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सोनिया गांधी के कड़े फैसले में नजर आ रही आनंद शर्मा की 'बिसात'

Fri, 22 Nov 2019 12:18 PM IST
अरविन्द ठाकुर अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 22 Nov 2019 12:18 PM IST
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Sonia Gandhi and Anand Sharma strategy for Himachal Pradesh Congress Committee
पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के प्रदेश कांग्रेस की राज्य, जिला और ब्लाक कार्यकारिणियों को भंग करने के फैसले में पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा के लिए हिमाचल की बिसात बिछाने की झलक नजर आ रही है। प्रदेश भर में कांग्रेस की कार्यकारिणियां भंग होने के बावजूद आनंद शर्मा के करीबी प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर के बने रहने के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

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आनंद शर्मा बीते कई सालों से गांधी परिवार के कोर ग्रुप में शामिल हैं। राष्ट्रीय राजनीति में गांधी परिवार की ढाल बनते आए कांग्रेस के प्रमुख केंद्रीय नेताओं में शुमार आनंद शर्मा की कुलदीप राठौर की नियुक्ति में भी अहम भूमिका रही है। हिमाचल में कांग्रेसियों की गुटबाजी के बीच बीते कुछ समय से अस्वस्थ चलने के कारण सक्रिय राजनीति से तटस्थ होने लगे पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का प्रदेश में विकल्प देने की हाईकमान की तैयारी से भी इस घटनाक्रम को जोड़कर देखा जा रहा है।
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कयास लगाए जा रहे हैं कि साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस हाईकमान प्रदेश में एक नया चेहरा लांच करने की तैयारी में अभी से जुट गई है। इसी कड़ी में बीते कई सालों से कांग्रेस कमेटी में जमे नेताओं को बाहर करने के लिए कार्यकारिणियों को भंग किया गया है ताकि अगले विधानसभा चुनावों में गुटों में बंटी कांग्रेस की जगह नई टीम के जोश के साथ भाजपा का मुकाबला किया जा सके। प्रदेश कांग्रेस में वीरभद्र सिंह और सुक्खू गुट ही बीते कुछ सालों से वर्चस्व में रहे हैं।

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वीरभद्र सिंह के कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए जिन वरिष्ठ नेताओं को पदाधिकारी बनाया गया था, उन्हें सुक्खू ने कांग्रेस के प्रदेश में सत्तासीन होने पर बाहर नहीं किया। इन नेताओं को साथ लेकर सुक्खू ने अपनी नई टीम खड़ी की, जिसका वीरभद्र सिंह लगातार विरोध करते रहे।

कांग्रेस अध्यक्ष बदलने पर राठौर ने भी पुराने पदाधिकारियों को साथ लेकर कुछ क्षेत्रों में नई टीम बनाई। इसके बावजूद लोकसभा चुनाव सहित दो विधानसभा उपचुनावों में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। कांग्रेस नेताओं के मतभेद दूर करने में राठौर भी कामयाब नहीं हो सके।

बकौल राठौर बीते दिनों कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात में उन्होंने अपनी टीम को सही तरीके से न बनाने का दर्द सुनाया। जिसके बाद हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस के इतिहास में पहले बार सभी कार्यकारिणियां भंग करने का फैसला लिया। अब राठौर की अगली भूमिका सोनिया गांधी के फैसले पर टिक गई है। देखना दिलचस्प होगा कि हाईकमान राठौर को शक्तियां देकर मजबूत करती है या किसी और को अध्यक्ष पद देकर नवाजती है।

वीरभद्र का हाल जानने हॉलीलॉज पहुंचे राठौर
वीरवार शाम को कुलदीप राठौर ने हॉलीलॉज पहुंच कर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान व भविष्य की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर विचार विमर्श भी हुआ।

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