर चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। प्लांट में लगी मोटरों को रेस्ट देने के लिए हर तीन घंटे बाद करीब आधे घंटे के लिए बंद कर दिया जाता था। इस दौरान सीवरेज अश्वनी खड्ड में बहा दी जाती थी।

आरोप है कि संयंत्र में बिजली बैकअप की व्यवस्था न होने से लाइट जाने पर भी सीवरेज सीधे अश्वनी खड्ड में बहाई जा रही थी। नगर निगम के डिप्टी मेयर की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि प्लांट में गंदगी साफ करने के लिए स्थापित किया सीवरेज क्लीयरिफायर कई सालों से खराब पड़ा था।

मुख्यमंत्री बोले, पीलिया से नहीं हुई कोई मौत- रविवार को निजी आवास हॉली लॉज में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मीडिया से मुखातिब होते हुए पीलिया से जुड़े सवाल के जवाब में कहा कि उनके ध्यान में नहीं है कि शिमला में किसी की पीलिया की वजह से मौत हुई है। उन्होंने कहा कि शिमला में पीलिया पर काबू पा लिया गया है।

प्रदेश सरकार और नगर निगम जिम्मेदार

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नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल ने शिमला में पीलिया के चलते बिगड़ते हालात के लिए कांग्रेस सरकार व नगर निगम शिमला को दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा कि सरकार व नगर निगम की लापरवाही का ही परिणाम है कि सैकड़ों लोग इस बीमारी की चपेट में आ गए हैं। जल्द ही इस स्थिति पर काबू नहीं पाया गया तो परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं।

पिछले कुछ दिनों में शिमला में पीलिया के 700 से अधिक मामले सामने आए हैं और यह संख्या बढ़ती जा रही है। बावजूद इसके सरकार व नगर निगम तमाशबीन बनकर लोगों की जिंदगियों से खिलवाड़ कर रहे हैं। इस समस्या का मुख्य कारण सीवरेज के गंदे पानी का पेयजल के साथ मिलना और पेयजल स्रोतों का उचित रखरखाव न होना है।

इन व्यवस्थाओं सुचारु चलाए रखने में नगर निगम व सरकार दोनों की बराबर जिम्मेदारी है। लेकिन दोनों जगह अक्षम नेतृत्व की वजह से एक भ्रष्ट तंत्र विकसित हो गया है, जिसकी वजह से कोई भी व्यवस्था सुचारु रूप से कार्य नहीं कर पा रही है। इसका खामियाजा राजधानी शिमला की निर्दोष जनता को भुगतना पड़ रहा है। लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

भाजपा का सवाल, अब कहां है नागरिक सभा- शिमला शहर भाजपा मंडल के सचिव संजीव सूद ने नागरिक सभा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि शहर में पीलिया से मौतें हो रही हैं। वामपंथी नागरिक सभा बनाकर आज तक शहर में हो हल्ला डालते थे, लेकिन आज जब सच में नागरिकों की सुरक्षा की बात आई तो उस सभा का कोई अता-पता नहीं है।

नागरिक सभा नगर निगम में बैठे अपने नेताओं को लेकर खामोश है। नगर निगम टैक्स तो लगा रहा है लेकिन सुविधा देने में पूरी तरह से नाकाम है। भाजपा मंडल ने कहा कि शहर वासियों को पिछले छह महीने के पानी का बिल माफ होना चाहिए। जहां पीलिया की वजह से मौतें हुई हैं, उनके परिवार को उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

नगर निगम के महापौर संजय चौहान से तीखे सवाल

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सवाल-शहर में फैल रहे पीलिया के लिए नगर निगम कितना जिम्मेदार है?
जवाब- नगर निगम की पहल से ही शहर में पीलिया फैलने के कारण का खुलासा हुआ है। पीलिया की जड़ तक पहुंचने के लिए कमेटी गठित की गई। कमेटी ने अश्वनी खड्ड और मल्याणा स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का दौरा कर पीलिया के कारण का खुलासा किया।
सवाल- पीलिया की रोकथाम को समय रहते नगर निगम ने ठोस कदम क्यों नहीं उठाए?
जवाब- अश्वनी खड्ड के दूषित पानी से पीलिया फैल रहा है इसका पता चलते ही तुरंत अश्वनी खड्ड से शहर के लिए पानी की पंपिंग बंद करवाई गई और गिरि और गुम्मा से पूरे शहर को पानी उपलब्ध करवाया गया।
सवाल- सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से पानी दूषित न हो इसके लिए नगर निगम ने क्या किया?
जवाब- सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट आईपीएच के अंडर है। संचालन के लिए इसे ठेकेदार को आउट सोर्स किया गया है। ट्रीटमेंट प्लांट से पानी दूषित होने के पुख्ता सबूत मिलने के बाद तुरंत नगर निगम ने इसे लेकर प्रदेश सरकार को सूचित किया।
सवाल- स्थायी समाधान के लिए कोई प्रयास किया?
जवाब- शहर को पानी की बल्क सप्लाई आईपीएच देता है। डिस्ट्रिब्यूशन का काम नगर निगम का है। चांशल से शिमला के लिए पानी पहुंचाने को लेकर नगर निगम ने सरकार को डीपीआर भेजी थी, सरकार ने कोल डैम फाइनल किया। फंड का प्रावधान करना प्रदेश सरकार की जिम्मेवारी है।

आईपीएच के अधीक्षण अभियंता सुशील जस्टा से तीखे सवाल

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सवाल- शहर में फैल रहे पीलिये के लिए आईपीएच कितना जिम्मेदार है?
जवाब- पीलिया रोग के लिए आईपीएच विभाग जिम्मेदार नहीं है।
सवाल- पीलिया की रोकथाम के लिए समय रहते आईपीएच ने ठोस कदम क्यों नहीं उठाए ?
जवाब- आईपीएच विभाग लोगों को पीने के पानी की आपूर्ति करने से पहले पानी की सुपर क्लोरिनेशन करता है। उसके बाद पानी की आपूर्ति करता है।
सवाल- सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से पानी दूषित न हो, इसके लिए आईपीएच ने क्या किया?
जवाब- सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में सीवरेज को प्रापर ट्रीट किया जा रहा है। उसके बाद ट्रीटमेंट प्लांट से जो पानी निकलता है, उसकी क्लोरिनेशन की जाती है।
सवाल- हर साल पीलिया फैलता है। स्थायी समाधान के लिए क्या कोई प्रयास किया गया?
जवाब- पानी का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि आईपीएच के पानी से पीलिया हुआ है या किसी बावड़ी के पानी से।
सवाल- शहर को स्वच्छ पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करवाने के लिए आईपीएच विभाग क्या कर रहा है?
जवाब- स्वच्छ पानी आपूर्ति करने के लिए दूसरी सकीमों से पानी की आपूर्ति को बढ़ा दिया है। नए साफ पानी के स्त्रोंतो का भी निरीक्षण किया जा रहा है।

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