'दोनों राज्यपालों के फैसले कोर्ट में रखे विजिलेंस'
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पूर्व आईपीएस एएन शर्मा को सेवा विस्तार देने के मामले में विजिलेंस की ओर से पेश कि गए चालान की स्क्रूटनी करते हुए विशेष न्यायाधीश वन शिमला आरके शर्मा ने तत्कालीन और वर्तमान दोनों राज्यपालों के फैसले की प्रति भी न्यायालय के समक्ष रखने का आदेश दिया है। न्यायालय की ओर से इस मामले में अगली सुनवाई 8 अप्रैल को तय की गई है।
विजिलेंस ब्यूरो की ओर से 13 मार्च को ही कोर्ट में चालान पेश किया गया था। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के अलावा पूर्व आईपीएस एएन शर्मा, पूर्व मुख्य सचिव रवि ढींगरा और पूर्व गृह सचिव डा. पीसी कपूर भी आरोपी बनाए गए हैं। विजिलेंस की ओर से इन पर भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार रोधी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
राज्यपालों ने नहीं दी थी मंजूरी
प्रदेश सरकार ने आरोपी बनाए गए उक्त तीनों ही पूर्व अधिकारियों की तो अभियोजन मंजूरी दे दी थी, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल पर मुकदमा चलाने के लिए राज्यपालों ने मंजूरी नहीं दी थी। तत्कालीन राज्यपाल उर्मिला सिंह ने जहां फाइल सरकार को लौटा दी थी। साथ ही फाइल भेजने वाले अफसरों पर कार्रवाई करने की संस्तुति की थी।
कुछ केसों का हवाला देते हुए इसे सरकार का अधिकार क्षेत्र बताया था, वहीं प्रदेश के कार्यकारी राज्यपाल कल्याण सिंह ने दोबारा फाइल मंगवाकर अभियोजन मंजूरी देने से साफ तौर पर मना कर दिया था। कल्याण सिंह ने भी अपने फैसले की फाइल पर तीन केसों का हवाला देते हुए अभियोजन मंजूरी नहीं दी।